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दिवाली से पहले छाई स्मॉग की चादर, लोग रहे परेशान
Updated Mon, 05 Nov 2018 11:25 PM IST
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दिवाली से पहले छाई स्मॉग की चादर
बुलंदशहर। दिवाली से पहले सोमवार को आसमान में स्मॉग की सफेद चादर छा गई। जिससे आबोहवा और खराब हो गई। स्मॉग से सुबह के समय दृश्यता कम हो गई। वहीं, वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया। दिवाली पर आतिशबाजी छोड़ने से हालत और अधिक बिगड़ सकते हैं। वहीं, हवा में घुले स्मॉग के जहर से सांस और अस्थमा रोगियों की परेशानी बढ़ गई है। साथ ही लोगों की आंखों में जलन महसूस हुई।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुआल, कूड़ा और कोयला जलाने पर पूर्णतया रोक नहीं लगने पर सोमवार को दिवाली से पूर्व धुआं और धूल ने स्मॉग का रूप धारण कर लिया। जिससे सांस और अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ गई। साथ ही आंखों में जलन और त्वचा रोग का खतरा बढ़ गया। स्मॉग में बनी सफेद चादर के चलते सुबह के समय दृश्यता कम हो गई, जिसके चलते वाहनों की गति कम हो गई और चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। जानकारी के अनुसार स्मॉग धुंध, कोहरा और धुंआ का मिश्रण है। इसको विशेषज्ञों ने स्मॉग (स्माक और फाग का संयुक्त) नाम दिया है। यह कोहरे और धुंध से 10 गुना ज्यादा खतरनाक है। इससे हर वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इससे बचाव के लिए लोगों ने मास्क और चश्मा आदि का प्रयोग किया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवा चलने के बाद ही स्मॉग से छुटकारा मिलने की उम्मीद है। वहीं, पर्यावरण अधिकारी और जिला प्रशासन लोगों से पुआल, कूड़ा न जलाने, निर्माण कार्य न करने और इस बार धुआं रहित आतिशबाजी का प्रयोग कम करने की लोगों से अपील की। मौसम वैज्ञानिक विवेकराज का कहना है कि बारिश होने से स्मॉग की चादर हट सकती है। फिलहाल बारिश की संभावना बहुत कम है और अब लगातार तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने के भी आसार बन रहे हैं।
प्रदूषण का स्तर खतरे में
स्मॉग के कारण जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरे से अधिक चल रहा है। जानकारी के अनुसार 30 और 31 अक्तूबर के बाद प्रदूषण में कमी आई, लेकिन इसके बाद भी सामान्य से अधिक चलता रहा। प्रदूषण अफसरों के अनुसार पीएम 2.5 न्यूनतम 60 और अधिकतम 150 होना चाहिए जो रविवार को 131 और सोमवार को 370 के पार पहुंच गया। वहीं, पीएम 10 न्यूनतम 100 और अधिकतम 200 होना चाहिए। मशीन खराब होने की वजह से इसका सही अनुमान नही लगाया जा सकता।
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स्मॉग से ये होती है परेशानी
- मार्निंग वाक करने वालों को स्वच्छ वातावरण न मिलना।
- आंखों में जलन, सूजन और पलकों में इंफेक्शन होना।
- स्किन एलर्जी, जलन और खुजली जैसी शिकायत आदि।
- हाईबीपी, हृदय रोगियों के साथ स्वांस रोगियों को भी होती है परेशानी।
ऐसे करें बचाव
स्मॉग की चादर छंटने में अभी समय लग सकता है। वर्षा हो जाने या तेज हवा चलने से इसका प्रभाव कम होगा। वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. एसएन राय के अनुसार ऐसे में लोगों को आंखों पर चश्मा और मास्क लगाकर निकलना चाहिए।
कोट
स्मॉग लोगों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे बचाव के लिए लोगों को मुंह पर कपड़ा ढककर बाहर निकलना चाहिए। छोटे बच्चे व सांस के मरीजों को इस मौसम में कम से कम बाहर निकलना चाहिए। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
प्रदूषण की प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है। वातावरण में प्रदूषण बहुत ज्यादा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। प्रदूषण को बढ़ने से बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। - जीएस श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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बुलंदशहर। दिवाली से पहले सोमवार को आसमान में स्मॉग की सफेद चादर छा गई। जिससे आबोहवा और खराब हो गई। स्मॉग से सुबह के समय दृश्यता कम हो गई। वहीं, वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया। दिवाली पर आतिशबाजी छोड़ने से हालत और अधिक बिगड़ सकते हैं। वहीं, हवा में घुले स्मॉग के जहर से सांस और अस्थमा रोगियों की परेशानी बढ़ गई है। साथ ही लोगों की आंखों में जलन महसूस हुई।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुआल, कूड़ा और कोयला जलाने पर पूर्णतया रोक नहीं लगने पर सोमवार को दिवाली से पूर्व धुआं और धूल ने स्मॉग का रूप धारण कर लिया। जिससे सांस और अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ गई। साथ ही आंखों में जलन और त्वचा रोग का खतरा बढ़ गया। स्मॉग में बनी सफेद चादर के चलते सुबह के समय दृश्यता कम हो गई, जिसके चलते वाहनों की गति कम हो गई और चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा। जानकारी के अनुसार स्मॉग धुंध, कोहरा और धुंआ का मिश्रण है। इसको विशेषज्ञों ने स्मॉग (स्माक और फाग का संयुक्त) नाम दिया है। यह कोहरे और धुंध से 10 गुना ज्यादा खतरनाक है। इससे हर वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इससे बचाव के लिए लोगों ने मास्क और चश्मा आदि का प्रयोग किया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवा चलने के बाद ही स्मॉग से छुटकारा मिलने की उम्मीद है। वहीं, पर्यावरण अधिकारी और जिला प्रशासन लोगों से पुआल, कूड़ा न जलाने, निर्माण कार्य न करने और इस बार धुआं रहित आतिशबाजी का प्रयोग कम करने की लोगों से अपील की। मौसम वैज्ञानिक विवेकराज का कहना है कि बारिश होने से स्मॉग की चादर हट सकती है। फिलहाल बारिश की संभावना बहुत कम है और अब लगातार तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने के भी आसार बन रहे हैं।
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प्रदूषण का स्तर खतरे में
स्मॉग के कारण जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरे से अधिक चल रहा है। जानकारी के अनुसार 30 और 31 अक्तूबर के बाद प्रदूषण में कमी आई, लेकिन इसके बाद भी सामान्य से अधिक चलता रहा। प्रदूषण अफसरों के अनुसार पीएम 2.5 न्यूनतम 60 और अधिकतम 150 होना चाहिए जो रविवार को 131 और सोमवार को 370 के पार पहुंच गया। वहीं, पीएम 10 न्यूनतम 100 और अधिकतम 200 होना चाहिए। मशीन खराब होने की वजह से इसका सही अनुमान नही लगाया जा सकता।
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स्मॉग से ये होती है परेशानी
- मार्निंग वाक करने वालों को स्वच्छ वातावरण न मिलना।
- आंखों में जलन, सूजन और पलकों में इंफेक्शन होना।
- स्किन एलर्जी, जलन और खुजली जैसी शिकायत आदि।
- हाईबीपी, हृदय रोगियों के साथ स्वांस रोगियों को भी होती है परेशानी।
ऐसे करें बचाव
स्मॉग की चादर छंटने में अभी समय लग सकता है। वर्षा हो जाने या तेज हवा चलने से इसका प्रभाव कम होगा। वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. एसएन राय के अनुसार ऐसे में लोगों को आंखों पर चश्मा और मास्क लगाकर निकलना चाहिए।
कोट
स्मॉग लोगों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे बचाव के लिए लोगों को मुंह पर कपड़ा ढककर बाहर निकलना चाहिए। छोटे बच्चे व सांस के मरीजों को इस मौसम में कम से कम बाहर निकलना चाहिए। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
प्रदूषण की प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है। वातावरण में प्रदूषण बहुत ज्यादा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। प्रदूषण को बढ़ने से बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। - जीएस श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड