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डीएपी के दाम बढ़कर हुए 1400 रुपये प्रति कट्टा
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:42 PM IST
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डीएपी के दाम बढ़कर हुए 1400 रुपये प्रति कट्टा
बुलंदशहर। खेती में प्रयोग होने वाली डीएपी के लगातार दाम बढ़ने से किसानों की कमर टूटेगी। छह माह पहले इसका रेट 1076 रुपये प्रति कट्टा था, जिसके अब किसानों को 1400 रुपये देने होंगे। इन दिनों पांच बार दाम बढ़ाए जाने से किसानों में रोष है।
लगभग सभी फसलों में डीएपी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसके बिना फसल अच्छी नहीं होती और भूमि की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाती है। लेकिन पिछले छह माह से डीएपी के लगातार दाम बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही किसानों की भी चिंता बढ़ती जा रही है। जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार ने बताया कि करीब छह माह पहले डीएपी के दाम 1076 रुपये प्रति कट्टा थे। इसके बाद रेट बढ़कर 1200 रुपये हुआ। उसके बाद 1290 और फिर 1340 हो गया। साथ ही अब डीएपी का रेट बढ़कर 1400 रुपये प्रति कट्टा हो गया है। अब किसानों को डीएपी लेने पर 1400 रुपये प्रति कट्टा देना होगा। लगातार डीएपी के दाम बढ़ने से किसानों में रोष है। उनका कहना है कि डीएपी के रेट उनकी कमर तोड़ने का काम करेंगे। किसान जगवीर सिंह, रामचंद्र, मुकेश कुमार, भगत सिंह, जोगिंद्र सिंह, राजपाल सिंह और महेंद्र सिंह का कहना है कि एक ओर तो सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है। वहीं, दूसरी ओर डीजल, बिजली का बिल, बीज, उर्वरक और डीएपी आदि के लगातार दाम बढ़ाती जा रही है। ऐसे में किसान की आय कैसे दोगुनी होगी। इस ओर सरकार ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। गेहूं का समर्थन मूल्य 105 रुपये बढ़ाकर सिर्फ लालीपॉप देने का काम किया है। सरकार को चाहिए कि डीएपी के दाम घटाए जाएं। साथ ही यदि किसानों की आय दोगुनी करनी है तो केंद्र व प्रदेश सरकार को किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं को सही तरीके से चलाना होगा। फसलों का मूल्य लागत मूल्य पर निर्धारित किया जाए। फसल खरीद सरकारी करवाई जाए और बिचौलियों की मनोपोली को तोड़ा जाए। तभी किसान का कुछ भला हो सकता है।
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बुलंदशहर। खेती में प्रयोग होने वाली डीएपी के लगातार दाम बढ़ने से किसानों की कमर टूटेगी। छह माह पहले इसका रेट 1076 रुपये प्रति कट्टा था, जिसके अब किसानों को 1400 रुपये देने होंगे। इन दिनों पांच बार दाम बढ़ाए जाने से किसानों में रोष है।
लगभग सभी फसलों में डीएपी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसके बिना फसल अच्छी नहीं होती और भूमि की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाती है। लेकिन पिछले छह माह से डीएपी के लगातार दाम बढ़ते जा रहे हैं। साथ ही किसानों की भी चिंता बढ़ती जा रही है। जिला कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार ने बताया कि करीब छह माह पहले डीएपी के दाम 1076 रुपये प्रति कट्टा थे। इसके बाद रेट बढ़कर 1200 रुपये हुआ। उसके बाद 1290 और फिर 1340 हो गया। साथ ही अब डीएपी का रेट बढ़कर 1400 रुपये प्रति कट्टा हो गया है। अब किसानों को डीएपी लेने पर 1400 रुपये प्रति कट्टा देना होगा। लगातार डीएपी के दाम बढ़ने से किसानों में रोष है। उनका कहना है कि डीएपी के रेट उनकी कमर तोड़ने का काम करेंगे। किसान जगवीर सिंह, रामचंद्र, मुकेश कुमार, भगत सिंह, जोगिंद्र सिंह, राजपाल सिंह और महेंद्र सिंह का कहना है कि एक ओर तो सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है। वहीं, दूसरी ओर डीजल, बिजली का बिल, बीज, उर्वरक और डीएपी आदि के लगातार दाम बढ़ाती जा रही है। ऐसे में किसान की आय कैसे दोगुनी होगी। इस ओर सरकार ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। गेहूं का समर्थन मूल्य 105 रुपये बढ़ाकर सिर्फ लालीपॉप देने का काम किया है। सरकार को चाहिए कि डीएपी के दाम घटाए जाएं। साथ ही यदि किसानों की आय दोगुनी करनी है तो केंद्र व प्रदेश सरकार को किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं को सही तरीके से चलाना होगा। फसलों का मूल्य लागत मूल्य पर निर्धारित किया जाए। फसल खरीद सरकारी करवाई जाए और बिचौलियों की मनोपोली को तोड़ा जाए। तभी किसान का कुछ भला हो सकता है।
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