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अब अस्पताल में प्रसूताओं को मिलेगी गर्मी से निजात
Updated Sat, 16 Jun 2018 12:36 AM IST
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अब अस्पताल में प्रसूताओं को मिलेगी गर्मी से निजात
बुलंदशहर। महिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डिलीवरी होने के बाद वार्ड में पर्याप्त में पंखे न होने पर प्रसूताओं को घर से हाथ का पंखा भी साथ लेकर आना पड़ रहा है। प्रसूताओं को हो रही परेशानियों की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रशासन ने जल्द ही कूलर लगवाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
शासन एक तरफ जहां मातृ एवं बाल शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए योजनाएं बना रहा है और लोगों को जागरूक करने के लिए अनेकों योजनाएं चला रहा है, लेकिन अस्पताल में पहुंचने के बाद मातृ एवं शिशु को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 60 से 70 प्रसूताओं को प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती किया जाता है और डिलीवरी होने के बाद तीन अलग-अलग वार्डों में शिफ्ट कर दिया जाता है। जहां पर प्रसूताओं को भीषण गर्मी से निजात दिलाने के लिए नाम मात्र पंखे लगे हुए हैं और कुछ बेड पर पंखे ही नहीं है। ऐसे में प्रसूताओं को घर से पंखा मंगवाना पड़ रहा था। प्रसूताओं की इस समस्या को अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में भीषण गर्मी में पंखे के बिना तड़प रहीं प्रसूताएं शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की थी। अमर उजाला की खबर को स्वास्थ्य विभाग के अफसरों द्वारा संज्ञान में लेने पर अस्पताल प्रशासन की नींद टूटी। क्वालिटी मैनेजर डॉ. अंजलि ने बताया कि जिन बेड के आस-पास पंखे नहीं है, वहां जल्द ही कूलर लगवाने की तैयारी की जा रही है। प्रसूताओं को भीषण गर्मी से निजात दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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बुलंदशहर। महिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डिलीवरी होने के बाद वार्ड में पर्याप्त में पंखे न होने पर प्रसूताओं को घर से हाथ का पंखा भी साथ लेकर आना पड़ रहा है। प्रसूताओं को हो रही परेशानियों की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रशासन ने जल्द ही कूलर लगवाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
शासन एक तरफ जहां मातृ एवं बाल शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए योजनाएं बना रहा है और लोगों को जागरूक करने के लिए अनेकों योजनाएं चला रहा है, लेकिन अस्पताल में पहुंचने के बाद मातृ एवं शिशु को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 60 से 70 प्रसूताओं को प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती किया जाता है और डिलीवरी होने के बाद तीन अलग-अलग वार्डों में शिफ्ट कर दिया जाता है। जहां पर प्रसूताओं को भीषण गर्मी से निजात दिलाने के लिए नाम मात्र पंखे लगे हुए हैं और कुछ बेड पर पंखे ही नहीं है। ऐसे में प्रसूताओं को घर से पंखा मंगवाना पड़ रहा था। प्रसूताओं की इस समस्या को अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में भीषण गर्मी में पंखे के बिना तड़प रहीं प्रसूताएं शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की थी। अमर उजाला की खबर को स्वास्थ्य विभाग के अफसरों द्वारा संज्ञान में लेने पर अस्पताल प्रशासन की नींद टूटी। क्वालिटी मैनेजर डॉ. अंजलि ने बताया कि जिन बेड के आस-पास पंखे नहीं है, वहां जल्द ही कूलर लगवाने की तैयारी की जा रही है। प्रसूताओं को भीषण गर्मी से निजात दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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