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अब जच्चा-बच्चा की भी निगरानी करेंगी आशाएं
Updated Sat, 12 May 2018 11:24 PM IST
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अब जच्चा-बच्चा की भी निगरानी करेंगी आशाएं
- प्रसव के 42 दिन बाद तक करनी होगी देखभाल
- आशाओं को जल्द दिया जाएगा प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। गर्भवती महिलाओं के प्रसव के 42 दिन बाद तक आशाओं को जच्चा और बच्चा दोनों की निगरानी करनी होगी। इसके लिए शासन ने आदेश जारी कर दिए हैं। जल्द ही आशाओं को प्रशिक्षण देकर कार्य सौंपा जाएगा।
कुपोषण को समाप्त करने के लिए शासन द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इसके बाद भी शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी नहीं आ रही हैं। बच्चों के पैदा होने के बाद से ही उनकी सही देखभाल हो तथा कुपोषण की बीमारी न हो, इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताआें और आशाओं को गर्भवती महिलाओं की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। प्रसव के बाद आशाएं प्रसूताओं के घर जाना बंद कर देती है। इससे जच्चा और बच्चा के स्वास्थ्य की सही तरीके से देखरेख नहीं हो पाती है। अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से होम बेस न्यूबॉर्न केयर के तहत आशाओं को प्रसव के बाद 42 दिन तक जच्चा और बच्चा की देखभाल करनी होगी। प्रभारी सीएमओ डॉ. सुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि जिले की सभी आशाओं और संबंधित स्टाफ को जल्द ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद आशाएं प्रसूताओं के घरों पर जाकर जच्चा और बच्चा की 42 दिनों तक देखभाल करेंगी।
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- प्रसव के 42 दिन बाद तक करनी होगी देखभाल
- आशाओं को जल्द दिया जाएगा प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। गर्भवती महिलाओं के प्रसव के 42 दिन बाद तक आशाओं को जच्चा और बच्चा दोनों की निगरानी करनी होगी। इसके लिए शासन ने आदेश जारी कर दिए हैं। जल्द ही आशाओं को प्रशिक्षण देकर कार्य सौंपा जाएगा।
कुपोषण को समाप्त करने के लिए शासन द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन इसके बाद भी शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी नहीं आ रही हैं। बच्चों के पैदा होने के बाद से ही उनकी सही देखभाल हो तथा कुपोषण की बीमारी न हो, इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताआें और आशाओं को गर्भवती महिलाओं की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। प्रसव के बाद आशाएं प्रसूताओं के घर जाना बंद कर देती है। इससे जच्चा और बच्चा के स्वास्थ्य की सही तरीके से देखरेख नहीं हो पाती है। अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से होम बेस न्यूबॉर्न केयर के तहत आशाओं को प्रसव के बाद 42 दिन तक जच्चा और बच्चा की देखभाल करनी होगी। प्रभारी सीएमओ डॉ. सुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि जिले की सभी आशाओं और संबंधित स्टाफ को जल्द ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद आशाएं प्रसूताओं के घरों पर जाकर जच्चा और बच्चा की 42 दिनों तक देखभाल करेंगी।
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