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किसान के गन्ने की जिम्मेदारी डीएम व डीसीओ की: राकेश टिकैत
Updated Fri, 11 May 2018 10:00 PM IST
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किसान के गन्ने की जिम्मेदारी डीएम व डीसीओ की: राकेश टिकैत
- कामर्शियल सिलिंडर की तरह चीनी का कामर्शियल मूल्य निर्धारित करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
स्याना।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान का जिस क्षेत्र में गन्ना बचे, उसे दूसरी शुगर मिल के क्षेत्र में भेजने की जिम्मेदारी डीएम व डीसीओ की है। यदि किसानों का गन्ना खेत से उठे बगैर शुगर मिल बंद हो गईं तो किसान अपना गन्ना सरकारी कार्यालयों में भरेंगे। भाकियू के जिला प्रभारी तेजवीर सिंह के कैंप कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने यह बातें कहीं।
राकेश टिकैत ने कहा कि एनजीटी किसान के दस वर्ष पुराने ट्रैक्टर बंद कराना चाहती है तो इसके लिए सरकार 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से एग्रीकल्चरल ग्रीन रिलीफ फंड बनाए, जिससे किसान के ट्रैक्टर बंद होने पर उसे क्षतिपूर्ति मिल सके। उन्होंने किसानों से अपने ट्रैक्टरों पर मॉडल नंबर लिखने का आह्वान किया। कैराना व नूरपुर उप चुनाव में समर्थन के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भाकियू द्वारा किसी भी दल को समर्थन नहीं दिया जा रहा। टिकैत ने कहा कि मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द रहने वाले अधिकारी उन्हें सही सलाह नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है। तय समय में गन्ना भुगतान न होना इसका एक उदाहरण है। उन्होंने प्रदेश सरकार को आगामी चुनावों को देखकर काम किए जाने की बात कही। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्याना फल पट्टी क्षेत्र का किसान बीमारी व आपदा के कारण बेहद परेशान है। इसके लिए किसानों को मुआवजा मिलना न्याय संगत है। उन्होंने कामर्शियल सिलिंडर की तरह चीनी का भी कामर्शियल मूल्य निर्धारित करने की बात कही। इस दौरान मांगेराम त्यागी, गुड्डू प्रधान, ऋषिपाल सिंह, यशवीर सिंह, तेजवीर सिंह, दयाचंद त्यागी मौजूद रहे। बाद में मांगेराम त्यागी के कैंप कार्यालय पर राकेश टिकैत का स्वागत किया गया। इस दौरान कपीस त्यागी, पंकज शर्मा, मुनीराज त्यागी, राम गोपाल त्यागी, शरद चौधरी, डॉ. अब्दुल मन्नान आदि मौजूद रहे।
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- कामर्शियल सिलिंडर की तरह चीनी का कामर्शियल मूल्य निर्धारित करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
स्याना।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान का जिस क्षेत्र में गन्ना बचे, उसे दूसरी शुगर मिल के क्षेत्र में भेजने की जिम्मेदारी डीएम व डीसीओ की है। यदि किसानों का गन्ना खेत से उठे बगैर शुगर मिल बंद हो गईं तो किसान अपना गन्ना सरकारी कार्यालयों में भरेंगे। भाकियू के जिला प्रभारी तेजवीर सिंह के कैंप कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने यह बातें कहीं।
राकेश टिकैत ने कहा कि एनजीटी किसान के दस वर्ष पुराने ट्रैक्टर बंद कराना चाहती है तो इसके लिए सरकार 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से एग्रीकल्चरल ग्रीन रिलीफ फंड बनाए, जिससे किसान के ट्रैक्टर बंद होने पर उसे क्षतिपूर्ति मिल सके। उन्होंने किसानों से अपने ट्रैक्टरों पर मॉडल नंबर लिखने का आह्वान किया। कैराना व नूरपुर उप चुनाव में समर्थन के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भाकियू द्वारा किसी भी दल को समर्थन नहीं दिया जा रहा। टिकैत ने कहा कि मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द रहने वाले अधिकारी उन्हें सही सलाह नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है। तय समय में गन्ना भुगतान न होना इसका एक उदाहरण है। उन्होंने प्रदेश सरकार को आगामी चुनावों को देखकर काम किए जाने की बात कही। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्याना फल पट्टी क्षेत्र का किसान बीमारी व आपदा के कारण बेहद परेशान है। इसके लिए किसानों को मुआवजा मिलना न्याय संगत है। उन्होंने कामर्शियल सिलिंडर की तरह चीनी का भी कामर्शियल मूल्य निर्धारित करने की बात कही। इस दौरान मांगेराम त्यागी, गुड्डू प्रधान, ऋषिपाल सिंह, यशवीर सिंह, तेजवीर सिंह, दयाचंद त्यागी मौजूद रहे। बाद में मांगेराम त्यागी के कैंप कार्यालय पर राकेश टिकैत का स्वागत किया गया। इस दौरान कपीस त्यागी, पंकज शर्मा, मुनीराज त्यागी, राम गोपाल त्यागी, शरद चौधरी, डॉ. अब्दुल मन्नान आदि मौजूद रहे।
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