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12 वर्ष बाद मिला सर्पदंश का शिकार बालक
Updated Tue, 08 May 2018 10:08 PM IST
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12 वर्ष बाद मिला सर्पदंश का शिकार बालक
- तीन वर्ष की उम्र में सांप के काटने पर बालक को साथ ले गए थे बायगीर
खानपुर। क्षेत्र के गांव जरिया आलमपुर में मंगलवार को अनोखा कारनामा हुआ। जिस बालक को 12 वर्ष पूर्व सांप ने डस लिया था, वह मंगलवार को अचानक अपने घर पहुंच गया। एक बार तो ग्रामीणों को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन परिजनों द्वारा जानकारी देने पर ग्रामीण सहमत हुए।
क्षेत्र के गांव जरिया आलमपुर निवासी मदन सिंह के पुत्र गगन को तीन वर्ष की उम्र में सांप ने डस लिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई। करीब 12 वर्ष पूर्व हुई घटना में परिजनों ने गगन के शव को गंगा में बहा दिया था। बताया जा रहा है कि उसके बाद गगन के परिजनों ने बच्चे को मृत समझ लिया था, लेकिन गत दिनों सिकंदराबाद स्थित एक गोशाला के नजदीक बसे बायगीरों के डेरों में एक बालक को देखकर उन्हें अपने बच्चे का एहसास हुआ। गगन की मां गायत्री लोधी ने जानकारी की तो बायगीरों ने उन्हें पूरी बात बताई। जिसके बाद परिजनों ने छानबीन की। परिजनों की बात सुनकर बायगीरों ने भी उनके बच्चे को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। गगन की मां गायत्री ने बताया कि गगन के सीने पर बने तिल के निशान से उन्हें गगन की पहचान हुई। बताया कि ग्रामीणों ने पहले उनकी बात पर विश्वास नहीं किया, लेकिन बाद में वह भी सहमत हो गए। बायगीरों ने भी गगन को उसके परिजनों को सौंप दिया।
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- तीन वर्ष की उम्र में सांप के काटने पर बालक को साथ ले गए थे बायगीर
खानपुर। क्षेत्र के गांव जरिया आलमपुर में मंगलवार को अनोखा कारनामा हुआ। जिस बालक को 12 वर्ष पूर्व सांप ने डस लिया था, वह मंगलवार को अचानक अपने घर पहुंच गया। एक बार तो ग्रामीणों को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन परिजनों द्वारा जानकारी देने पर ग्रामीण सहमत हुए।
क्षेत्र के गांव जरिया आलमपुर निवासी मदन सिंह के पुत्र गगन को तीन वर्ष की उम्र में सांप ने डस लिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई। करीब 12 वर्ष पूर्व हुई घटना में परिजनों ने गगन के शव को गंगा में बहा दिया था। बताया जा रहा है कि उसके बाद गगन के परिजनों ने बच्चे को मृत समझ लिया था, लेकिन गत दिनों सिकंदराबाद स्थित एक गोशाला के नजदीक बसे बायगीरों के डेरों में एक बालक को देखकर उन्हें अपने बच्चे का एहसास हुआ। गगन की मां गायत्री लोधी ने जानकारी की तो बायगीरों ने उन्हें पूरी बात बताई। जिसके बाद परिजनों ने छानबीन की। परिजनों की बात सुनकर बायगीरों ने भी उनके बच्चे को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। गगन की मां गायत्री ने बताया कि गगन के सीने पर बने तिल के निशान से उन्हें गगन की पहचान हुई। बताया कि ग्रामीणों ने पहले उनकी बात पर विश्वास नहीं किया, लेकिन बाद में वह भी सहमत हो गए। बायगीरों ने भी गगन को उसके परिजनों को सौंप दिया।
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