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दुकानों पर बिक रही प्राइवेट किताब, डीआइओएस ने जांच से पल्ला झाड़ा
Updated Thu, 05 Apr 2018 10:16 PM IST
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दुकानों पर बिक रही प्राइवेट किताब, डीआइओएस ने जांच से झाड़ा पल्ला
- कोर्स के साथ तीन से चार एनसीइआरटी की किताब लगा रहे दुकानदार
- डीआइओएस का तर्क नहीं कर सकते जांच, उनके दायरे से बाहर मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। शासन और प्रशासन की सख्ती से कुछ सुधार हुआ। अभिभावकों ने भी कुछ राहत की सांस ली, लेकिन दुकानों पर अभी भी प्राइवेट किताब बिक रही हैं। अभिभावकों का आरोप है कि कोर्स के साथ दुकानदार तीन से चार ही एनसीइआरटी की किताब लगा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जिला विद्यालय निरीक्षक यह मामला अपने दायरे से बाहर होने का तर्क देकर जांच से पल्ला झाड़ रहे हैं।
इस बार शासन के आदेश पर डीएम डॉ. रोशन जैकब की सख्ती का ही नतीजा रहा कि अभिभावकों को महंगी किताबों से राहत मिली। इस पूरी कार्रवाई पर नजर रखने के लिए डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक को जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि शुरूआत में इस सख्ती का असर दिखाई दिया और निजी स्कूल संचालकों के साथ पुस्तक बेचने वाले दुकानदारों ने भी पालन किया, लेकिन जैसे-जैसे मामला शांत होने लगा और अफसरों ने मुंह फेर लिया तो दुकानदारों ने प्राइवेट किताबों को ज्यादा अहमियत देनी शुरू कर दी। ऐसा कर वह अधिक मुनाफा भी कमा रहे हैं। जबकि इसका असर अभिभावकाें पर पड़ रहा है। इस तरह की शिकायत भी जिला विद्यालय निरीक्षक को मिल रही हैं। इनमें आरोप लगाए जा रहे हैं कि दुकानदार कोर्स के साथ तीन से चार किताब एनसीइआरटी की और शेष प्राइवेट पब्लिर्स की किताब देकर अधिक राशि वसूल रहे हैं। इस बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार आर्य का तर्क है कि वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। यह काम उनके दायरे से बाहर हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसका कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा। इससे वह डीएम को भी अवगत करवाएंगे। प्रयास किया जाएगा कि दुकानदारों पर सख्ती बरती जाए। वहीं, दूसरी ओर कुछ स्कूलों की शिकायत मिल रही है कि वह कोर्स स्कूल से ही उपलब्ध करवा रहे हैं। इसका पता लगवाया जा रहा है और पता लगते ही कार्रवाई की जाएगी।
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- कोर्स के साथ तीन से चार एनसीइआरटी की किताब लगा रहे दुकानदार
- डीआइओएस का तर्क नहीं कर सकते जांच, उनके दायरे से बाहर मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। शासन और प्रशासन की सख्ती से कुछ सुधार हुआ। अभिभावकों ने भी कुछ राहत की सांस ली, लेकिन दुकानों पर अभी भी प्राइवेट किताब बिक रही हैं। अभिभावकों का आरोप है कि कोर्स के साथ दुकानदार तीन से चार ही एनसीइआरटी की किताब लगा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जिला विद्यालय निरीक्षक यह मामला अपने दायरे से बाहर होने का तर्क देकर जांच से पल्ला झाड़ रहे हैं।
इस बार शासन के आदेश पर डीएम डॉ. रोशन जैकब की सख्ती का ही नतीजा रहा कि अभिभावकों को महंगी किताबों से राहत मिली। इस पूरी कार्रवाई पर नजर रखने के लिए डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक को जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि शुरूआत में इस सख्ती का असर दिखाई दिया और निजी स्कूल संचालकों के साथ पुस्तक बेचने वाले दुकानदारों ने भी पालन किया, लेकिन जैसे-जैसे मामला शांत होने लगा और अफसरों ने मुंह फेर लिया तो दुकानदारों ने प्राइवेट किताबों को ज्यादा अहमियत देनी शुरू कर दी। ऐसा कर वह अधिक मुनाफा भी कमा रहे हैं। जबकि इसका असर अभिभावकाें पर पड़ रहा है। इस तरह की शिकायत भी जिला विद्यालय निरीक्षक को मिल रही हैं। इनमें आरोप लगाए जा रहे हैं कि दुकानदार कोर्स के साथ तीन से चार किताब एनसीइआरटी की और शेष प्राइवेट पब्लिर्स की किताब देकर अधिक राशि वसूल रहे हैं। इस बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार आर्य का तर्क है कि वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। यह काम उनके दायरे से बाहर हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसका कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा। इससे वह डीएम को भी अवगत करवाएंगे। प्रयास किया जाएगा कि दुकानदारों पर सख्ती बरती जाए। वहीं, दूसरी ओर कुछ स्कूलों की शिकायत मिल रही है कि वह कोर्स स्कूल से ही उपलब्ध करवा रहे हैं। इसका पता लगवाया जा रहा है और पता लगते ही कार्रवाई की जाएगी।
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