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जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को समय से नहीं मिल रहा खाना
Updated Tue, 19 Dec 2017 10:49 PM IST
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जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को समय से नहीं मिल रहा खाना
- समय सारिणी के अनुसार खाना न देने के मामले में अफसर चुप
- मरीजों ने लगाया खाने की गुणवत्ता खराब होने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जिले के सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्थाएं प्रसूताओं पर भारी पड़ रही हैं। जिला महिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद भर्ती प्रसूताओं को समय से खाना नहीं मिल रहा है। मजबूरी में प्रसूताओं के परिजन घर से खाना लाकर खिला रहे हैं। जिसके चलते ठेकेदार अफसरों के साथ मिलकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 से अधिक प्रसूताएं वार्ड में भर्ती रहती हैं। शासन की ओर से प्रसूता महिलाएं को नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। इनको प्रतिदिन सुबह नाश्ता उसके बाद मौसमानुसार फल और दोपहर व शाम को खाना दिया जाता है। जिला महिला अस्पताल के पीएनसी और सर्जिकल वार्ड में भर्ती प्रसूताओं को काफी समय से नाश्ता और खाना समय से नहीं मिल पा रहा है। समय सारणी के अनुसार प्रसूताओं को सुबह 8:30 पर दिया जाने वाला नाश्ते में दूध व बिस्कुट डेढ घंटा देरी से करीब 10:00 बजे दिया जा रहा है, सुबह 10:00 बजे मिलने वाले फल और दोपहर 12:00 बजे मिलने वाला खाना दोपहर बाद 1:30 बजे दिया जा रहा है। वहीं शाम को 6:00 बजे दिए जाने वाला खाना भी एक से डेढ घंटा देरी से दिया जा रहा है। इसके अलावा जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी खाना नसीब नहीं हो पा रहा है। कभी दोपहर में खाना दे दिया जाता है कभी कई-कई दिनों तक खाने की छुट्टी कर दी जाती है। इस बाबत मरीजों ने कई बार अफसरों को शिकायत भी की, लेकिन अफसरों के कान पर कोई जूं नहीं रेंगी। मरीजों के अनुसार खाना वितरित करने वाला वार्ड के बाहर से आवाज लगाकर मरीजों के पहुंचने से पहले ही मौके से गायब हो जाता है।
समय से खाना नहीं मिलता है। आज भी दूध देरी से सप्लाई किया गया था, जिसके चलते घर से मंगाकर दूध पी लिया था। - गीता शर्मा, प्रसूता
खाने के नाम पर अस्पताल में खानापूर्ति की जा रही है। अफसरों से शिकायत की गई थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। देरी से खाना मिलने के चलते घर से खाना मंगाकर खा लिया है। - नेहा शर्मा, प्रसूता
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प्रसव के बाद पोषित खाने की आवश्यकता होती है। योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। - गुड़िया शर्मा, प्रसूता
खाने की गुणवत्ता काफी खराब है। निरीक्षण पर आईं डॉक्टर से शिकायत की है। - काजल गर्ग, प्रसूता
कोट
मरीजों की हर संभव मदद करने तथा उन्हें बेहतर खाना उपलब्ध करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई कर्मचारी इसमें लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. बीना रानी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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- समय सारिणी के अनुसार खाना न देने के मामले में अफसर चुप
- मरीजों ने लगाया खाने की गुणवत्ता खराब होने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जिले के सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्थाएं प्रसूताओं पर भारी पड़ रही हैं। जिला महिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद भर्ती प्रसूताओं को समय से खाना नहीं मिल रहा है। मजबूरी में प्रसूताओं के परिजन घर से खाना लाकर खिला रहे हैं। जिसके चलते ठेकेदार अफसरों के साथ मिलकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 से अधिक प्रसूताएं वार्ड में भर्ती रहती हैं। शासन की ओर से प्रसूता महिलाएं को नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। इनको प्रतिदिन सुबह नाश्ता उसके बाद मौसमानुसार फल और दोपहर व शाम को खाना दिया जाता है। जिला महिला अस्पताल के पीएनसी और सर्जिकल वार्ड में भर्ती प्रसूताओं को काफी समय से नाश्ता और खाना समय से नहीं मिल पा रहा है। समय सारणी के अनुसार प्रसूताओं को सुबह 8:30 पर दिया जाने वाला नाश्ते में दूध व बिस्कुट डेढ घंटा देरी से करीब 10:00 बजे दिया जा रहा है, सुबह 10:00 बजे मिलने वाले फल और दोपहर 12:00 बजे मिलने वाला खाना दोपहर बाद 1:30 बजे दिया जा रहा है। वहीं शाम को 6:00 बजे दिए जाने वाला खाना भी एक से डेढ घंटा देरी से दिया जा रहा है। इसके अलावा जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी खाना नसीब नहीं हो पा रहा है। कभी दोपहर में खाना दे दिया जाता है कभी कई-कई दिनों तक खाने की छुट्टी कर दी जाती है। इस बाबत मरीजों ने कई बार अफसरों को शिकायत भी की, लेकिन अफसरों के कान पर कोई जूं नहीं रेंगी। मरीजों के अनुसार खाना वितरित करने वाला वार्ड के बाहर से आवाज लगाकर मरीजों के पहुंचने से पहले ही मौके से गायब हो जाता है।
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समय से खाना नहीं मिलता है। आज भी दूध देरी से सप्लाई किया गया था, जिसके चलते घर से मंगाकर दूध पी लिया था। - गीता शर्मा, प्रसूता
खाने के नाम पर अस्पताल में खानापूर्ति की जा रही है। अफसरों से शिकायत की गई थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। देरी से खाना मिलने के चलते घर से खाना मंगाकर खा लिया है। - नेहा शर्मा, प्रसूता
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प्रसव के बाद पोषित खाने की आवश्यकता होती है। योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। - गुड़िया शर्मा, प्रसूता
खाने की गुणवत्ता काफी खराब है। निरीक्षण पर आईं डॉक्टर से शिकायत की है। - काजल गर्ग, प्रसूता
कोट
मरीजों की हर संभव मदद करने तथा उन्हें बेहतर खाना उपलब्ध करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई कर्मचारी इसमें लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. बीना रानी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल