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फिर टला बड़ा हादसा, बाल-बाल बचे बच्चे

Sat, 07 Oct 2017 11:15 PM IST
Updated Sat, 07 Oct 2017 11:15 PM IST
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फिर टला बड़ा हादसा, बाल-बाल बचे बच्चे
फिर टला बड़ा हादसा, बाल-बाल बचे बच्चे
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- गुलावठी के गांव बराल स्थित परिषदीय स्कूल की छत का प्लास्टर गिरा
- स्कूल में मची भगदड़, दहशत में बच्चे
- अभिभावक बोले अब मरम्मत के बाद ही बच्चे जाएंगे स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर/गुलावठी। गांव बराल स्थित प्राथमिक विद्यालय शनिवार सुबह समय पर खुला। जैसे ही बच्चे पढ़ने के लिए एक कक्ष में बैठे तो अचानक छत का प्लास्टर गिर गया। इससे क्लास में भगदड़ मच गई। गनीमत रही कि हादसे में कोई बच्चा जख्मी नहीं हुआ। हादसे के बाद बच्चों में दहशत है। गुस्साए अभिभावकों ने अब मरम्मत के बाद ही बच्चों को स्कूल भेजने की बात कही है।
ग्रामीण चंद्रपाल जाटव, मीना जाटव, सोनिया, नबाव खां आदि का कहना है कि तीन दिन पहले भी कमरे की छत से प्लास्टर गिरा था। शनिवार को ज्यादा प्लास्टर गिरा है। प्राथमिक विद्यालय में लगातार कई दिन से छत से प्लास्टर गिरने की शिकायत विद्यालय की प्रधानाध्यापक ऋचा गुप्ता ने अधिकारियों से की, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल के कई कमरे जर्जर अवस्था में हैं। उन्हें डर है कि कोई बड़ा हादसा न हो जाए। विद्यालय के शौचालय की हालत भी दयनीय है। इस संबंध में एबीएसए समय सिंह सागर का कहना है कि विद्यालय के कमरे की छत से प्लास्टर गिरने की जानकारी प्रधानाध्यापक ने उन्हें नहीं दी। पता चलते ही सख्त हिदायत थी कि जर्जर भवन में बच्चों को न बैठाया जाए। वह इस संबंध में मामले की जांच करेंगे।
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अफसरों की लापरवाही हुई उजागर
बुलंदशहर। गांव बराल में छत का प्लास्टर गिरने की घटना ने एक बार फिर अफसरों की लापरवाही उजागर कर दी है। जिले में कई हादसे होने के बाद भी अफसर नींद से नहीं जागे हैं। नगर में पिछले माह बारिश के दौरान मामन चौकी के पास प्राथमिक विद्यालय बाजार नगर और मोहल्ला देवीपुरा प्रथम स्थित प्राथमिक स्कूल की छत गिर गई थी। गनीमत यह थी कि जिस समय छत गिरी थी उस समय स्कूल बंद था। यदि स्कूल खुला होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। ककोड़ क्षेत्र में भी एक स्कूल की छत गिरी थी। वहीं दूसरी और इससे पहले डिबाई और सिकंदराबाद में स्कूलों की छत गिरने से भी हादसे हो चुके हैं। यहां पर कई बच्चों को चोट भी आई। सिकंदराबाद में कई बच्चों की मौत हो गई थी। इतना ही नहीं जिले में 70 से अधिक स्कूल किराए की बिल्डिंग में चल रहे हैं और 80 से अधिक परिषदीय स्कूलों के भवन जर्जर हालत में हैं। 200 से अधिक स्कूल भवनों में दरार आ चुकी है और फर्श टूट चुकी हैं। बावजूद इसके अफसर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं।
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जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए कई बार शासन से डिमांड की जा चुकी है, लेकिन आज तक बजट नहीं मिला। इसके चलतेे विभाग मजबूर है। बिना राशि के स्कूल भवनों की मरम्मत नहीं कराई जा सकती। प्रयास किया जा रहा है कि ग्राम प्रधानों को मिलने वाली राशि से स्कूलों के जर्जर भवनों की मरम्मत करवाई जाए। - अजीत कुमार, बीएसए
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