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आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस अस्पताल के गैराज में बंद
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:40 AM IST
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आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस आईसीयू में
शासन द्वारा मरीजों के लिए प्रदान की गई आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस खुद आईसीयू में है। चालक न होने के चलते वह जिला अस्पताल के गैराज में बंद पड़ी है। दो साल में एंबुलेंस मरीजों के बजाए माननीयों के आने पर ही निकाली गई है।
एंबुलेंस से एक भी गरीब मरीज कहीं रेफर नहीं किया गया है। शासन ने उक्त एंबुलेंस के लिए पांच रुपये प्रति किलोमीटर किराया निर्धारित किया है। जिस पर उसे देश भर के किसी भी अस्पताल में ले जाया जा सकता है।
शासन से जिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस दी गई थी। उक्त एंबुलेंस के मेंटीनेंस के लिए शासन ने पांच रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब के किराया निर्धारित किया है।
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आवश्यकता पड़ने पर एंबुलेंस से मरीज को देश के किसी भी अस्पताल में ले जाया जा सकता है। दो साल बीतने को हैं, अभी तक एंबुलेंस से एक भी मरीज को अन्यत्र अस्पताल में नहीं ले जाया गया है।
जब जिले में किसी बड़े नेता का दौरा होता है तो एंबुलेंस को गैराज से निकालकर माननीयों की ड्यूटी में लगा दिया जाता है। एंबुलेंस प्रदान करते हुए साफ तौर पर स्वास्थ्य अफसरों को निर्देशित किया गया था कि मरीजों की सुविधा के लिए उक्त एंबुलेंस को इमरजेंसी के गेट पर तैनात रखा जाए।
निजी एंबुलेंस संचालकों से सेेटिंग के चलते अभी तक एक बार भी आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस को इमरजेंसी के गेट पर मरीजों की सेवा के लिए नहीं लगाया गया है।
कमीशन के कारण स्वास्थ्य कर्मचारी निजी एंबुलेंस संचालकों को फोन पर मरीज को हायर सेंटर या अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह देते हैं। सख्त आदेशों के बाद भी जिला अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंसों की लाइन लगी रहती है।
शासन द्वारा जिला अस्पताल के लिए प्रदत्त एंबुलेंस का किराया पांच रुपये प्रति किलोमीटर है। यदि मरीज को मेरठ हायर सेंटर जाना है तो उसे उक्त एंबुलेंस के माध्यम से करीब छह सौ रुपये अदा करने होते हैं।
जबकि निजी एंबुलेंसों मरीजों से दो से ढाई हजार रुपये किराया वसूला जाता है। इसमें स्वास्थ्य कर्मचारियों का कमीशन भी एंबुलेंस संचालकों द्वारा जोड़ लिया जाता है।
शासन द्वारा दी गई एंबुलेंस माननीयों की सेवा में करीब 20 हजार किमी का सफर कर चुकी है। इसके लिए किसी भी व्यक्ति या नेता द्वारा कोई किराया नहीं दिया है।
जबकि मरीजों से किराया मिलने के आदेशों के बाद भी उक्त एंबुलेंस को मरीजों की सेवा में नहीं लगाया गया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान 20 हजार किमी के सफर पर आए मेंटीनेंस का खर्चा भी अस्पताल प्रशासन द्वारा ही उठाया गया है।
चालक की कमी के कारण एंबुलेंस को पूरी तरह से संचालित करने में परेशानी हो रही है। चालक की भर्ती या संविदा पर तैनात करने के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई निर्देश नहीं मिल सके हैं। चालक मिलने पर एंबुलेंस को मरीजों की सेवा में लगा दिया जाएगा। - डॉ. राजकुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
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शासन द्वारा मरीजों के लिए प्रदान की गई आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस खुद आईसीयू में है। चालक न होने के चलते वह जिला अस्पताल के गैराज में बंद पड़ी है। दो साल में एंबुलेंस मरीजों के बजाए माननीयों के आने पर ही निकाली गई है।
एंबुलेंस से एक भी गरीब मरीज कहीं रेफर नहीं किया गया है। शासन ने उक्त एंबुलेंस के लिए पांच रुपये प्रति किलोमीटर किराया निर्धारित किया है। जिस पर उसे देश भर के किसी भी अस्पताल में ले जाया जा सकता है।
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शासन से जिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस दी गई थी। उक्त एंबुलेंस के मेंटीनेंस के लिए शासन ने पांच रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब के किराया निर्धारित किया है।
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आवश्यकता पड़ने पर एंबुलेंस से मरीज को देश के किसी भी अस्पताल में ले जाया जा सकता है। दो साल बीतने को हैं, अभी तक एंबुलेंस से एक भी मरीज को अन्यत्र अस्पताल में नहीं ले जाया गया है।
जब जिले में किसी बड़े नेता का दौरा होता है तो एंबुलेंस को गैराज से निकालकर माननीयों की ड्यूटी में लगा दिया जाता है। एंबुलेंस प्रदान करते हुए साफ तौर पर स्वास्थ्य अफसरों को निर्देशित किया गया था कि मरीजों की सुविधा के लिए उक्त एंबुलेंस को इमरजेंसी के गेट पर तैनात रखा जाए।
निजी एंबुलेंस संचालकों से सेेटिंग के चलते अभी तक एक बार भी आधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस को इमरजेंसी के गेट पर मरीजों की सेवा के लिए नहीं लगाया गया है।
कमीशन के कारण स्वास्थ्य कर्मचारी निजी एंबुलेंस संचालकों को फोन पर मरीज को हायर सेंटर या अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह देते हैं। सख्त आदेशों के बाद भी जिला अस्पताल परिसर में निजी एंबुलेंसों की लाइन लगी रहती है।
शासन द्वारा जिला अस्पताल के लिए प्रदत्त एंबुलेंस का किराया पांच रुपये प्रति किलोमीटर है। यदि मरीज को मेरठ हायर सेंटर जाना है तो उसे उक्त एंबुलेंस के माध्यम से करीब छह सौ रुपये अदा करने होते हैं।
जबकि निजी एंबुलेंसों मरीजों से दो से ढाई हजार रुपये किराया वसूला जाता है। इसमें स्वास्थ्य कर्मचारियों का कमीशन भी एंबुलेंस संचालकों द्वारा जोड़ लिया जाता है।
शासन द्वारा दी गई एंबुलेंस माननीयों की सेवा में करीब 20 हजार किमी का सफर कर चुकी है। इसके लिए किसी भी व्यक्ति या नेता द्वारा कोई किराया नहीं दिया है।
जबकि मरीजों से किराया मिलने के आदेशों के बाद भी उक्त एंबुलेंस को मरीजों की सेवा में नहीं लगाया गया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान 20 हजार किमी के सफर पर आए मेंटीनेंस का खर्चा भी अस्पताल प्रशासन द्वारा ही उठाया गया है।
चालक की कमी के कारण एंबुलेंस को पूरी तरह से संचालित करने में परेशानी हो रही है। चालक की भर्ती या संविदा पर तैनात करने के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई निर्देश नहीं मिल सके हैं। चालक मिलने पर एंबुलेंस को मरीजों की सेवा में लगा दिया जाएगा। - डॉ. राजकुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल