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Budaun News: मोबाइल फोन पर बात कर वाहन चलाते युवा जोखिम में डाल रहे जान
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बाइक सलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता चालक। संवाद
बदायूं। वाहन चलाने के दौरान मोबाइल फोन पर बात करना खुद के अलावा दूसरों की जिंदगी के लिए भी खतरनाक है। अक्सर ऐसे हादसों में लोगों की मौके पर ही मौत हो जाती है तो कुछ अस्पताल में दम तोड़ देते हैं। कई मामलों में लोग जिंदगी भर के लिए अपंग हो जाते हैं। कभी-कभी यह वाहन चालक दूसरों की जान भी ले बैठते हैं।
ऐसा ही एक मामला शनिवार को सामने आया था। कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव कैथोला के रहने वाले देव सिंह का पांच साल का बेटा शशिकांत सुबह करीब नौ बजे खेलते-खेलते घर के बाहर सड़क पर आ गया। इसी दौरान तेज रफ्तार पिकअप चालक मोबाइल फोन पर बात करता हुआ आया और बच्चे को रौंदता चला गया। बच्चे की मौत से पूरा परिवार क्षुब्ध है। रविवार को भी बाइक सवार फोन पर बात करते जा रहे थे। अचानक बाइक के सामने गोवंश आ जाने से बाइक टकरा गई, जिसमें शहर के राजू, विनोद घायल हो गए। इसके बाद भी लोग मानने को तैयार नहीं हैं।
हर माह होते हैं चालान
ट्रैफिक पुलिस के टीएसआई अजय पाल सिंह ने बताया कि दोपहिया वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करने वालों का ट्रैफिक पुलिस चालान करती है। प्रतिमाह ऐसे वाहन चलाने वाले औसतन 25 लोगों के चालान होते हैं। एआरटीओ और उनकी टीम भी ऐसे मामलों में कार्रवाई करती है। उनकी कार्रवाई का फोकस चार पहिया वाहनों पर रहता है जिनके चालक वाहन ड्राइव करते समय मोबाइल पर बात करते हैं।
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युवाओं को देना चाहिए इस ओर ध्यान
चलते वाहन पर मोबाइल से बात करते वक्त ध्यान दूसरी ओर चला जाता है और उसका परिणाम दुर्घटना होता है। इसलिए युवाओं को वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात नहीं करना चाहिए। जरूरी होने पर वाहन को रोककर बात करना ही बेहतर रहेगा।
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ऐसा ही एक मामला शनिवार को सामने आया था। कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव कैथोला के रहने वाले देव सिंह का पांच साल का बेटा शशिकांत सुबह करीब नौ बजे खेलते-खेलते घर के बाहर सड़क पर आ गया। इसी दौरान तेज रफ्तार पिकअप चालक मोबाइल फोन पर बात करता हुआ आया और बच्चे को रौंदता चला गया। बच्चे की मौत से पूरा परिवार क्षुब्ध है। रविवार को भी बाइक सवार फोन पर बात करते जा रहे थे। अचानक बाइक के सामने गोवंश आ जाने से बाइक टकरा गई, जिसमें शहर के राजू, विनोद घायल हो गए। इसके बाद भी लोग मानने को तैयार नहीं हैं।
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हर माह होते हैं चालान
ट्रैफिक पुलिस के टीएसआई अजय पाल सिंह ने बताया कि दोपहिया वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करने वालों का ट्रैफिक पुलिस चालान करती है। प्रतिमाह ऐसे वाहन चलाने वाले औसतन 25 लोगों के चालान होते हैं। एआरटीओ और उनकी टीम भी ऐसे मामलों में कार्रवाई करती है। उनकी कार्रवाई का फोकस चार पहिया वाहनों पर रहता है जिनके चालक वाहन ड्राइव करते समय मोबाइल पर बात करते हैं।
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युवाओं को देना चाहिए इस ओर ध्यान
चलते वाहन पर मोबाइल से बात करते वक्त ध्यान दूसरी ओर चला जाता है और उसका परिणाम दुर्घटना होता है। इसलिए युवाओं को वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात नहीं करना चाहिए। जरूरी होने पर वाहन को रोककर बात करना ही बेहतर रहेगा।

बाइक सलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता चालक। संवाद