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...दास्तां तक भी न होगी हमारी दास्तानों में
बदायूं
Updated Mon, 11 Jan 2016 07:07 PM IST
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समाज में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने के लिए गिंदो देवी स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में समाज शास्त्र विभाग की ओर से नारी सशक्तिकरण, मिथक या वास्तविकता विषय पर एक प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नारी सशक्तिकरण के पक्ष में विचार रखने वाली दीक्षा गुप्ता, स्वाती पटेल और सृष्टि राठौर को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय और विपक्ष में निशा मेराज और कनुप्रिया को प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ।
प्राचार्य गार्गी बुलबुल ने कहा कि नारी सशक्तिकरण का मुद्दा एक प्रश्नचिन्ह बनता जा रहा है। महिलाओं के अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को ग्रहण करना ही सशक्ता प्रदान करता है। विशिष्ट अतिथि पवन कुमार ने कहा कि महिलाएं आत्मनिर्भर होकर आर्थिक एवं पारिवारिक दायित्वों को पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन कर रही हैं। डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने कहा कि 'अब भी न संभलेगी तो मिट जाएगी खुद ही। दास्तां तक भी न होगी हमारी दास्तानों में'
इस दौरान डॉ. साधना अग्रवाल, डॉ. उमा सिंह गौर, सरला देवी के साथ ही छात्रा निशा मेराज, दीक्षा, रुखसार, साक्षी, सृष्टि, कनुप्रिया ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डॉ. निशि अवस्थी, डॉ. रितु रस्तोगी, डॉ. तरुणलता, डॉ. सरोज, डॉ. सूरज कांति आदि मौजूद रहीं।
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प्राचार्य गार्गी बुलबुल ने कहा कि नारी सशक्तिकरण का मुद्दा एक प्रश्नचिन्ह बनता जा रहा है। महिलाओं के अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को ग्रहण करना ही सशक्ता प्रदान करता है। विशिष्ट अतिथि पवन कुमार ने कहा कि महिलाएं आत्मनिर्भर होकर आर्थिक एवं पारिवारिक दायित्वों को पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन कर रही हैं। डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने कहा कि 'अब भी न संभलेगी तो मिट जाएगी खुद ही। दास्तां तक भी न होगी हमारी दास्तानों में'
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इस दौरान डॉ. साधना अग्रवाल, डॉ. उमा सिंह गौर, सरला देवी के साथ ही छात्रा निशा मेराज, दीक्षा, रुखसार, साक्षी, सृष्टि, कनुप्रिया ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डॉ. निशि अवस्थी, डॉ. रितु रस्तोगी, डॉ. तरुणलता, डॉ. सरोज, डॉ. सूरज कांति आदि मौजूद रहीं।
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