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Budaun News: मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं
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बदायूं। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए अब मशरूम की खेती करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए महिलाओं के 35-35 के बैच बनाकर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद बाद उन्हें कारोबार शुरू करने के लिए सीसीएल के तहत ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में 20 हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इन समूह से 2 लाख महिलाएं जुड़कर स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। साथ ही अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। एनआरएलम विभाग ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को समूह से जोड़ने के लिए अभियान चलाते हुए उन्हें कौशल के अनुसार ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
महिलाओं को कारोबार शुरू करने के लिए योजनाओं का लाभ देकर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी के तहत अब महिलाओं को मशरूम की खेती करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
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पात्र गृहस्थी व अंत्योदय कार्डधारक परिवार की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इसमें उन्हें कौशल के अनुसार आरसेटी से प्रशिक्षण दिलाकर रोजगार मुहैया कराया जाएगा। मशरूम की खेती बहुत ही कम जगह और कम लागत से शुरू होने वाला कारोबार है। 30 से 40 दिनों में फसल तैयार होने से साल में कई बार उत्पादन संभव है। इससे महिलाओं की आय बढ़ेगी और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। - अखिलेश चौबे, डीसी एनआरएलएम
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में 20 हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इन समूह से 2 लाख महिलाएं जुड़कर स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। साथ ही अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। एनआरएलम विभाग ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को समूह से जोड़ने के लिए अभियान चलाते हुए उन्हें कौशल के अनुसार ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
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महिलाओं को कारोबार शुरू करने के लिए योजनाओं का लाभ देकर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी के तहत अब महिलाओं को मशरूम की खेती करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
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पात्र गृहस्थी व अंत्योदय कार्डधारक परिवार की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इसमें उन्हें कौशल के अनुसार आरसेटी से प्रशिक्षण दिलाकर रोजगार मुहैया कराया जाएगा। मशरूम की खेती बहुत ही कम जगह और कम लागत से शुरू होने वाला कारोबार है। 30 से 40 दिनों में फसल तैयार होने से साल में कई बार उत्पादन संभव है। इससे महिलाओं की आय बढ़ेगी और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। - अखिलेश चौबे, डीसी एनआरएलएम