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अस्तित्व विहीन जुगाड़ पर भी लगाया पार्किंग शुल्क
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 19 Sep 2016 11:44 PM IST
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अस्तित्व विहीन जुगाड़ पर भी लगाया पार्किंग शुल्क
- फोटो : अमर उजाला
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ठेके की पर्चियों में जुगाड़ वाहन पर है 40 रुपया शुल्क
पार्किंग शुल्क के लिए नगर निकायों में क्या खेल चल रहा है, यह ठेकेदारों की रसीद देखकर समझा जा सकता है। हालांकि परिवहन विभाग के अभिलेखों में जुगाड़ वाहन का कहीं पर भी उल्लेख नहीं मिलेगा, लेकिन पार्किंग वसूली की रसीदों से साफ है कि कायदे-कानून को ठेंगा दिखाकर महज पैसे के लिए कुछ भी किया जा सकता है। ऐसा ही नमूना कछला नगर पंचायत के पार्किंग शुल्क की रसीद में देखने को मिला। यही नहीं, जुगाड़ वाहन पर पार्किंग शुल्क 40 रुपया निर्धारित कर दिया गया है।
पार्किंग शुल्क का मतलब है कि बाहर से आने-जाने वाला वाहन अगर नगर निकाय क्षेत्र में रुककर लोडिंग या फिर अनलोडिंग करता है तो बतौर पार्किंग शुल्क निर्धारित धनराशि वसूल की जाती है। वसूली की श्रेणी में आने वाले वाहनों के नाम भी पार्किंग शुल्क की रसीदों पर प्रिंट होते हैं। पार्किंग की रसीदों पर जुगाड़ वाहन पर शुल्क इसलिए भी नहीं लग सकता कि वह संभागीय या फिर उप संभागीय परिवहन कार्यालयों में रजिस्टर्ड नहीं होते। रजिस्टर्ड नहीं होने की वजह से परिवहन विभाग ने जुगाड़ वाहनों पर रोड टैक्स भी नहीं रखा है।
जानकारों की मानें तो जुगाड़ वाहन करीब एक दशक पहले अस्तित्व में आए। कहा तो यह भी गया था कि जुगाड़ वाहन का इस्तेमाल महज कृषि कार्य के लिए ही किया जाएगा। पर नगर निकायों ने पार्किंग शुल्क वसूली के लिए जुगाड़ को भी रसीदों में वाहन का दर्जा दे दिया। यह इसलिए भी कि ठेके की आमदनी में इजाफा होगा। पुलिस के पास की छोड़िए, परिवहन विभाग के कार्यालय में जुगाड़ वाहन की संख्या से जुड़ा कोई अभिलेख नहीं मिल पाएगा लेकिन फिलहाल तो जुगाड़ वाहन संचालकों से पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है।
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भाकियू ने बंद कराई थी उगाही
उझानी। जुगाड़ वाहन संचालकों से वसूली की एक समय प्रथा सी बन गई थी। डग्गामारी के लिए जुगाड़ वाहन जिस इलाके से होकर गुजरता उसी थाना क्षेत्र के पुलिस कर्मी बाकायदा वसूली में जुट जाते थे। करीब पांच साल पहले भारतीय किसान यूनियन ने जुगाड़ को कृषि कार्य से जुड़ा बताकर आंदोलन की राह पकड़ी तो संचालकों से पुलिस ने उगाही बंद कर दी थी। इस वक्त जुगाड़ वाहनों की संख्या भी काफी कम बताई गई है।
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जुगाड़ जैसे किसी भी वाहन का रिकार्ड में उल्लेख नहीं है। उन्हें तो कहीं पर भी जुगाड़ वाहन नजर भी नहीं आते लेकिन अगर पार्किंग शुल्क वसूले जाने की शिकायत है तो सच्चाई का पता लगाया जाएगा। अभी तक उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला भी नहीं आया है।
- जंगबहादुर यादव, एसडीएम सदर।
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पार्किंग शुल्क के लिए नगर निकायों में क्या खेल चल रहा है, यह ठेकेदारों की रसीद देखकर समझा जा सकता है। हालांकि परिवहन विभाग के अभिलेखों में जुगाड़ वाहन का कहीं पर भी उल्लेख नहीं मिलेगा, लेकिन पार्किंग वसूली की रसीदों से साफ है कि कायदे-कानून को ठेंगा दिखाकर महज पैसे के लिए कुछ भी किया जा सकता है। ऐसा ही नमूना कछला नगर पंचायत के पार्किंग शुल्क की रसीद में देखने को मिला। यही नहीं, जुगाड़ वाहन पर पार्किंग शुल्क 40 रुपया निर्धारित कर दिया गया है।
पार्किंग शुल्क का मतलब है कि बाहर से आने-जाने वाला वाहन अगर नगर निकाय क्षेत्र में रुककर लोडिंग या फिर अनलोडिंग करता है तो बतौर पार्किंग शुल्क निर्धारित धनराशि वसूल की जाती है। वसूली की श्रेणी में आने वाले वाहनों के नाम भी पार्किंग शुल्क की रसीदों पर प्रिंट होते हैं। पार्किंग की रसीदों पर जुगाड़ वाहन पर शुल्क इसलिए भी नहीं लग सकता कि वह संभागीय या फिर उप संभागीय परिवहन कार्यालयों में रजिस्टर्ड नहीं होते। रजिस्टर्ड नहीं होने की वजह से परिवहन विभाग ने जुगाड़ वाहनों पर रोड टैक्स भी नहीं रखा है।
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जानकारों की मानें तो जुगाड़ वाहन करीब एक दशक पहले अस्तित्व में आए। कहा तो यह भी गया था कि जुगाड़ वाहन का इस्तेमाल महज कृषि कार्य के लिए ही किया जाएगा। पर नगर निकायों ने पार्किंग शुल्क वसूली के लिए जुगाड़ को भी रसीदों में वाहन का दर्जा दे दिया। यह इसलिए भी कि ठेके की आमदनी में इजाफा होगा। पुलिस के पास की छोड़िए, परिवहन विभाग के कार्यालय में जुगाड़ वाहन की संख्या से जुड़ा कोई अभिलेख नहीं मिल पाएगा लेकिन फिलहाल तो जुगाड़ वाहन संचालकों से पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है।
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भाकियू ने बंद कराई थी उगाही
उझानी। जुगाड़ वाहन संचालकों से वसूली की एक समय प्रथा सी बन गई थी। डग्गामारी के लिए जुगाड़ वाहन जिस इलाके से होकर गुजरता उसी थाना क्षेत्र के पुलिस कर्मी बाकायदा वसूली में जुट जाते थे। करीब पांच साल पहले भारतीय किसान यूनियन ने जुगाड़ को कृषि कार्य से जुड़ा बताकर आंदोलन की राह पकड़ी तो संचालकों से पुलिस ने उगाही बंद कर दी थी। इस वक्त जुगाड़ वाहनों की संख्या भी काफी कम बताई गई है।
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जुगाड़ जैसे किसी भी वाहन का रिकार्ड में उल्लेख नहीं है। उन्हें तो कहीं पर भी जुगाड़ वाहन नजर भी नहीं आते लेकिन अगर पार्किंग शुल्क वसूले जाने की शिकायत है तो सच्चाई का पता लगाया जाएगा। अभी तक उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला भी नहीं आया है।
- जंगबहादुर यादव, एसडीएम सदर।