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कहां गए रोडवेज बसों की आय के 90 लाख छुट्टे रुपये?
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 23 Nov 2016 11:19 PM IST
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रोडवेज
- फोटो : अमर उजाला
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अधिकांश रोडवेज परिचालक यात्रियों को कर देते हैं मना
आय के 1.84 करोड़ में अधिकांश हजार-पांच सौ के नोट
नोट बंदी से लेकर 21 नवंबर तक परिवहन विभाग के पास आए करीब 90 लाख रुपये के छोटे नोट आखिर कहां चले गए। इस बारे में रोडवेज के अधिकारी कर्मचारी बता नहीं पा रहे हैं। नोटबंदी से 12 दिन तक आए करीब 1.84 करोड़ रुपये में आधे के करीब छोटे नोट शामिल थे, जिन्हें विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों ने पुराने नोट से बदलकर जमा कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को हजार और पांच सौ रुपये बंद करने के साथ यात्रा में इन रुपयो को चालू रखने के लिए निर्देश थे, जिससे कि लोगों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो, लेकिन इसका फायदा यात्रियों को न के बराबर मिला। हां, इतना जरूर हुआ कि रोडवेज में कार्यरत चालकों, परिचालकों और विभागीय अधिकारियों के पांच सौ और हजार के नोट वाले लाखों रुपये सौ और 50 के नोट में बदल गए। इससे उनका लाखों का काला धन सफेद हो गया। इसकी पुष्टि इस बात से हो जाती है कि नौ से 21 नवंबर तक रोडवेज को आय के रूप में एक करोड़ 84 लाख रुपये जमा हुए थे, जिसमें चंद लाख को छोड़ दें तो अधिकांश रुपये हजार और पांच सौ के नोट ही जमा किए गए, जबकि इसके दूसरे पहलू पर जाएं तो अधिकांश परिचालकों ने यात्रियों से हजार और पांच सौ रुपये के नोट लेने से साफ मना कर दिया था। हां, इतना जरूर हुआ था कि पांच सौ के नोट में पूरे रुपये से टिकट लेने पर जरूर लेते थे। ऐसे यात्रियों की संख्या बस में बीस से तीस फीसदी के बीच और आय का करीब 40 से 50 फीसदी होती थी, लेकिन रोडवेज के परिचालकों ने आय के रूप में केवल हजार और पांच सौ रुपये के नोट ही जमा किए। अब सवाल यह उठता है कि परिवहन विभाग के पास जो 90 लाख रुपये के करीब 100 और 50 रुपये के नोट आए, आखिर उनका क्या हुआ।
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रोडवेज परिचालकों ने हजार और पांच सौ रुपये के नोट ही जमा किए हैं। यदि परिचालक के पास कुछ खुले रुपये बचे भी होते हैं, तो वह अगले दिन रुपये एक्सचेंज करने के लिए बचाकर रख लेता है। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुक्रम में रोडवेज परिचालक तो यात्रियों को टिकट के लिए मना भी नहीं कर सकता है।
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राजेश कुमार, एआरएम
रोडवेज के अधिकारी बदलते थे रुपये
बदायूं। बदायूं से दिल्ली, फर्रुखाबाद, बरेली, चंदौसी, मुरादाबाद आदि रूटों पर चलने वाली बसों से जो छोटे नोट आते थे, उन्हें परिवहन विभाग के अधिकारी बदल लेते थे। कुछ परिचालक से मिली जानकारी के मुताबिक विभागीय अधिकारी उन लोगों से शहर में प्रवेश से पहले ही नोट बदल लेते थे और कार्रवाई के डर से वे लोग इसका विरोध भी नहीं कर सकते हैं। वहीं, जो रुपये बचते थे, उनमें से कुछ छोटे रुपये के नोट कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी बदल लेते थे। इससे छोटे नोटों का बंदरबांट करके उनके बदले कैश में पांच सौ और हजार के नोट दे दिए जाते थे।
आय के 1.84 करोड़ में अधिकांश हजार-पांच सौ के नोट
नोट बंदी से लेकर 21 नवंबर तक परिवहन विभाग के पास आए करीब 90 लाख रुपये के छोटे नोट आखिर कहां चले गए। इस बारे में रोडवेज के अधिकारी कर्मचारी बता नहीं पा रहे हैं। नोटबंदी से 12 दिन तक आए करीब 1.84 करोड़ रुपये में आधे के करीब छोटे नोट शामिल थे, जिन्हें विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों ने पुराने नोट से बदलकर जमा कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को हजार और पांच सौ रुपये बंद करने के साथ यात्रा में इन रुपयो को चालू रखने के लिए निर्देश थे, जिससे कि लोगों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो, लेकिन इसका फायदा यात्रियों को न के बराबर मिला। हां, इतना जरूर हुआ कि रोडवेज में कार्यरत चालकों, परिचालकों और विभागीय अधिकारियों के पांच सौ और हजार के नोट वाले लाखों रुपये सौ और 50 के नोट में बदल गए। इससे उनका लाखों का काला धन सफेद हो गया। इसकी पुष्टि इस बात से हो जाती है कि नौ से 21 नवंबर तक रोडवेज को आय के रूप में एक करोड़ 84 लाख रुपये जमा हुए थे, जिसमें चंद लाख को छोड़ दें तो अधिकांश रुपये हजार और पांच सौ के नोट ही जमा किए गए, जबकि इसके दूसरे पहलू पर जाएं तो अधिकांश परिचालकों ने यात्रियों से हजार और पांच सौ रुपये के नोट लेने से साफ मना कर दिया था। हां, इतना जरूर हुआ था कि पांच सौ के नोट में पूरे रुपये से टिकट लेने पर जरूर लेते थे। ऐसे यात्रियों की संख्या बस में बीस से तीस फीसदी के बीच और आय का करीब 40 से 50 फीसदी होती थी, लेकिन रोडवेज के परिचालकों ने आय के रूप में केवल हजार और पांच सौ रुपये के नोट ही जमा किए। अब सवाल यह उठता है कि परिवहन विभाग के पास जो 90 लाख रुपये के करीब 100 और 50 रुपये के नोट आए, आखिर उनका क्या हुआ।
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रोडवेज परिचालकों ने हजार और पांच सौ रुपये के नोट ही जमा किए हैं। यदि परिचालक के पास कुछ खुले रुपये बचे भी होते हैं, तो वह अगले दिन रुपये एक्सचेंज करने के लिए बचाकर रख लेता है। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुक्रम में रोडवेज परिचालक तो यात्रियों को टिकट के लिए मना भी नहीं कर सकता है।
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राजेश कुमार, एआरएम
रोडवेज के अधिकारी बदलते थे रुपये
बदायूं। बदायूं से दिल्ली, फर्रुखाबाद, बरेली, चंदौसी, मुरादाबाद आदि रूटों पर चलने वाली बसों से जो छोटे नोट आते थे, उन्हें परिवहन विभाग के अधिकारी बदल लेते थे। कुछ परिचालक से मिली जानकारी के मुताबिक विभागीय अधिकारी उन लोगों से शहर में प्रवेश से पहले ही नोट बदल लेते थे और कार्रवाई के डर से वे लोग इसका विरोध भी नहीं कर सकते हैं। वहीं, जो रुपये बचते थे, उनमें से कुछ छोटे रुपये के नोट कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी बदल लेते थे। इससे छोटे नोटों का बंदरबांट करके उनके बदले कैश में पांच सौ और हजार के नोट दे दिए जाते थे।