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डीआरडीए के बाबुओं पर कब होगी रिपोर्ट, अफसर उलझन में

Thu, 30 Jun 2016 12:05 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Thu, 30 Jun 2016 12:05 AM IST
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विधायक निधि समेत सात फाइलें गायब होने का मामला,  एफआईआर का हो चुका है आदेश
 जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) में फाइल गायब करने के मामले में तीन बाबुओं के खिलाफ एफआईआर के आदेश हुए थे। इसमें विधायक निधि समेत सात फाइलें गायब हुई हैं। इन फाइलों में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का ब्योरा दिया गया था। फाइलें न मिलने के बाद न सिर्फ बाबू, बल्कि कुछ अधिकारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। फिलहाल डीआरडीए के परियोजना निदेशक ने तीन बाबुओं के खिलाफ एफआईआर कराने की बात कही, लेकिन कब होगी? इस बारे में नहीं बताया। 
सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया को फाइलें उपलब्ध न कराने पर उन्होंने तीन संबंधित लिपिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। इसमें लिपिक राजीव गुप्ता पर विधायक निधि की चिकित्सा संबंधी फाइल, अनिल कुमार पर वित्तीय वर्ष 2013-14 की बिसौली के विधायक निधि की दो और दातागंज क्षेत्र की एक फाइल, जबकि राजीव भारतीय पर सांसद निधि, विशेष ऑडिट और ईओडब्ल्यू से संबंधित तीन फाइलें होना बताया गया। इन फाइलों के अब तक न मिलने पर सीडीओ ने दो रिमांइडर भी भेजे। इसके बाद सक्रिय हुए कर्मचारियों ने अपने को बचाने की जुगत लगानी शुरू कर दी। अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी।
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तीनों बाबुओं के खिलाफ जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इस मामले में कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। आरोपी बाबुओं के खिलाफ एफआईआर भी होगी, लेकिन कितना वक्त लगेगा। इस बारे में तय नहीं किया जा सकता है।
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-रवींद्र नाथ सिंह, डीआरडीए
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फाइलें मिलीं तो लपेटे में आएंगे एक मंडलीय अफसर
लखनऊ की आर्थिक अपराध शाखा कर रही इस मामले की जांच
सांसद और विधायक निधि के करोड़ों रुपये का ब्यौरा फाइलों में था दर्ज
 डीआरडीए से सांसद, विधायक और जांच संबंधी सात फाइलें गायब होने
की गाज केवल बाबुओं पर नहीं गिरेगी। इसकी जद में कुछ अधिकारी भी आएंगे। गायब हुई फाइलें यदि मिल गईं, तो मंडल के एक अफसर पर भी गाज गिर सकती है, क्योंकि गायब हुई सात फाइलों में एक जांच फाइल भी शामिल है, जिसकी जांच लखनऊ की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इस जांच के दायरे में यही अफसर हैं। इसी वजह से जांच संबंधित फाइल गायब करने की आशंका जताई जा रही है। 
वित्तीय वर्ष 2003-04 में जब परियोजना निदेशक के रूप में आरसी सिंह तैनात थे और सीडीओ का पद मौजूदा समय मंडल में रहे एक अफसर संभाल रहे थे। उस दौरान डीआरडीए से संबंधित प्रशासनिक मद की जांच संयुक्त विकास आयुक्त की ओर से कराई गई थी। यह ऑडिट तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी से संबंधित था। इसी मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा लखनऊ की ओर से की जा रही है, जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
इस मामले में आरोपी लिपिक राजीव भारतीय के मुताबिक वह विशेष ऑडिट संबंधित फाइल और ईओडब्ल्यू से संबंधित फाइल इससे पूर्व में परियोजना निदेशक को दे चुके हैं। फाइल को कई बार मांगा गया, लेकिन अभी तक फाइल उपलब्ध नहीं कराई गई, उन्हें तो बेवजह फंसाया जा रहा है। अन्य फाइलों में सांसद और विधायक निधि के करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य का लेखा-जोखा है। यदि वे फाइलें मिलें और उनकी जांच की जाए, तो और भी कई अधिकारी-कर्मचारी इसके लपेटे में आ जाएंगे। अब रहस्यमय फाइलों के गायब होने के मामले में एफआईआर कब हो पाएगी? इसमें कौन कौन फंसेगा? यह बात भविष्य के गर्भ में छिपी हुई है। 

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बोले बाबू, दे चुके स्पष्टीकरण
डीआरडीए के जिन बाबुओं को आरोपी बनाया गया है, उन लोगों के मुताबिक जांचकर्ता सहायक अभियंता को वे अपना स्पष्टीकरण दे चुके हैं। आरोपी लिपिकों के मुताबिक फाइलें उन लोगों के यहां से गायब नहीं हुई हैं, बल्कि वे लोग तो फाइलें अधिकारियों को दे चुके हैं, उन लोगों ने फाइल वापस नहीं की हैं। 
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