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लगान के विरोध पर अंग्रेजों ने बरसा दी थीं गोलियां
अमर उजाला ब्यूरो,बदायूं
Updated Sat, 12 Aug 2017 06:23 PM IST
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स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मार्च 1921 और नवंबर 1929 में महात्मा गांधी के बदायूं दौरे के बाद 1942 में आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बदायूं का दौरा किया। उन्होंने यहां गुरुकुल महाविद्यालय में क्रांतिकारियों की सभा की थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ नारे से आजादी के दीवानों में खासे लोकप्रिय थे। नेताजी के दौरे के बाद स्वतंत्रता आंदोलन और गहरा गया। अब क्रांतिकारी अंग्रेजों की गोलियों से भी नहीं डरते थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बदायूं दौरे के बाद क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को लगान देने से इंकार कर दिया। 16 जनवरी 1942 के बदायूं की तहसील गुन्नौर के गांव जगन्नथपुर में (अब संभल की तहसील) में क्रांतिकारियों और अंग्रेज पुलिस में सामने-सामने संघर्ष हो गया। क्रांतिकारी इससे पहले अंग्रेजों को चुनौती देते हुए दिसंबर 1941 में क्रांतिकारी चौधरी बदन सिंह के नेतृत्व में बितरोई रेलवे स्टेशन फूंक चुके थे। कई जगह रेल पटरियों कोभी नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में अंग्रेज हुक्मरान बौखलाए हुए थे। लगान का विरोध करने पर अंग्रेज सिपाहियों ने क्रांतिकारियों पर गोलियां बरसा दीं। इसमें दो दर्जन क्रांतिकारी घायल हुए और क्रांतिकारी कृष्णलाल शहीद हो गए थे। जगन्नाथपुर कांड के बाद क्रांतिकारियों और अंग्रेज पुलिस में जगह-जगह झड़पें होने लगीं। इनमें कई क्रांतिकारी शहीद हुए तो अंग्रेज सिपाही भी मारे गए। स्वतंत्रता संग्राम इतिहास के जानकारों की माने तो 1942 के आंदोलन के बाद से ही अंग्रेजी हुकूमत के पैर उखड़ने लगे थे।
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