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अचानक चलीं पछवा हवा ने बिगाड़ा गेहूं का खेल
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2016 11:48 PM IST
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गेहूं
- फोटो : अमर उजाला
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गेहूं की पैदावार में 20 फीसदी तक की गिरावट
पिछले महीना बरसात के दौरान हवा चलने से गिरी थी फसल
प्रति बीघा साढ़े तीन क्विंटल से अधिक नहीं बढ़ पाई पैदावार
काश्तकारों के अनुरूप इस बार गेहूं का उत्पादन नहीं रहा। उत्पादन में औसतन 20 फीसदी तक की गिरावट के अनुमान के बीच हालात पर गौर करें तो बुआई के दौरान मौसम ने फसल का साथ दिया लेकिन फसल पकने की ओर बढ़ी तो मौसम ने किसानों का हलक सूखा दिया। बेमौसम बरसात के साथ तेज हवा चली तो फसल गिर गई। बाद में अचानक चल पड़ीं पछवा हवाओं ने तो खेल ही खराब कर दिया।
गेहूं की फसल को देख उत्पादकों को उम्मीद जागी थी कि इस बार पैदावार अच्छी होने पर पिछले साल आपदा के दौरान हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो जाएगी। पर गेहूं की कटाई के बाद गहाई शुरू होने पर पैदावार की असलियत सामने आते ही उत्पादकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। प्रति बीघा करीब साढ़े तीन क्विंटल की पैदावार से अधिक का रेश्यू नहीं आया पाया है। साढ़े तीन क्विंटल प्रति बीघा की पैदावार उन्हीं खेतों में हुई है जिनमें फसल अच्छी थी। पिछेती गेहूं को पकने में हालांकि अभी सप्ताह भर से ज्यादा का वक्त लगेगा लेकिन उसकी पैदावार तीन क्विंटल प्रति बीघा से भी कम रहने की आशंका बनी हुई है।
उत्पादन में गिरावट की वजह पर गौर करें तो जिन दिनों गेहूं पकने की ओर था, उसी दौरान पछवा हवाएं चल पड़ी थीं। पछवा हवा चलने के दौरान काश्तकार अमूमन सिचाई पर ध्यान नहीं देते। यह इसलिए भी कि सिचाई के दौरान या फिर एक-दो दिन के अंदर अगर हवा चलती है तो फसल गिर पड़ती है। सिचाई न करो तो पछवा हवा खेत की नमी को तेजी से कम करती है। ऐसे में दाना उम्मीद के अनुरूप मोटा नहीं हो पाता। इसके विपरीत पिछेती की पैदावार से तो किसानों को लागात लौटने के लाले भी पड़ सकते हैं।
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सारा काम-धंधा छोड़ कटाई में जुटे काश्तकार
उझानी। गेहूं की फसल की अब तक 20-30 फीसदी तक ही कटाई हो पाई है। तकरीबन 70 फीसदी तक खेतों मं खड़ी फसल की कटाई के लिए किसानों ने नाते-रिश्तेदारियों ही नहीं बल्कि घरेलू काम-धंधे छोड़ दिए हैं। कुछ किसान तो रात में भी गेहूं की कटाई के लिए खेतों की ओर निकल पड़ते हैं। किसानों का कहना है कि मौसम भी आंखों तरेर रहा है। ऐसे में अगर देर कर दी तो नुकसान उठाना पड़ेगा।
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गेहूं की गहाई शुरू हो चुकी है। अब तक जिन किसानों ने भी केवीके से संपर्क साधा है, उससे लगता है कि उत्पादन उम्मीद के अनुरूप नहीं आया है। पछवा हवाओं ने ही गेहूं को प्रभावित किया था। नमी की कमी के चलते दाने की ग्रोथ प्रभावित हुई है।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।
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पिछले महीना बरसात के दौरान हवा चलने से गिरी थी फसल
प्रति बीघा साढ़े तीन क्विंटल से अधिक नहीं बढ़ पाई पैदावार
काश्तकारों के अनुरूप इस बार गेहूं का उत्पादन नहीं रहा। उत्पादन में औसतन 20 फीसदी तक की गिरावट के अनुमान के बीच हालात पर गौर करें तो बुआई के दौरान मौसम ने फसल का साथ दिया लेकिन फसल पकने की ओर बढ़ी तो मौसम ने किसानों का हलक सूखा दिया। बेमौसम बरसात के साथ तेज हवा चली तो फसल गिर गई। बाद में अचानक चल पड़ीं पछवा हवाओं ने तो खेल ही खराब कर दिया।
गेहूं की फसल को देख उत्पादकों को उम्मीद जागी थी कि इस बार पैदावार अच्छी होने पर पिछले साल आपदा के दौरान हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो जाएगी। पर गेहूं की कटाई के बाद गहाई शुरू होने पर पैदावार की असलियत सामने आते ही उत्पादकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। प्रति बीघा करीब साढ़े तीन क्विंटल की पैदावार से अधिक का रेश्यू नहीं आया पाया है। साढ़े तीन क्विंटल प्रति बीघा की पैदावार उन्हीं खेतों में हुई है जिनमें फसल अच्छी थी। पिछेती गेहूं को पकने में हालांकि अभी सप्ताह भर से ज्यादा का वक्त लगेगा लेकिन उसकी पैदावार तीन क्विंटल प्रति बीघा से भी कम रहने की आशंका बनी हुई है।
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उत्पादन में गिरावट की वजह पर गौर करें तो जिन दिनों गेहूं पकने की ओर था, उसी दौरान पछवा हवाएं चल पड़ी थीं। पछवा हवा चलने के दौरान काश्तकार अमूमन सिचाई पर ध्यान नहीं देते। यह इसलिए भी कि सिचाई के दौरान या फिर एक-दो दिन के अंदर अगर हवा चलती है तो फसल गिर पड़ती है। सिचाई न करो तो पछवा हवा खेत की नमी को तेजी से कम करती है। ऐसे में दाना उम्मीद के अनुरूप मोटा नहीं हो पाता। इसके विपरीत पिछेती की पैदावार से तो किसानों को लागात लौटने के लाले भी पड़ सकते हैं।
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सारा काम-धंधा छोड़ कटाई में जुटे काश्तकार
उझानी। गेहूं की फसल की अब तक 20-30 फीसदी तक ही कटाई हो पाई है। तकरीबन 70 फीसदी तक खेतों मं खड़ी फसल की कटाई के लिए किसानों ने नाते-रिश्तेदारियों ही नहीं बल्कि घरेलू काम-धंधे छोड़ दिए हैं। कुछ किसान तो रात में भी गेहूं की कटाई के लिए खेतों की ओर निकल पड़ते हैं। किसानों का कहना है कि मौसम भी आंखों तरेर रहा है। ऐसे में अगर देर कर दी तो नुकसान उठाना पड़ेगा।
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गेहूं की गहाई शुरू हो चुकी है। अब तक जिन किसानों ने भी केवीके से संपर्क साधा है, उससे लगता है कि उत्पादन उम्मीद के अनुरूप नहीं आया है। पछवा हवाओं ने ही गेहूं को प्रभावित किया था। नमी की कमी के चलते दाने की ग्रोथ प्रभावित हुई है।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।