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‘...उठे भी न थे हाथ कि भर गया दामन’
अमर उजाला ब्यूरो/ उझानी
Updated Fri, 19 May 2017 11:46 PM IST
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कव्वाली।
- फोटो : अमर उजाला
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सैय्यद भूड़ वाले बाबा के उर्स में जुटे अकीदतमंद
बिजनौर और लखनऊ के कव्वालों ने बिखेरा जलवा
हजरत सैय्यद भूड़ वाले बाबा रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिवसीय सालाना उर्स अकीदत के साथ मनाया गया। हजारों की तादाद में जुटे अकीदतमंदों ने बाबा की मजार पर चादरपोशी कर मन्नत मांगी। मुल्क और कौम की सलामती की दुआ की गई। उर्स के अंतिम दिन कुल की रस्म अदायगी से पहले लखनऊ और बिजनौर के कव्वालों ने कलाम पेश किए।
बरेली-मथुरा हाईवे से सटे सैय्यद भूड़ वाले बाबा की मजार पर उर्स की शुरुआत तीन दिन पहले हुई। पहले दिन महफिल-ए- मीलाद में उलेमा ने कलाम पेश किए। दूसरे दिन शाम को कव्वाली का मुकाबला शुरू हुआ तो अकीदतमंद झूम उठे। कव्वालों में लखनऊ के ईशान साबरी और बरेली जिले में आंवला के गुड्डू ताज के बीच मुकाबला जोरदार रहा। गुड्डू ताज ने फरमाया- ‘अभी उठे भी न थे हाथ कि भर गया दामन’ और ‘तू बेमिसाल है कि कोई मिसाल नहीं’। ईशान साबरी ने सुनाया- ‘गरीबी मोहम्मद के घर में पली है, मेरे घर का सामान क्या देखता है’।
उर्स के दौरान एक और मुकाबले में नागपुर के कव्वाल शाहरुख मुराद ने ख्वाजा गरीब नवाज की शान में कसीदे पढे़। कव्वाल फरमान वारसी ने सुनाया- ‘भर दो झोली मेरी या मोहम्मद’ और फिल्मी गीत ‘मेरे रशक-ए-कमर, तूने पहली नजर’ को कव्वाली के अंदाज में पेश किया। मजार के सज्जादानशीन पप्पू मियां अल्वी ने मोहम्मद शेर अल्वी की सरपस्ती में कुल की रस्म अदायगी की। बाद में तबर्रुक तकसीम हुआ। चादरपोशी भी की गई। इस मौके पर मोहम्मद शेर अल्वी, जमील अहमद, गुड्डू अंसारी, मुनव्वर हुसैन, शकील अहमद अल्वी, शान मोहम्मद, आबिद हुसैन, जावेद हुसैन, शाकूव अल्वी और जान मोहम्मद आदि मौजूद थे। निजामत मोहम्मद असलम शेख ने की।
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बिजनौर और लखनऊ के कव्वालों ने बिखेरा जलवा
हजरत सैय्यद भूड़ वाले बाबा रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिवसीय सालाना उर्स अकीदत के साथ मनाया गया। हजारों की तादाद में जुटे अकीदतमंदों ने बाबा की मजार पर चादरपोशी कर मन्नत मांगी। मुल्क और कौम की सलामती की दुआ की गई। उर्स के अंतिम दिन कुल की रस्म अदायगी से पहले लखनऊ और बिजनौर के कव्वालों ने कलाम पेश किए।
बरेली-मथुरा हाईवे से सटे सैय्यद भूड़ वाले बाबा की मजार पर उर्स की शुरुआत तीन दिन पहले हुई। पहले दिन महफिल-ए- मीलाद में उलेमा ने कलाम पेश किए। दूसरे दिन शाम को कव्वाली का मुकाबला शुरू हुआ तो अकीदतमंद झूम उठे। कव्वालों में लखनऊ के ईशान साबरी और बरेली जिले में आंवला के गुड्डू ताज के बीच मुकाबला जोरदार रहा। गुड्डू ताज ने फरमाया- ‘अभी उठे भी न थे हाथ कि भर गया दामन’ और ‘तू बेमिसाल है कि कोई मिसाल नहीं’। ईशान साबरी ने सुनाया- ‘गरीबी मोहम्मद के घर में पली है, मेरे घर का सामान क्या देखता है’।
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उर्स के दौरान एक और मुकाबले में नागपुर के कव्वाल शाहरुख मुराद ने ख्वाजा गरीब नवाज की शान में कसीदे पढे़। कव्वाल फरमान वारसी ने सुनाया- ‘भर दो झोली मेरी या मोहम्मद’ और फिल्मी गीत ‘मेरे रशक-ए-कमर, तूने पहली नजर’ को कव्वाली के अंदाज में पेश किया। मजार के सज्जादानशीन पप्पू मियां अल्वी ने मोहम्मद शेर अल्वी की सरपस्ती में कुल की रस्म अदायगी की। बाद में तबर्रुक तकसीम हुआ। चादरपोशी भी की गई। इस मौके पर मोहम्मद शेर अल्वी, जमील अहमद, गुड्डू अंसारी, मुनव्वर हुसैन, शकील अहमद अल्वी, शान मोहम्मद, आबिद हुसैन, जावेद हुसैन, शाकूव अल्वी और जान मोहम्मद आदि मौजूद थे। निजामत मोहम्मद असलम शेख ने की।
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