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नलकूपों को अलग से मिलेगी बिजली, सर्वे शुरू

Sun, 29 Mar 2015 07:31 PM IST
badaun
badaun Updated Sun, 29 Mar 2015 07:31 PM IST
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नलकूपों को उन्हीं बिजली लाइनों पर चलाए जाने से हो रहे नुकसान को लेकर शासन की चिंता जग जाहिर हो गई है। इस समस्या से निजात पाने के लिए शासन की ओर से मेधा टेक्रो कांसेप्ट प्राइवेट लिमिटेड को सर्वे का काम सौंपा गया है। इसके लिए 18 सर्वेयर जिले में सर्वे कर रहे हैं। यह अपनी रिपोर्ट तीन महीने में पूरी कर कंपनी के माध्यम से शासन को सौंपेंगे। इसके बाद से नलकूपों को अलग से बिजली दिए जाने का काम शुरू हो जाएगा।

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जिले में सिंचाई व्यवस्था को सबसे बड़े साधन के रूप में नलकूप ही हैं। वैसे तो जिले में करीब 80 हजार नलकूप हैं लेकिन इनमें सरकारी बिजली चालित नलकूपों की संख्या 1209 और इससे तीन गुनी अधिक प्राइवेट बिजली चालित नलकूपों की संख्या है। अबतक बिजली सब स्टेशनों से बिजली की सप्लाई गांव और नलकूपों को एक ही लाइन से दी जा रही है। इससे वोल्टेज को लेकर बड़ी समस्या रहती है। इसकी वजह से नलकूप भी नहीं चल पाते और गांव-देहात को बिजली की कम वोल्टेज मिलती रही है। किसानों की इस समस्या की जानकारी शासन तक पहुंच चुकी है। इसी परिपेक्ष्य में शासन नलकूपों को बाकी बिजली लाइनों से प्रथक करने के प्रयास में हैं। इससे नलकूपों का संचालन भी ठीक होगा और गांवों को भी सही वोल्टेज की बिजली मिलेगी।
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सम्मिलित लाइन पर नलकूपों को नुकसान
सम्मिलित बिजली लाइन पर नलकूप को नुकसान ने के बारे में नलकूप खंड प्रथम के एक्सईएन गिरीश कुमार ने बताया। कम वोल्टेज के कारण नलकूपों के मोटर फुंकने की शिकायतें बढ़ी हैं। यह अनियंत्रित और कम वोल्टेज के कारण होता है। जो सरकारी नलकू पों को नुकसान होता है, वहीं निजी नलकूपों को भी होता होगा।
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गर्मियों में घरेलू बिजली बनती है समस्या
गर्मियों में जब बिजली की मांग बढ़ती है और नलकूप भी चलते हैं तो लाइनों पर अधिक लोड होता है। ऐसे में घरेलू बिजली कम वोल्टेज और हीटेड लाइनों के कारण बंद करनी होती है। नलकूपों को भी बंद करके चलाना पड़ता है। इन दिनों में जब गांवों को सही बिजली नहीं मिलती और अधिक लोड पर ट्रांसफार्मर फुकते हैं तो आंदोलन भी होते हैं। इससे स्थितियां और बिगड़ती हैं।

सर्वे में 31 सब स्टेशनों से की जा रही शुरूआत
मेधा की सर्वे टीम का यहां भ्रमर सिंह नेतृत्व कर रहे हैं। एक सर्वेयर ने बताया सभी सब स्टेशन से लाइन टू लाइन सर्वे किया जा रहा है। सर्वे में बिजली लाइन पर पड़ने वाले नलकूपों की भी जानकारी एकत्र की जा रही है। रिपोर्ट तीन महीने में पूरी कर लेनी है। इसके बाद शासन को कंपनी की ओर से सर्वे की रिपोर्ट पेश की जाएगी।


ग्रामीण क्षेत्र के फीडर अलग किए जाने की योजना है। सर्वे के आधार पर भविष्य में और क्या योजना बनती है यह शासन स्तर का विषय है। कोई सर्वे हो रहा है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
- अनूप चंद्रा, अधीक्षण अभियंता

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