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39 से 40...और अब पारा 42 डिग्री के पार पहुंचने के आसार
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गर्मी भगाने के लिए गन्ने का रस पीते युवक। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। इस बार मध्य मार्च में ही गर्मी का प्रकोप बढ़ने लगा है। जिले में रविवार को अधिकतम तापमान 40 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वातावरण में नमी कम होने से तापमान लगातार बढ़ रहा है। इस बार मार्च में ही गर्मी पसीना छुड़ाने लगी है। आने वाले दिनों में तापमान और भी बढ़ेगा, पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मध्य मार्च में ही गर्म हवाओं का प्रकोप शुरू हो गया है। मौसम विशेषज्ञों, डॉक्टरों और कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह से बदलते मौसम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इस वर्ष जनवरी के अंतिम से फरवरी के दूसरे सप्ताह तक बारिश और शीतलहर का प्रकोप बना रहा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम का कहना है कि फरवरी का दूसरा सप्ताह समाप्त होने के साथ ही मौसम पूरी तरह से खुल गया। लगातार धूप खिलने से वातावरण में नमी खत्म होने लगी। अब मार्च के पहले सप्ताह से ही तापमान में इजाफा हो रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण केंद्र मुरादाबाद से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो रविवार को बदायूं में अधिकतम तापमान 40 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस के आस-पास दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक 182 के आस-पास रहा। यह मध्यम श्रेणी का माना जाता है।
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अचानक से तापमान में इजाफा होने से बाजारों में शीतल पेयों की बिक्री बढ़ गई है। दोपहर में तेज धूप के कारण लोग जरूरी होने पर ही घरों से निकल रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के चलते गर्मी के सीजन की अवधि और तापमान हर वर्ष बढ़ता जा रहा है।
शुक्रवार से ही तापमान में तेजी से इजाफा शुरू हुआ है। तीन दिन में तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि अपने आप में रिकार्ड है। शनिवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री था तो रविवार को बढ़ कर 40 डिग्री तक पहुुंच गया। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम का कहना है कि वातावरण में नमी कम होने से सोमवार से शुरू होने वाले सप्ताह में तापमान 42 डिग्री तक पहुंच सकता है।
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मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, 20 दिन में मलेरिया की 43 रोगी मिले
तापमान में इजाफा होने के साथ मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। मलेरिया और डेंगू के लिहाज से हाई रिस्क श्रेणी में शामिल बदायूं में अभी से मलेरिया के रोगी मिलने लगे हैं। मार्च में मलेरिया के 43 रोगी मिले हैं। इनमें चार लोगों को फैल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि भी हुई है। फॉगिंग न होने से स्थिति आने वाले दिनों में ज्यादा खराब हो सकती है। सालारपुर, समरेर, म्याऊ, दातागंज, उझानी, जगत और उसावां ब्लॉक में मलेरिया के सबसे ज्यादा रोगी मिल रहे हैं। मलेरिया विभाग की ओर से डीडीटी का छिड़काव चालू कराया गया है, लेकिन यह नाकाफी है।
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मौसम वैज्ञानिक की बात
ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में इजाफा हो रहा है। इसका एक प्रमुख कारण प्रदूषण भी है। इस वर्ष जनवरी और फरवरी में कई दिन बारिश होती रही। अमूमन यह बारिश मार्च के पहले सप्ताह के आसपास होनी थी। आधी फरवरी बीतने के बाद अब तक एक बार भी बारिश नहीं हुई है। इस कारण वातावरण में नमी कम हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ही तापमान और गर्मी के सीजन का समय बढ़ रहा है। अगले चार-पांच तापमान में गिरावट के आसार नहीं हैं।
- डॉ. आलोक सागर गौतम, मौसम वैज्ञानिक
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डॉक्टर की बात
बदलते मौसम में बीमारियां भी बढ़ेंगी। अचानक मौसम में आए बदलाव की ही वजह है कि जिला अस्पताल में रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इस मौसम में साफ-सफाई के साथ खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। सबसे ज्यादा पेयजल की शुद्धता पर ध्यान देने की जरूरत है। अमूमन मार्च के महीने में अधिकतम तापमान 40 डिग्री के आस-पास नहीं पहुंचता है। ऐसे मौसम में सावधानी के साथ साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
-डॉ. राजेश वर्मा, फिजीशियन
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गेहूं का दाना सिकुड़ेगा, पैदावार पर पड़ेगा असर
उझानी। होलिका दहन से पहले ही तापमान में वृद्धि ने गेहूं की फसल को चपेट में लेना शुरू कर दिया है। इसके चलते किसान भी उलझन में पड़ गए हैं। तापमान बढ़ने पर खेत में नमी के लिए सिंचाई करें तो तेज हवा के झोंके के साथ गेहूं धराशाई होने लगता है। सिंचाई नहीं करने की स्थिति में तेज धूप पौधों को झुलसाने लग जाती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि रविवार काफी गर्म रहा। पिछले साल के मुकाबले इस बार गर्मी ने अभी से जोर पकड़ लिया है। इसका सीधा असर गेहूं की पैदावार पर पड़ने की आशंका बनी हुई है। तापमान में वृद्धि से गेहूं का दाना परिपक्व होने से पहले ही सिकुड़ने लगेगा। अन्य फसलों में सरसों काफी हद तक पक चुकी है। उसे कोई नुकसान नहीं है। साथ ही किसानों ने सरसों की फसल से खाली खेतों में अगेती मक्का के गुलाई शुरू कर दी है। कुछेक स्थानों पर मक्का बढ़वार की ओर भी है। संवाद
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इस वर्ष जनवरी के अंतिम से फरवरी के दूसरे सप्ताह तक बारिश और शीतलहर का प्रकोप बना रहा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम का कहना है कि फरवरी का दूसरा सप्ताह समाप्त होने के साथ ही मौसम पूरी तरह से खुल गया। लगातार धूप खिलने से वातावरण में नमी खत्म होने लगी। अब मार्च के पहले सप्ताह से ही तापमान में इजाफा हो रहा है।
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प्रदूषण नियंत्रण केंद्र मुरादाबाद से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो रविवार को बदायूं में अधिकतम तापमान 40 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस के आस-पास दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक 182 के आस-पास रहा। यह मध्यम श्रेणी का माना जाता है।
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अचानक से तापमान में इजाफा होने से बाजारों में शीतल पेयों की बिक्री बढ़ गई है। दोपहर में तेज धूप के कारण लोग जरूरी होने पर ही घरों से निकल रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के चलते गर्मी के सीजन की अवधि और तापमान हर वर्ष बढ़ता जा रहा है।
शुक्रवार से ही तापमान में तेजी से इजाफा शुरू हुआ है। तीन दिन में तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि अपने आप में रिकार्ड है। शनिवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री था तो रविवार को बढ़ कर 40 डिग्री तक पहुुंच गया। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम का कहना है कि वातावरण में नमी कम होने से सोमवार से शुरू होने वाले सप्ताह में तापमान 42 डिग्री तक पहुंच सकता है।
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मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, 20 दिन में मलेरिया की 43 रोगी मिले
तापमान में इजाफा होने के साथ मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। मलेरिया और डेंगू के लिहाज से हाई रिस्क श्रेणी में शामिल बदायूं में अभी से मलेरिया के रोगी मिलने लगे हैं। मार्च में मलेरिया के 43 रोगी मिले हैं। इनमें चार लोगों को फैल्सीपेरम मलेरिया की पुष्टि भी हुई है। फॉगिंग न होने से स्थिति आने वाले दिनों में ज्यादा खराब हो सकती है। सालारपुर, समरेर, म्याऊ, दातागंज, उझानी, जगत और उसावां ब्लॉक में मलेरिया के सबसे ज्यादा रोगी मिल रहे हैं। मलेरिया विभाग की ओर से डीडीटी का छिड़काव चालू कराया गया है, लेकिन यह नाकाफी है।
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मौसम वैज्ञानिक की बात
ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में इजाफा हो रहा है। इसका एक प्रमुख कारण प्रदूषण भी है। इस वर्ष जनवरी और फरवरी में कई दिन बारिश होती रही। अमूमन यह बारिश मार्च के पहले सप्ताह के आसपास होनी थी। आधी फरवरी बीतने के बाद अब तक एक बार भी बारिश नहीं हुई है। इस कारण वातावरण में नमी कम हो गई है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ही तापमान और गर्मी के सीजन का समय बढ़ रहा है। अगले चार-पांच तापमान में गिरावट के आसार नहीं हैं।
- डॉ. आलोक सागर गौतम, मौसम वैज्ञानिक
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डॉक्टर की बात
बदलते मौसम में बीमारियां भी बढ़ेंगी। अचानक मौसम में आए बदलाव की ही वजह है कि जिला अस्पताल में रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इस मौसम में साफ-सफाई के साथ खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। सबसे ज्यादा पेयजल की शुद्धता पर ध्यान देने की जरूरत है। अमूमन मार्च के महीने में अधिकतम तापमान 40 डिग्री के आस-पास नहीं पहुंचता है। ऐसे मौसम में सावधानी के साथ साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
-डॉ. राजेश वर्मा, फिजीशियन
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गेहूं का दाना सिकुड़ेगा, पैदावार पर पड़ेगा असर
उझानी। होलिका दहन से पहले ही तापमान में वृद्धि ने गेहूं की फसल को चपेट में लेना शुरू कर दिया है। इसके चलते किसान भी उलझन में पड़ गए हैं। तापमान बढ़ने पर खेत में नमी के लिए सिंचाई करें तो तेज हवा के झोंके के साथ गेहूं धराशाई होने लगता है। सिंचाई नहीं करने की स्थिति में तेज धूप पौधों को झुलसाने लग जाती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि रविवार काफी गर्म रहा। पिछले साल के मुकाबले इस बार गर्मी ने अभी से जोर पकड़ लिया है। इसका सीधा असर गेहूं की पैदावार पर पड़ने की आशंका बनी हुई है। तापमान में वृद्धि से गेहूं का दाना परिपक्व होने से पहले ही सिकुड़ने लगेगा। अन्य फसलों में सरसों काफी हद तक पक चुकी है। उसे कोई नुकसान नहीं है। साथ ही किसानों ने सरसों की फसल से खाली खेतों में अगेती मक्का के गुलाई शुरू कर दी है। कुछेक स्थानों पर मक्का बढ़वार की ओर भी है। संवाद