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Budaun News: जंगल बचेंगे, तभी हम बचेंगे
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महिला महाविद्यालय में हुई पौधरोपण के महत्व पर हुई संगोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। राजकीय महिला महाविद्यालय में पौधरोपण के महत्व पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बीएससी द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा हफ्सा ने सुंदरलाल बहुगुणा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए जंगलों को बचाने के उपाय बताए। हिवा ने बताया कि एक जंगल के पूर्ण विकसित होने में लगभग 100 वर्षों का समय लगता है। किसी भी देश में वनों की अधिकता उस स्थान के स्वास्थ्य समृद्धि को दर्शाती है। वक्ताओं ने कहा कि जंगल बचेंगे, तभी हम भी बचेंगे।
इस मौके पर वैष्णवी गुप्ता ने जिले की बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता) पर चर्चा करते हुए बताया कि अपना जिला जैव विविधता का एक बड़ा पुष्प गुच्छ है। यहां अनेक प्रकार के जीव-जंतु निवास करते हैं। यहां की पर्यावरणीय दशाएं नीम, पीपल, चिलबिल, आम आदि बहुवर्षीय पौधों के लिए अनुकूल है, लेकिन ढाक के वृक्ष इस जिले में बहुत ही सीमित बचे हैं। मनुष्य यदि इसी प्रकार प्राकृतिक धरोहरों को नष्ट करता रहेगा तो भविष्य में उसका भी विनाश संभव है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. स्मिता जैन ने कहा कि जंगलों के विनाश से अनेक विपरीत परिस्थितियों को देखना पड़ा है। मनुष्य को प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा प्रबंधन करना चाहिए कि उसकी उनसे वर्तमान जरूरतें तो पूरी हो जाएं, लेकिन इन संसाधनों को भविष्य में आने वाली पीढि़यों के लिए भी सुरक्षित रखा जा सके। इस मौके पर पौधरोपण प्रभारी डॉ. संजीव श्रीवास, ऊमरा, फरीन, नूरी, नंदनी, सुमन आदि मौजूद रहे।
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बदायूं। राजकीय महिला महाविद्यालय में पौधरोपण के महत्व पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बीएससी द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा हफ्सा ने सुंदरलाल बहुगुणा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए जंगलों को बचाने के उपाय बताए। हिवा ने बताया कि एक जंगल के पूर्ण विकसित होने में लगभग 100 वर्षों का समय लगता है। किसी भी देश में वनों की अधिकता उस स्थान के स्वास्थ्य समृद्धि को दर्शाती है। वक्ताओं ने कहा कि जंगल बचेंगे, तभी हम भी बचेंगे।
इस मौके पर वैष्णवी गुप्ता ने जिले की बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता) पर चर्चा करते हुए बताया कि अपना जिला जैव विविधता का एक बड़ा पुष्प गुच्छ है। यहां अनेक प्रकार के जीव-जंतु निवास करते हैं। यहां की पर्यावरणीय दशाएं नीम, पीपल, चिलबिल, आम आदि बहुवर्षीय पौधों के लिए अनुकूल है, लेकिन ढाक के वृक्ष इस जिले में बहुत ही सीमित बचे हैं। मनुष्य यदि इसी प्रकार प्राकृतिक धरोहरों को नष्ट करता रहेगा तो भविष्य में उसका भी विनाश संभव है।
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महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. स्मिता जैन ने कहा कि जंगलों के विनाश से अनेक विपरीत परिस्थितियों को देखना पड़ा है। मनुष्य को प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा प्रबंधन करना चाहिए कि उसकी उनसे वर्तमान जरूरतें तो पूरी हो जाएं, लेकिन इन संसाधनों को भविष्य में आने वाली पीढि़यों के लिए भी सुरक्षित रखा जा सके। इस मौके पर पौधरोपण प्रभारी डॉ. संजीव श्रीवास, ऊमरा, फरीन, नूरी, नंदनी, सुमन आदि मौजूद रहे।
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