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कैसे हो काम, जब शासन से नहीं मिली धनराशि
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बदायूं। मौजूदा वित्तीय वर्ष खत्म होने के चंद माह ही बाकी रह गए हैं, लेकिन करीब एक दर्जन विभाग ऐसे हैं, जिनको शासन से इस वित्तीय वर्ष में एक धेला भी नहीं मिला है, जिस कारण होने वाले विकास कार्य रुके पड़ेहैं, जबकि जिला योजना की बैठक में इन सब विभागों को मंजूरी दी गई थी। जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग ने इन विभागों को बजट भेजने के लिए शासन को फाइल भी भेजी, लेकिन धनराशि अवमुक्त नहीं हो सकी है।
विगत 13 सितंबर को कलक्ट्रेट के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी की अध्यक्षता में जिला योजना की बैठक हुई थी। इसमें वर्ष 2019-20 के लिए शासन से 147298.50 लाख रुपये के बजट पर समिति सदस्यों ने मोहर लगाई थी। इसके बाद जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा शासन से बजट की मांग कर दी गई, जिसमें शासन ने 138980.96 लाख रुपये का बजट अवमुक्त कर दिया। जिले के करीब एक दर्जन विभाग ऐसे रहे जिनके 8317.54 लाख के प्रस्ताव को जिला योजना में शामिल कर अनुमोदन किया गया, लेकिन एक रुपया भी नहीं दिया, जिस कारण इन महत्वपूर्ण विभागों के कई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सके हैं। जबकि वित्तीय वर्ष खत्म होने में मात्र तीन माह का समय शेष बचा है।
-जिला पंचायती राज विभाग- 10 करोड़ 41 लाख 90 हजार रुपये
-राजकीय लघु सिचाईं विभाग-आठ करोड़ 39 लाख 22 हजार रुपये
-राजकीय नलकूप- पांच करोड़ चार लाख 83 हजार रुपये
-प्राथमिक शिक्षा में 36 करोड़ 75 लाख 56 हजार रुपये
-माध्यमिक शिक्षा 15 करोड़ 34 लाख 64 हजार रुपये
-उद्यान विभाग- दो लाख रुपये
-दुग्ध विकास विभाग-एक करोड़ 67 लाख 66 हजार रुपये
-सहकारिता विभाग- एक करोड़ 20 लाख रुपये
-युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग-छह लाख रुपये
-आयुर्वेदिक यूनानी चिकित्सा-52 लाख 18 लाख रुपये
-जिला सेवा योजन विभाग-एक लाख 29 हजार रुपये
------------
विभाग ने अपने-अपने प्रस्ताव बनाकर जिला योजना की बैठक में प्रस्तुत किए थे, जिन पर विचार विमर्श के उपरांत सहमति प्रदान करते हुए शासन को धनराशि मंजूर करने के लिए भेज दिया था। लेकिन कुछ विभाग ऐसे हैं, जिनको अभी शासन द्वारा धनराशि मुहैया नहीं हो सकी है।
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-प्रदीप कुमार, जिला सांख्यिकी अधिकारी
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विगत 13 सितंबर को कलक्ट्रेट के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी की अध्यक्षता में जिला योजना की बैठक हुई थी। इसमें वर्ष 2019-20 के लिए शासन से 147298.50 लाख रुपये के बजट पर समिति सदस्यों ने मोहर लगाई थी। इसके बाद जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा शासन से बजट की मांग कर दी गई, जिसमें शासन ने 138980.96 लाख रुपये का बजट अवमुक्त कर दिया। जिले के करीब एक दर्जन विभाग ऐसे रहे जिनके 8317.54 लाख के प्रस्ताव को जिला योजना में शामिल कर अनुमोदन किया गया, लेकिन एक रुपया भी नहीं दिया, जिस कारण इन महत्वपूर्ण विभागों के कई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सके हैं। जबकि वित्तीय वर्ष खत्म होने में मात्र तीन माह का समय शेष बचा है।
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-जिला पंचायती राज विभाग- 10 करोड़ 41 लाख 90 हजार रुपये
-राजकीय लघु सिचाईं विभाग-आठ करोड़ 39 लाख 22 हजार रुपये
-राजकीय नलकूप- पांच करोड़ चार लाख 83 हजार रुपये
-प्राथमिक शिक्षा में 36 करोड़ 75 लाख 56 हजार रुपये
-माध्यमिक शिक्षा 15 करोड़ 34 लाख 64 हजार रुपये
-उद्यान विभाग- दो लाख रुपये
-दुग्ध विकास विभाग-एक करोड़ 67 लाख 66 हजार रुपये
-सहकारिता विभाग- एक करोड़ 20 लाख रुपये
-युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग-छह लाख रुपये
-आयुर्वेदिक यूनानी चिकित्सा-52 लाख 18 लाख रुपये
-जिला सेवा योजन विभाग-एक लाख 29 हजार रुपये
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विभाग ने अपने-अपने प्रस्ताव बनाकर जिला योजना की बैठक में प्रस्तुत किए थे, जिन पर विचार विमर्श के उपरांत सहमति प्रदान करते हुए शासन को धनराशि मंजूर करने के लिए भेज दिया था। लेकिन कुछ विभाग ऐसे हैं, जिनको अभी शासन द्वारा धनराशि मुहैया नहीं हो सकी है।
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-प्रदीप कुमार, जिला सांख्यिकी अधिकारी