{"_id":"6857038e62d2eb689404dffc","slug":"ustad-poet-khalid-nadeem-is-no-more-he-was-undergoing-treatment-in-aligarh-badaun-news-c-123-1-sbly1018-141574-2025-06-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: उस्ताद शायर खालिद नदीम नहीं रहे, अलीगढ़ से चल रहा था इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: उस्ताद शायर खालिद नदीम नहीं रहे, अलीगढ़ से चल रहा था इलाज
विज्ञापन
खालिद नदीम का फाइल फोटो।
बदायूं। उर्दू अदब का एक सितारा हमेशा के लिए रुखसत हो गया। नामचीन शायर खालिद नदीम बदायूंनी का शनिवार को निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। उनका लंबे समय से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज से इलाज चल रहा था। उनकी पत्नी व एक बेटा हज यात्रा पर गए है, जबकि दो बेटे मुंबई में रहते हैं। दो बेटे बदायूं पहुंच गए और उनको छोटी ज्यारत के पास कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किया।
खालिद नदीम उन विरले शायरों में से थे, जिन्होंने शायरी को सिर्फ जज्बात की जुबान नहीं, समाज की आवाज बना दिया। उनकी रचनाओं में दर्द भी था, सोच भी, और एक खामोश मगर असरदार प्रतिरोध भी। उनकी कई शायरी चर्चा में रही। उन्होंने सैकड़ों मुशायरों, काव्य-गोष्ठियों और साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। उन्हें आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से भी देशभर में सुना गया। वे दिल्ली, रामपुर, लखनऊ, भोपाल, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के प्रतिष्ठित मंचों पर आमंत्रित किए जाते रहे।
--
साहित्य में अलग पहचान थी उनकी
शायर खालिद नदीम बदायूंनी के निधन पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि खालिद नदीम की शायरी साहित्य नहीं, बल्कि तहजीब, इंसानियत और अदबी जमीर की जिंदा दस्तावेज है। साहित्यकार अशोक खुराना ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य में एक पहचान बनाई थी। इस मौके पर सादिक अलापुरी, हमजा नूर ककरालवी, डॉ. दानिश बदायूंनी, डॉ. प्रमोद दर्पण, वासिफ पुसगवी, सुरेंद्र नाज, कासिम बिल्सी, सगीर, अय्यूब बदायूंनी, गाजी मियां सकलैनी, ताहिर सकलैनी आदि थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
खालिद नदीम उन विरले शायरों में से थे, जिन्होंने शायरी को सिर्फ जज्बात की जुबान नहीं, समाज की आवाज बना दिया। उनकी रचनाओं में दर्द भी था, सोच भी, और एक खामोश मगर असरदार प्रतिरोध भी। उनकी कई शायरी चर्चा में रही। उन्होंने सैकड़ों मुशायरों, काव्य-गोष्ठियों और साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। उन्हें आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से भी देशभर में सुना गया। वे दिल्ली, रामपुर, लखनऊ, भोपाल, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के प्रतिष्ठित मंचों पर आमंत्रित किए जाते रहे।
विज्ञापन
साहित्य में अलग पहचान थी उनकी
शायर खालिद नदीम बदायूंनी के निधन पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि खालिद नदीम की शायरी साहित्य नहीं, बल्कि तहजीब, इंसानियत और अदबी जमीर की जिंदा दस्तावेज है। साहित्यकार अशोक खुराना ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य में एक पहचान बनाई थी। इस मौके पर सादिक अलापुरी, हमजा नूर ककरालवी, डॉ. दानिश बदायूंनी, डॉ. प्रमोद दर्पण, वासिफ पुसगवी, सुरेंद्र नाज, कासिम बिल्सी, सगीर, अय्यूब बदायूंनी, गाजी मियां सकलैनी, ताहिर सकलैनी आदि थे।

खालिद नदीम का फाइल फोटो।
विज्ञापन