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Budaun News: मौत की सीढ़ी बन रहे बिना सुरक्षा वाले मेंथा प्लांट
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फैजगंज में स्थित मेंथा प्लांट। संवाद
- फोटो : 1
बदायूं। फैजगंज बेहटा क्षेत्र के सुरैनी पापड़ी गांव में शुक्रवार सुबह मेंथा टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आकर दो सगे भाइयों की मौत हो गई थी। तीसरे भाई की हालत में कुछ सुधार है। इस घटना ने जिले में संचालित मेंथा प्लांटों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद भी अधिकांश प्लांटों पर हालात जस के तस हैं। अब भी कई जगहों पर किसान व श्रमिक बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टैंकों में उतर रहे हैं। जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना है।
जिले में मेंथा की खेती और तेल उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। ग्रामीण इलाकों में करीब 500 छोटे-बड़े मेंथा प्लांट संचालित हैं, जहां सीजन के दौरान दिन-रात काम चलता है। सुरक्षा मानकों की बात करें तो अधिकांश प्लांटों पर अग्निशमन यंत्र, गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सिलिंडर, सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और आपातकालीन बचाव उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता। हालत यह हैं कि मई-जून में मेंथा का पेराई सत्र शुरू हो जाता है। एक साल से बंद पड़े टैंकों की सफाई का काम भी इन दिनों चल रहा है।
मेंथा टैंकों में पहले से एकत्र जहरीली गैसें सफाई करने वाले श्रमिकों को अपनी चपेट में ले लेती हैं। ऐसे में बिना गैस की जांच और पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था के टैंक में उतरना बेहद खतरनाक होता है। बावजूद इसके कई जगहों पर मजदूरों को सीधे टैंक में उतार दिया जाता है। हादसा होने पर बचाव के लिए भी कोई प्रशिक्षित टीम भी मौजूद नहीं रहती। यही वजह है कि एक को बचाने के प्रयास में कई बार अन्य लोग भी हादसे का शिकार हो जाते हैं। जैसे शुक्रवार को मेंथा कारोबारी बट्टू सिंह के परिवार के साथ हुआ।
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खर्च बढ़ने के कारण छोटे संचालक मानकों को कर देते हैं नजरअंदाज
मेंथा कारोबारी मुकेश का कहना है कि सुरक्षा उपकरणों और मानकों पर खर्च बढ़ने के कारण कई छोटे संचालक इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। फैजगंज बेहटा की घटना के बाद श्रमिकों और ग्रामीणों में दहशत है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने सभी मेंथा प्लांटों की व्यापक जांच कर सुरक्षा व्यवस्था नहीं की, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
-- -- -ये बरतें सावधानी-- -- -
- टैंक में उतरने से पहले गैस की जांच अनिवार्य रूप से कराएं।
- श्रमिकों को मास्क, सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और दस्ताने उपलब्ध कराएं।
- प्लांट पर अग्निशमन यंत्र और प्राथमिक उपचार किट रखें।
- टैंक की सफाई के दौरान बाहर निगरानी के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति तैनात करें।
- श्रमिकों को सुरक्षा मानकों और आपातकालीन बचाव का प्रशिक्षण दें।
- बंद टैंक में उतरने से पहले पर्याप्त वेंटिलेशन और ऑक्सीजन की व्यवस्था करें।
-- ऐसा न करें-- -
- बिना सुरक्षा उपकरण के किसी भी श्रमिक को टैंक में न उतारें।
- गैस जांच किए बिना सफाई कार्य शुरू न करें।
-हादसा होने पर बिना सुरक्षा इंतजाम के दूसरे व्यक्ति को बचाने के लिए टैंक में न भेजें।
-ज्वलनशील पदार्थों के पास धूम्रपान या आग का प्रयोग न करें।
-सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर प्लांट का संचालन न करें।
-मशीनों और उपकरणों की खराब स्थिति को नजरअंदाज न करें।
जहरीली गैस कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती है
जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. नितिन सिंह के अनुसार बंद टैंक, कुंड या मेंथा प्लांट के चैंबर में ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैसों का जमाव हो सकता है। ऐसे स्थानों में बिना जांच और सुरक्षा उपकरण के उतरना बेहद खतरनाक है। कई बार व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो जाता है और समय पर बाहर न निकाले जाने पर उसकी मौत भी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को टैंक के अंदर चक्कर आए, सांस लेने में दिक्कत हो, घुटन महसूस हो या वह बेहोश हो जाए तो बिना सुरक्षा उपकरण पहने उसे बचाने के लिए अंदर नहीं जाना चाहिए। पहले ऑक्सीजन और बचाव दल की व्यवस्था करनी चाहिए। अक्सर एक व्यक्ति को बचाने के प्रयास में कई लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं।
दो भाइयों को खोने के बाद तीसरे बेटे के लिए सलामती की दुआ
- सुरैनी पापड़ी हादसे के बाद परिवार की निगाहें आईसीयू में भर्ती मनवीर पर टिकीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फैजगंज बेहटा। सुरैनी पापड़ी गांव में मेंथा प्लांट हादसे में दो सगे भाइयों की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं गंभीर रूप से घायल तीसरे भाई मनवीर यादव का मुरादाबाद के ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत में हल्का सुधार हुआ है, हालांकि वह अब भी आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है।
शुक्रवार सुबह जहरीली गैस की चपेट में आने से जयवीर यादव और राजेश यादव की मौत हो गई थी, जबकि दोनों भाइयों को बचाने के प्रयास में टैंक में उतरे मनवीर की भी हालत खराब हो गई थी। वहीं शनिवार को दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पिता बट्टू सिंह यादव अस्पताल से आने वाली हर खबर का इंतजार कर रहे हैं, जबकि मां की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। गांव के लोग और रिश्तेदार लगातार मनवीर के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। पूरे गांव में अब भी शोक का माहौल बना हुआ है।
परिजनों के लिए आर्थिक मदद मांगी
बदायूं। बिसौली के सुरैनी पापड़ी गांव में मेंथा टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से दो भाइयों जयवीर यादव और राजेश यादव की मौत हो गई। उनका तीसरा भाई मनवीर यादव अस्पताल में भर्ती है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजीत यादव ने शनिवार को मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने एसडीएम बिसौली से फोन पर बात कर परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। संवाद
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जिले में मेंथा की खेती और तेल उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। ग्रामीण इलाकों में करीब 500 छोटे-बड़े मेंथा प्लांट संचालित हैं, जहां सीजन के दौरान दिन-रात काम चलता है। सुरक्षा मानकों की बात करें तो अधिकांश प्लांटों पर अग्निशमन यंत्र, गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सिलिंडर, सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और आपातकालीन बचाव उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता। हालत यह हैं कि मई-जून में मेंथा का पेराई सत्र शुरू हो जाता है। एक साल से बंद पड़े टैंकों की सफाई का काम भी इन दिनों चल रहा है।
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मेंथा टैंकों में पहले से एकत्र जहरीली गैसें सफाई करने वाले श्रमिकों को अपनी चपेट में ले लेती हैं। ऐसे में बिना गैस की जांच और पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था के टैंक में उतरना बेहद खतरनाक होता है। बावजूद इसके कई जगहों पर मजदूरों को सीधे टैंक में उतार दिया जाता है। हादसा होने पर बचाव के लिए भी कोई प्रशिक्षित टीम भी मौजूद नहीं रहती। यही वजह है कि एक को बचाने के प्रयास में कई बार अन्य लोग भी हादसे का शिकार हो जाते हैं। जैसे शुक्रवार को मेंथा कारोबारी बट्टू सिंह के परिवार के साथ हुआ।
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खर्च बढ़ने के कारण छोटे संचालक मानकों को कर देते हैं नजरअंदाज
मेंथा कारोबारी मुकेश का कहना है कि सुरक्षा उपकरणों और मानकों पर खर्च बढ़ने के कारण कई छोटे संचालक इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा मजदूरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। फैजगंज बेहटा की घटना के बाद श्रमिकों और ग्रामीणों में दहशत है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने सभी मेंथा प्लांटों की व्यापक जांच कर सुरक्षा व्यवस्था नहीं की, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
- टैंक में उतरने से पहले गैस की जांच अनिवार्य रूप से कराएं।
- श्रमिकों को मास्क, सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट और दस्ताने उपलब्ध कराएं।
- प्लांट पर अग्निशमन यंत्र और प्राथमिक उपचार किट रखें।
- टैंक की सफाई के दौरान बाहर निगरानी के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति तैनात करें।
- श्रमिकों को सुरक्षा मानकों और आपातकालीन बचाव का प्रशिक्षण दें।
- बंद टैंक में उतरने से पहले पर्याप्त वेंटिलेशन और ऑक्सीजन की व्यवस्था करें।
- बिना सुरक्षा उपकरण के किसी भी श्रमिक को टैंक में न उतारें।
- गैस जांच किए बिना सफाई कार्य शुरू न करें।
-हादसा होने पर बिना सुरक्षा इंतजाम के दूसरे व्यक्ति को बचाने के लिए टैंक में न भेजें।
-ज्वलनशील पदार्थों के पास धूम्रपान या आग का प्रयोग न करें।
-सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर प्लांट का संचालन न करें।
-मशीनों और उपकरणों की खराब स्थिति को नजरअंदाज न करें।
जहरीली गैस कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती है
जिला अस्पताल के ईएमओ डॉ. नितिन सिंह के अनुसार बंद टैंक, कुंड या मेंथा प्लांट के चैंबर में ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैसों का जमाव हो सकता है। ऐसे स्थानों में बिना जांच और सुरक्षा उपकरण के उतरना बेहद खतरनाक है। कई बार व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो जाता है और समय पर बाहर न निकाले जाने पर उसकी मौत भी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को टैंक के अंदर चक्कर आए, सांस लेने में दिक्कत हो, घुटन महसूस हो या वह बेहोश हो जाए तो बिना सुरक्षा उपकरण पहने उसे बचाने के लिए अंदर नहीं जाना चाहिए। पहले ऑक्सीजन और बचाव दल की व्यवस्था करनी चाहिए। अक्सर एक व्यक्ति को बचाने के प्रयास में कई लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं।
दो भाइयों को खोने के बाद तीसरे बेटे के लिए सलामती की दुआ
- सुरैनी पापड़ी हादसे के बाद परिवार की निगाहें आईसीयू में भर्ती मनवीर पर टिकीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फैजगंज बेहटा। सुरैनी पापड़ी गांव में मेंथा प्लांट हादसे में दो सगे भाइयों की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं गंभीर रूप से घायल तीसरे भाई मनवीर यादव का मुरादाबाद के ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत में हल्का सुधार हुआ है, हालांकि वह अब भी आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है।
शुक्रवार सुबह जहरीली गैस की चपेट में आने से जयवीर यादव और राजेश यादव की मौत हो गई थी, जबकि दोनों भाइयों को बचाने के प्रयास में टैंक में उतरे मनवीर की भी हालत खराब हो गई थी। वहीं शनिवार को दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पिता बट्टू सिंह यादव अस्पताल से आने वाली हर खबर का इंतजार कर रहे हैं, जबकि मां की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। गांव के लोग और रिश्तेदार लगातार मनवीर के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। पूरे गांव में अब भी शोक का माहौल बना हुआ है।
परिजनों के लिए आर्थिक मदद मांगी
बदायूं। बिसौली के सुरैनी पापड़ी गांव में मेंथा टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से दो भाइयों जयवीर यादव और राजेश यादव की मौत हो गई। उनका तीसरा भाई मनवीर यादव अस्पताल में भर्ती है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजीत यादव ने शनिवार को मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने एसडीएम बिसौली से फोन पर बात कर परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। संवाद

फैजगंज में स्थित मेंथा प्लांट। संवाद- फोटो : 1