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आर्गेनिक खेती में नाम के साथ मुनाफा भी कमा रहीं सोनिया

Mon, 20 Jun 2022 01:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jun 2022 01:15 AM IST
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Umeed ki Mashal
खेत में फसल देखतीं सोनिया दीक्षित। संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। अगर आप में कुछ करने का जुनून है तो इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं। प्रयास छोटा ही सही लेकिन लगातार होना चाहिए। खेती-किसानी मेहनत और संघर्ष का काम है। महिलाओं के लिए तो यह और भी चुनौती भरा काम है। लेकिन सिविल लाइंस की सोनिया दीक्षित ऑर्गेनिक फार्मिंग करके किसानों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। कम लागत में अधिक मुनाफे के साथ नाम भी कमा रहीं हैं। आठ बीघा खेत में कई-कई फसलों का उत्पादन कर रही हैं।
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रासायनिक, कीटनाशकों और उर्वरकों के ज्यादा इस्तेमाल से भूमि के साथ मानव स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहा है। यह बात सिविल लाइंस की रहने वाली सोनिया दीक्षित ने समझी। एमए के बाद बीएड और फिर पीजीटी किया। पिता चाहते थे कि बेटी सरकारी सेवा में जाए, लेकिन सोनिया का रुझान खेती-किसानी की ओर था। वह उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में सेवा देना शुरू करने के साथ खेती-किसानी में भी हाथ आजमाने लगीं। शिक्षिका के रूप में निजी स्कूल में सेवाएं देने के साथ उन्होंने आर्गेनिक खेती शुरू की। हरी मिर्च, शिमला मिर्च, केला, मौसमी सब्जियों पर फोकस रखा। पिता ओपी पांडेय वन विभाग के रिटायर्ड अधिकारी हैं तो उनका भी सहयोग मिला। इन दिनों उनके दो बीघा खेत में केले की फसल लगभग तैयार है। मिर्च, शिमला मिर्च और सरसों में उनको अच्छा मुनाफा मिल चुका है। इसके साथ ही वह जैविक खादों का इस्तेमाल कर मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन कर रही हैं। बेटे पलास दीक्षित एमबीए करने के बाद एक कंपनी में सेवाएं दे रहे हैं और बेटी की वह शादी कर चुकी हैं।
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सोनिया दीक्षित का अब पूरा फोकस खेती-किसानी पर है। आठ बीघा के फार्म में वह एक वर्ष में कई-कई फसलें ले कर मुनाफा कमाने के साथ किसानों को प्रेरणा भी दे रहीं हैं। (संवाद)
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सोनिया ने गिनाए आर्गेनिक खेती के लाभ
सोनिया दीक्षित का कहना है कि कृषि में बढ़ रहे उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से मानव के साथ ही मृदा की सेहत को भी खराब होती है। इतना ही नहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। अधिक रसायनों के इस्तेमाल से भूमि में जीवांश कार्बन की कमी भी आ रही है, इससे कृषि उत्पादों में गुणवत्ता खराब होने के साथ उत्पादन भी गिर रहा है। आर्गेनिक और जैविक खेती करके न सिर्फ उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है बल्कि मुनाफा कमाने के साथ भूमि और मानव स्वास्थ्य के लिए भी कुछ अच्छा किया जा सकता है। बाजार में जैविक उत्पादों के बढ़िया रेट होने से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है।

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कृषि वैज्ञानिक की बात
कृषि विज्ञान केंद्र उझानी के वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार का कहना है जैविक या आर्गेनिक खेती पर्यावरण के अनुकूल है। इसमें उर्वरकों और रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता है। किसान मृदा में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए कम्पोस्ट खाद, गोबर की खाद, हरी खाद और वर्मी कम्पोस्ट खाद का प्रयोग करते हैं। कीटनाशक के तौर पर नीम के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा किसान खेत में पडे़ फसल अवशेषों का अपघटित करने के लिए पूसा डी-कंपोजर का भी इस्तेमाल करते हैं। इससे मित्र कीट को नुकसान नहीं पहुंचता और मृदा की सेहत भी ठीक रहती है।
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