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Ukraine Crisis : बदायूं के कुछ विद्यार्थी रोमानिया पहुंचे, कई यूक्रेन में कर रहे मदद का इंतजार

Mon, 28 Feb 2022 02:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 28 Feb 2022 02:20 AM IST
सार

जिला प्रशासन ने जुटाई दस छात्र-छात्राओं की जानकारी। नोएडा-गाजियाबाद के अफसरों से संपर्क में बदायूं के लोग।

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Ukraine Crisis : Some students from Budaun reached Romania
यूक्रेन के रोमानिया बॉर्डर पर साथियों के साथ फंसे भारतीय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जिले के करीब दस मेडिकल छात्र यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। इनके परिवारों से संपर्क कर जिला प्रशासन ने दस छात्रों का डाटा जुटाकर भारत सरकार व दूतावास को भेज दिया है। इनमें से कुछ छात्र छात्राएं निजी प्रयास से व दूतावास से मिली जानकारी के सहारे रोमानिया में घुस गए हैं तो बाकी यूक्रेन में ही हैं। 

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जिला प्रशासन के पास रविवार शाम तक दस छात्रों की सूचना आ गई थी। इनमें आठ छात्र और दो छात्राएं शामिल थे जो यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। यह सभी वहां फंसे हुए थे। इनके परिवारों से संपर्क कर जिला प्रशासन केंद्र सरकार तक इनका डाटा पहुंचा रहा है। सीडीओ बदायूं ऋषिराज इस मामले में गाजियाबाद व नोएडा प्रशासन के संपर्क में है जहां प्रदेश भर के छात्र-छात्राओं का डाटा जुटाकर केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है। 
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फिलहाल जिन लोगों के नाम अफसरों के पास हैं उनमें सहसवान निवासी शादाब, बगरैन के आकाश गुप्ता, बदायूं के अयाज अंसारी, मोहिता सैफ, आनंद यादव, बिसौली क्षेत्र के गांव सीकरी निवासी अयाज अंसारी, बिल्सी की प्रतीक्षा मिश्रा के साथ ही इस्लामनगर के इमरान, ओसामा व तौहीद के नाम शामिल हैं। अमर उजाला टीम ने बात की तो पता लगा कि शादाब, अयाज अंसारी व मोहिता सैफ दूतावास से मिली जानकारी के बाद निजी तौर पर बसों व अन्य वाहनों से रोमानिया में पहुंच गए हैं। इनमें से अयाज तो रोमानिया एयरपोर्ट भी पहुंच गया है।  
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हम छात्र छात्राओं के परिवारों से सीधे संपर्क में हैं। छात्र-छात्राओं के मोबाइल डिस्चार्ज होने के कारण उनसे सीधे बात मुश्किल हो पा रही है। भारतीय दूतावास को भी प्रदेश सरकार के बनाए नोडल अधिकारियों के जरिए सूचनाएं अपडेट कराई जा रही हैं। जल्द ही छात्र-छात्राओं को बदायूं लाने का प्रयास किया जा रहा है।
- ऋषिराज, सीडीओ बदायूं

पैदल चलकर बॉर्डर तक पहुंचे, अब वतन वापसी का इंतजार
समझौता वार्ता की खबरों के बीच यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं की कहानी किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। कीव और खारकीव में फंसे विद्यार्थी युद्ध पर विराम लगने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी तरफ विनिस्तिया से यूक्रेन बॉर्डर और रोमानिया में भारतीय दूतावास के टेंट तक पहुंचे छात्र-छात्राओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बॉर्डर पर उन्हें फ्लाइट में अपनी बारी आने का लंबा इंतजार करना पड़ रहा। इधर, अपने बच्चों की चिंता में अभिभावकों की नींद उड़ी है। वह ईश्वर से उनकी सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। 

यूक्रेन से निकली अंशिका, बोली- पापा...पता नहीं कब निकल पाएंगे

पापा...बस ने काफी दूर उतार दिया था। माइनस डिग्री तापमान में चार किमी तक पैदल चलकर युद्धग्रस्त देश यूक्रेन के बॉर्डर को पार कर भारतीय दूतावास के टेंट में आ गए। सुबह से शाम होने को आई, पर कोई पूछने वाला नहीं है। बिस्किट खाकर और पानी पीकर समय बिता रहे हैं। हजारों बच्चे टेंट में हैं, पर हर दिन एक फ्लाइट 250 बच्चों को लेकर यहां से जाती है। यहीं हालत रहीं तो पता नहीं कब आपसे और मम्मी से गले लगने का मौका मिलेगा। यह मुश्किल भरे सफर की दास्तान अंशिका ने अपने पिता डॉ. अमीर सिंह यादव को सुनाईं तो उनकी भी पलकें भीग गईं। 

स्वामी धर्मानंद कालेज के प्रधानाचार्य डॉ. अमीर सिंह यादव की बेटी अंशिका यूक्रेन के विनिस्तिया में एमबीबीएस करने गई थी। तनावपूर्ण स्थिति होने पर 26 फरवरी को उसकी वापसी का टिकट बुक कराया था। लेकिन, युद्ध शुरू होने के बाद अंशिका फंस गईं। शनिवार रात अंशिका को भारतीय दूतावास द्वारा बस के जरिये निकाला गया। सुबह छह बजे यूक्रेन के बॉर्डर से पहले चिरनीवेस्टी तक से अंशिका समेत कई छात्र-छात्राओं को लाया गया। बस से उतरने के बाद बॉर्डर को पार करने के लिए चार किलोमीटर तक भीषण सर्दी में सभी को सफर करना पड़ा।

युद्ध के चलते लड़ाकू विमानों की आवाज के चलते नहीं सो पाने वाली बच्चों से चलना मुश्किल हो रहा था। सुबह नौ बजे रोमानिया बॉर्डर पार कर टैंट में बैठा दिया गया। उसके बाद अंशिका ने अपने पिता को फोन कर पूरी जानकारी दी तो पूरे परिवार ने युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर आने पर राहत की सांस ली। लेकिन, मुश्किलें खत्म नहीं होने वालीं। सुबह से शाम तक अंशिका टैंट में बैठी रही। डॉ. अमीर सिंह ने बताया कि अफरा-तफरी का माहौल बना है। इंटरनेट नहीं चल रहा। मोबाइल के नेटवर्क भी गायब है। बेटी से बात तक नहीं हो पा रही है। कभी-कभी वाई-फाई कनेक्ट होने पर जरूर मोबाइल का मैसेज आ जाता है।

बॉर्डर तक पार नहीं कराया, बिस्किट खाकर कितने दिन रह लेंगे
यूक्रेन की विनिस्तियां यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस की छात्र इंतेसाम उर्फ जिया, सदफ खान और एंजिला रविवार सुबह से शाम तक इंतजार करने के बाद भी बॉर्डर पार नहीं कर पाईं। बिस्किट खाकर व पानी पीकर समय गुजार रहीं हैं। छात्राएं बोलीं-पापा खाने के लिए बिस्किट हैं। कितने दिन तक बिस्किट खाकर रह लेंगे। बच्चियों की यह बात सुनकर उनके मम्मी और पापा की आंखों में आंसू आ गए, बेटियों को हौसला देने के लिए खुद को संभाला। विनिस्तिया यूनिवर्सिटी से शाम में बस में सवार होकर खलीलगर्वी निवासी डॉ. मजीद की बेटी इंतेसाम उर्फ जिया, रंगीन चौपाल निवासी सलीमुद्दीन की बेटी सदफ और मोहम्मद जई के रहबर की बेटी एंजिला रोमानिया बॉर्डर की ओर रवाना हुईं। हालात पर थोड़ा नियंत्रण होने के चलते लोग रोमानिया के रास्ते वापसी चाह रहे हैं। ऐसे में तमाम गाड़ियां होने के चलते सड़कें जाम हो गईं। डॉ. मजीद ने बताया कि बेटी का सुबह फोन आया था। उसने बताया कि जाम के चलते बस से उतरकर आठ से नौ किमी तक पैदल चलना पड़ा। भीषण सर्दी से हाथ-पैर तक सुन्न पड़ गए। यूक्रेन का बॉर्डर बंद होने के चलते तमाम छात्र-छात्राएं रुके हुए हैं। सुबह से शाम होने के बावजूद अभी तक बॉर्डर नहीं खुला हैं। डॉ.मजीद ने बताया कि बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। बॉर्डर पार टेंट में बैठे बच्चों को जरूर पैकेट में खाना मिल गया। यूक्रेन बॉर्डर वालों को कोई पूछने वाला नहीं है। बच्चे बिस्किट खाकर काम चला रहे हैं। मोबाइल में नेटवर्क नहीं आने के चलते बच्चों से बात तक नहीं हो पा रही है।  

दूतावास ने खड़े किए हाथ, कहा-अपने जिम्मेदारी पर बाहर निकलें
-रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद भी हालात नहीं सुधर रहे हैं। कीव में फंसे जिया सकलैन अंसारी ने बताया कि मिसाइलें और बम धमाकों की आवाज आ रही है। सायरन बजते ही बंकर की ओर भाग जाते हैं। अब तो दूतावास ने भी हाथ खड़े कर दिए। कहा-अपनी जिम्मेदारी पर बाहर निकलें। मोहल्ला हदद्दफ निवासी पशुपालन विभाग के वरिष्ठ लिपिक जियाउद्दीन अंसारी के बेटे जिया सकलैन अंसारी ने मैसेज के जरिए अपना हाल-चाल बताया। जिया ने बताया कि सायरन बजने पर सुरक्षा की दृष्टि से बंकर में चले जाते हैं। बाहर लड़ाई चल रही है, पर हम सुरक्षित हैं। दूतावास ने गाइड लाइन जारी कर हाथ खड़े कर दिए कि हमारा अभी फंसे छात्रों को निकालने का कोई प्लान नहीं है। हालात सही होने पर ट्रेन से बाहर निकल सकते हैं। उन्होंने बताया कि दूसरी गाइड लाइन में ट्रेन से जाने पर भी मना कर दिया। 

देखते ही गोली मारने के आदेश ने चिंता बढ़ाई
अभी तक हिम्मत दिखाकर पूरे परिवार को सांत्वना दे रहे संजय वर्मा की आवाज भी रविवार शाम को भर्रा गई। दीपांशु और अभिषेक के पिता संजय वर्मा ने बताया कि बच्चों से बात हुई। वहां के हालात काफी ज्यादा खराब हैं। बम धमाकों की आवाजें लगातार आ रही हैं। मिसाइलें दागी जा रही है। पांच बजे के बाद देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि सब कुछ ठीक हो जाएं और बेटों की वापसी हो सके। 

प्रधानमंत्री जी...फ्लाइट बढ़ाएं, हमारे बच्चों को सकुशल वापसी कराएं
यूक्रेन के बॉर्डर और रोमानिया में भारतीय दूतावास के टेंट में फंसे छात्र-छात्राओं की वापसी के लिए अभिभावकों ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि फ्लाइट की संख्या बढ़ाकर बच्चों को सकुशल वापस कराया जाए। 

इंतेसाम उर्फ जिया के पिता डॉ. मजीद खान ने बताया कि बेटी की बातें सुनकर मन काफी व्यथित है। बिस्किट खाकर बेटी काम चला रही। उससे बात तक नहीं हो पा रही है। भारत सरकार सिर्फ एक फ्लाइट भेज रही है। जबकि वहां पर बच्चों की संख्या ज्यादा है। फ्लाइट को बढ़ाकर बच्चों को वापस लाने के लिए कदम उठाया जाए। वहीं अंशिका यादव के पिता डॉ. अमीर सिंह यादव ने बताया कि यूक्रेन से बेटी के निकलने से राहत की सांस ली थी, लेकिन चिंता खत्म नहीं हो रहीं हैं। जहां से उसे वापस आना है। वहां पर करीब हजार लोग होंगे। ऐसे में पता नहीं कब बेटी का नंबर आ पाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है कि बच्चों के हित में ठोस रणनीति बनाकर भारतीय छात्र-छात्राओं की वापसी कराई जाए। 

बेटे की वापसी के लिए प्रार्थना कर रहा परिवार
जलालाबाद के मोहल्ला नौसारा निवासी राकेश भारद्वाज के बेटे पुलकित यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे हैं। कीव स्थित यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहे पुलकित का फोन आने पर  परिजन को कुछ देर के लिए तसल्ली मिल जाती है। लेकिन, बेटे की वापसी का कोई रास्ता नहीं दिख रहा। पुलकित पिछले साल छह नवंबर को घर से यूक्रेन गया था। राकेश ने बताया कि मौका मिलते ही पुलकित फोन से बात कर लेता है। शनिवार को आई कॉल में उसने बताया कि वह अपने करीब 200 साथियों के साथ हॉस्टल के निचले हिस्से में बनाए बंकर में है। आसपास से आने वाली धमाकों की आवाज से वह लोग सहम जाते हैं। वहां खाने-पीने की व्यवस्था भी काम चलाऊ है। बताया कि सभी लोग किसी तरह वहां से निकलकर देश पहुंचना चाहते है। पुलकित के पिता राकेश भारद्वाज, मां सीमा और छोटी बहन नैना दिन रात उसके सकुशल घर लौट आने की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे है। राकेश ने बताया कि उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर बेटे के बारे में जानकारी दर्ज करा दी है। 

बेटी का बेसब्री से इंतजार कर रहे माता-पिता
यूक्रेन में एमबीबीएस की छात्रा जया की सकुशल वापसी को लेकर तिलहर में उसके परिजन काफी परेशान हैं। भारत के सहयोग से छात्रा रोमानिया पहुंच गई है। वहां से हवाई जहाज से भारत पहुंच रही है। परिजन अपनी पुत्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।नगर के मोहल्ला बहिदुल्लागंज निवासी डॉ. चूड़ामणि और महिला स्वास्थ्य कर्मी की पुत्री जया के लिए पूरा परिवार काफी चिंतित है। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध होने के बाद से परिवार वाले पूरी नींद नहीं हुई। डॉक्टर दंपती ने बताया कि अपनी पुत्री से लगातार फोन पर बात होने पर कुछ राहत मिलती है। बेटी भी अन्य छात्रों के साथ भारत सरकार की मदद से घर लौट रही है। उसने व्हाट्सएप से फोटो भेज कर सूचना दी है कि भारतीय अधिकारी उन्हें अब रोमानिया ले जा रहे हैं। जहां से उसे हवाई जहाज से वापस भारत लाया जाएगा। जया ने भारतीय झंडों के साथ पूरे समूह की तस्वीर भी परिजन से साझा की है। उम्मीद जताई जा रही है कि जया सोमवार या मंगलवार को यहां पहुंच जाएंगी।

प्रधानमंत्री से सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने पत्र लिखकर लगाई गुहार 
आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। कहा कि यूक्रेन में संकट गहराने के साथ ही वहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी फंसे हुए हैं। इसमें बरेली मंडल के भी कई हैं। उन्हें वहां से सुरक्षित जल्द से जल्द लाया जाए। 
सांसद ने लिखे पत्र में कहा कि विद्यार्थियों को खाने की तमाम दिक्कतें हो रही हैं। हवाई हमलों से बचने के लिए बंकरों में तमाम छात्रों को इकट्ठा किया गया है। वहां राशन भी खत्म हो रहा है। देश वापस आने के लिए बरेली के तमाम छात्र पड़ोसी देश पोलैंड और रोमानिया के बॉर्डर तक पहुंचाए जा रहे हैं लेकिन वहां सीमा पर फंसे हुए हैं। ऐसे जटिल हालात से जूझ रहे छात्रों के घरवाले बेहद परेशान हैं। ऐसे में सरकार और अधिक प्रयास करते हुए उन्हें ले आए। 

एक नजर...

  • यूक्रेन में पीलीभीत जिले के भी 11 छात्र फंसे हैं। कई छात्र रोमानिया बार्डर पर पहुंच गए हैं। बार्डर पर पहुंचने की सूचना पर परिजन ने राहत की सांस ली। हालांकि अभी तक कोई जिले में नहीं लौटा है।
  • यूक्रेन में बरेली के 18 लोग फंसे हुए हैं, इनमें से ज्यादातर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, जिला प्रशासन ने इनका आंकड़ा तैयार करके शासन को रिपार्ट भेज दी है।
  • इज्जतनगर की डिफेंस कॉलोनी में रहने वाले दिव्यांश चौरसिया भी यूक्रेन में फंसे हैं। बताया कि वह पोलैंड बॉर्डर तक जाकर हॉस्टल वापस आ गए। 15 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, मगर बार्डर पार करने की अनुमति नहीं मिली। अब हॉस्टल में ही रुके हैं, वहां के स्थानीय नागरिक लोगों से पासपोर्ट छीनकर रुपये वसूल रहे हैं।
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