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यूक्रेन संकटः दानिश के सामने गिरी रेलवे स्टेशन पर मिसाइल
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माता पिता और परिवार के लोगों के साथ दानिश। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। बिसौली के गांव सीकरी निवासी फौजी सादिक खां के बेटे दानिश रविवार को घर पहुंच गए। यूूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर दानिश काफी आहत हैं। वह खारकीव मेडिकल यूनिवसिर्टी में एमबीबीएस के पांचवें वर्ष के छात्र हैं। दानिश ने कहा कि उन्होंने खारकीव जैसे खूबसूरत शहर को बर्बाद होते हुए देखा।
दानिश ने बताया कि खारकीव पर हमलों के बीच वह साथी छात्र-छात्राओं के साथ किसी तरह रेलवे स्टेशन पहुंचे। उनके सामने ही स्टेशन के पास मिसाइल गिरी। भयंकर धमाके के बीच साथी छात्र-छात्राएं भी जमीन पर गिर गए। गनीमत रही कि किसी को नुकसान नहीं हुआ। रेलवे स्टेशन का काफी हिस्सा ध्वस्त हो गया। खिड़कियों के कांच टूट गए। बम धमाकों के बीच ट्रेन में सवार होने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। चौबीस घंटे तक ट्रेन में खड़े होकर सफर किया। खारकीव से लिविव पहुंचे और इसके बाद रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। रास्ते में करीब दस किमी पैदल सफर भी करना पड़ा। भारतीय छात्र-छात्राएं एक दूसरे की मदद कर रहे थे। रोमानिया बॉर्डर पर 10 किमी लंबी लाइन में घंटों खड़ा होना पड़ा।
दानिश ने कहा कि युद्ध से सभी का नुकसान होता है। जिस तरह से यूक्रेन और खारकीव में तबाही हुई है उससे उनको काफी दुख है। खारकीव में उनके कई स्थानीय नागरिक दोस्त हैं। उनके बारे में सोचकर भी काफी बुरा लगता है। बताया कि भारतीय छात्र जिमी, ओजेफा, नितिन और अफजल ने सभी की मदद की। बुरा दौर वह भुला नहीं सकेंगे। संवाद
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दानिश ने बताया कि खारकीव पर हमलों के बीच वह साथी छात्र-छात्राओं के साथ किसी तरह रेलवे स्टेशन पहुंचे। उनके सामने ही स्टेशन के पास मिसाइल गिरी। भयंकर धमाके के बीच साथी छात्र-छात्राएं भी जमीन पर गिर गए। गनीमत रही कि किसी को नुकसान नहीं हुआ। रेलवे स्टेशन का काफी हिस्सा ध्वस्त हो गया। खिड़कियों के कांच टूट गए। बम धमाकों के बीच ट्रेन में सवार होने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। चौबीस घंटे तक ट्रेन में खड़े होकर सफर किया। खारकीव से लिविव पहुंचे और इसके बाद रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। रास्ते में करीब दस किमी पैदल सफर भी करना पड़ा। भारतीय छात्र-छात्राएं एक दूसरे की मदद कर रहे थे। रोमानिया बॉर्डर पर 10 किमी लंबी लाइन में घंटों खड़ा होना पड़ा।
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दानिश ने कहा कि युद्ध से सभी का नुकसान होता है। जिस तरह से यूक्रेन और खारकीव में तबाही हुई है उससे उनको काफी दुख है। खारकीव में उनके कई स्थानीय नागरिक दोस्त हैं। उनके बारे में सोचकर भी काफी बुरा लगता है। बताया कि भारतीय छात्र जिमी, ओजेफा, नितिन और अफजल ने सभी की मदद की। बुरा दौर वह भुला नहीं सकेंगे। संवाद
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