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पापा! हमारा राशन खत्म हो गया, शेल्टर होम से दानिश ने डाला मेसेज
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दानिश। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिले के दस छात्र छात्राएं यूक्रेन में दहशत के बीच वक्त गुजार रहे थे। इनमें से कुछ अभी वहीं हैं तो कुछ रोमानिया के रास्ते भारत लौटने की डगर में। बिसौली के गांव सीकरी निवासी दानिश ने पिता को मार्मिक मेसेज भेजा तो उनकी आंखें भर आईं।
रिटायर्ड सैन्यकर्मी सादिक खान ने बताया कि मूल रूप से सीकरी गांव के निवासी हैं। फिलहाल बरेली में भी घर बनाया है। सादिक का बेटा दानिश यूक्रेन में एमबीबीएस अंतिम वर्ष का विद्यार्थी है। उन्होंने बताया कि दानिश व उसके साथ के तीन सौ मेडिकल छात्र खारकीव से कुछ किमी दूर एक शेल्टर होम में हैं। वहां मोबाइल चार्जिंग की भी व्यवस्था नहीं है इसलिए केवल मेसेज के जरिये ही बेटे से कभी कभार बात हो पाती है। आज उसने मेसेज डाला है कि यहां राशन खत्म हो गया है। वह दुआ कर रहे हैं कि जल्दी युद्ध खत्म हो और बेटा घर आए। प्रशासन से भी मदद मांगी है।
इधर, इस्लामनगर के तीनों छात्र इमरान, ओसामा और तौहीद कुछ दिन बंकर में रहने के बाद क्वार्टर पर आए थे। इनके परिवार ने बताया कि रविवार सुबह फिर सायरन बजा और अल्टीमेटम के मुताबिक पांच मिनट में ही उन्हें फिर बंकर में जाना पड़ा। उन लोगों के पास भी खाने पीने के सामान की समस्या है।
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दो दिन बंकर में रही मोहिता, अब रोमानिया पहुंची
बदायूं। शहर निवासी डॉ. आरिफ हुसैन की बेटी मोहिता सैफ रोमानिया पहुंचने में सफल रही है। मोहिता ने पिता को बताया कि धमाकों के बाद वह दो दिन तक सहेलियों के संग विवि के बंकर में रही। शनिवार को राहत मिलने पर वह लोग बाहर निकले और बस से बॉर्डर तक पहुंचे। रविवार सुबह दस बजे रोमानिया बॉर्डर आए। वहां से अंदर जाने में शाम चार बज गए। फ्लाइट मिली तो वह सोमवार रात तक आ सकती है। संवाद
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चार किमी पैदल चलकर रोमानिया पहुंचा शादाब
बदायूं। सहसवान निवासी डॉ. आस मोहम्मद का बेटा शादाब निजी कोशिशों से रोमानिया पहुंचने में सफल हो गया है। वह कल तक भारत पहुंच सकता है। पिता व परिवार के लोग उसकी सकुशल वापसी की दुआ कर रहे हैं। उसने पिता को बताया कि एक बस से वह यूक्रेन से रोमानिया को रवाना हुआ। बस ने बॉर्डर से चार किमी पहले छोड़ दिया। एक साथी के संग वह पैदल ही बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंच गया है। संवाद
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आकाश ने दोस्तों संग कमरे में डेरा जमाया
बदायूं। बगरैन निवासी मेडिकल व्यवसायी राजेश गुप्ता का बेटा आकाश भी यूक्रेन में फंसा है। राजेश ने बताया कि बेटे से रोज बात हो जाती है। उन्होंने बताया है कि करीब सप्ताह भर का राशन अभी बचा है। वह अपने दोस्तों के साथ कमरे में ही है। फिलहाल कोई समस्या नहीं है। वह लोग टीवी पर सब हाल देखते रहते हैं। संवाद
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पैदल रोमानिया पहुंची प्रतीक्षा
बिल्सी। नगर के मोहल्ला संख्या एक हनुमान गढ़ी कॉलोनी निवासी अवधेश कुमार मिश्रा की पुत्री प्रतीक्षा मिश्रा इस वक्त यूक्रेन में है। अवधेश ने बताया कि बेटी से बात की है। उसने खुद को सुरक्षित बताया है। कहा है कि पर्याप्त साधन न होने के कारण वह नहीं आ पा रही है। शनिवार रात वह करीब दस किमी पैदल चलकर अपनी सहपाठी के साथ रोमानिया हवाई अड्डे पर पहुंची थी। वहां की स्थिति को देखकर वह विचलित हुई और वापस यूक्रेन को लौट गई। बताया कि इस दौरान वहां पर पांच डिग्री से भी कम तापमान है। पैदल चलने से उनके पैरों में छाले भी पड़ गए हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि प्रतीक्षा पिछले तीन साल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। संवाद
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रिटायर्ड सैन्यकर्मी सादिक खान ने बताया कि मूल रूप से सीकरी गांव के निवासी हैं। फिलहाल बरेली में भी घर बनाया है। सादिक का बेटा दानिश यूक्रेन में एमबीबीएस अंतिम वर्ष का विद्यार्थी है। उन्होंने बताया कि दानिश व उसके साथ के तीन सौ मेडिकल छात्र खारकीव से कुछ किमी दूर एक शेल्टर होम में हैं। वहां मोबाइल चार्जिंग की भी व्यवस्था नहीं है इसलिए केवल मेसेज के जरिये ही बेटे से कभी कभार बात हो पाती है। आज उसने मेसेज डाला है कि यहां राशन खत्म हो गया है। वह दुआ कर रहे हैं कि जल्दी युद्ध खत्म हो और बेटा घर आए। प्रशासन से भी मदद मांगी है।
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इधर, इस्लामनगर के तीनों छात्र इमरान, ओसामा और तौहीद कुछ दिन बंकर में रहने के बाद क्वार्टर पर आए थे। इनके परिवार ने बताया कि रविवार सुबह फिर सायरन बजा और अल्टीमेटम के मुताबिक पांच मिनट में ही उन्हें फिर बंकर में जाना पड़ा। उन लोगों के पास भी खाने पीने के सामान की समस्या है।
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दो दिन बंकर में रही मोहिता, अब रोमानिया पहुंची
बदायूं। शहर निवासी डॉ. आरिफ हुसैन की बेटी मोहिता सैफ रोमानिया पहुंचने में सफल रही है। मोहिता ने पिता को बताया कि धमाकों के बाद वह दो दिन तक सहेलियों के संग विवि के बंकर में रही। शनिवार को राहत मिलने पर वह लोग बाहर निकले और बस से बॉर्डर तक पहुंचे। रविवार सुबह दस बजे रोमानिया बॉर्डर आए। वहां से अंदर जाने में शाम चार बज गए। फ्लाइट मिली तो वह सोमवार रात तक आ सकती है। संवाद
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चार किमी पैदल चलकर रोमानिया पहुंचा शादाब
बदायूं। सहसवान निवासी डॉ. आस मोहम्मद का बेटा शादाब निजी कोशिशों से रोमानिया पहुंचने में सफल हो गया है। वह कल तक भारत पहुंच सकता है। पिता व परिवार के लोग उसकी सकुशल वापसी की दुआ कर रहे हैं। उसने पिता को बताया कि एक बस से वह यूक्रेन से रोमानिया को रवाना हुआ। बस ने बॉर्डर से चार किमी पहले छोड़ दिया। एक साथी के संग वह पैदल ही बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंच गया है। संवाद
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आकाश ने दोस्तों संग कमरे में डेरा जमाया
बदायूं। बगरैन निवासी मेडिकल व्यवसायी राजेश गुप्ता का बेटा आकाश भी यूक्रेन में फंसा है। राजेश ने बताया कि बेटे से रोज बात हो जाती है। उन्होंने बताया है कि करीब सप्ताह भर का राशन अभी बचा है। वह अपने दोस्तों के साथ कमरे में ही है। फिलहाल कोई समस्या नहीं है। वह लोग टीवी पर सब हाल देखते रहते हैं। संवाद
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पैदल रोमानिया पहुंची प्रतीक्षा
बिल्सी। नगर के मोहल्ला संख्या एक हनुमान गढ़ी कॉलोनी निवासी अवधेश कुमार मिश्रा की पुत्री प्रतीक्षा मिश्रा इस वक्त यूक्रेन में है। अवधेश ने बताया कि बेटी से बात की है। उसने खुद को सुरक्षित बताया है। कहा है कि पर्याप्त साधन न होने के कारण वह नहीं आ पा रही है। शनिवार रात वह करीब दस किमी पैदल चलकर अपनी सहपाठी के साथ रोमानिया हवाई अड्डे पर पहुंची थी। वहां की स्थिति को देखकर वह विचलित हुई और वापस यूक्रेन को लौट गई। बताया कि इस दौरान वहां पर पांच डिग्री से भी कम तापमान है। पैदल चलने से उनके पैरों में छाले भी पड़ गए हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि प्रतीक्षा पिछले तीन साल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। संवाद