{"_id":"668354133b2e948c340fe28b","slug":"two-youths-of-agra-drowned-while-bathing-in-ganga-one-died-badaun-news-c-123-1-sbly1035-121496-2024-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: गंगा स्नान करते आगरा के दो युवक डूबे, एक की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: गंगा स्नान करते आगरा के दो युवक डूबे, एक की मौत
Tue, 02 Jul 2024 06:42 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 02 Jul 2024 06:42 AM IST
विज्ञापन
गंगा में डूबने से मृत सनी के बारे में जानकारी देते रिश्तेदार।
उझानी/कछला(बदायूं)। गंगा में डुबकी लगाते समय आगरा के दो युवक डूब गए। गोताखोरों ने एक को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन दूसरा आंखों से ओझल हो गया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने उसे भी खोज निकाला। परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले ही जा रहे थे कि रास्ते में उसकी मौत हो गई।
हादसा पूर्वाह्न करीब 11 बजे हुआ। आगरा में शाहगंज थाना क्षेत्र के गांव रामनगर निवासी ब्रजमोहन अपने पिता खुशहाल सिंह की अस्थियां विसर्जन के लिए सुबह गंगाघाट पर आए थे। उनके साथ रिश्तेदार और परिवार के लोग भी थे। ब्रजमोहन के मुताबिक उनके गांव के कई लोग गंगा स्नान कर बाहर निकल आए, लेकिन गांव के ही अजय (18) पुत्र सतीश और सनी (25) पुत्र भगवान सिंह फिर से डुबकी लगाने को चले गए। डुबकी लगाते समय डूबे अजय को गोताखोरों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन, सनी का कहीं पता नहीं चल पाया। जब गोताखोरों ने तलाश की तो आधे घंटे बाद कहीं सनी बेहोशी की हालत में मिला।
परिजन जैसे ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराने के लिए निकले की रास्ते में ही सनी ने दम तोड़ दिया। चिकित्साधिकारी आकांक्षा माहेश्वरी ने बताया कि सनी की डूबने के बाद ही मौत हो गई थी। ब्रजमोहन ने बताया कि सनी अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- --
नहीं की गई बैरिकेडिंग, जा रही लोगों की जान
कछला घाट पर दो महीने के दौरान जिस दिन भी हादसे हुए, उनमें अधिकतर सड़क मार्ग के पुल के पास का स्थान रहा। बताते हैं कि गंगा में पिलर के पास गहराई अधिक है। आसपास संकेतक भी नहीं लगे हैं। जबकि ज्यादातर स्नानार्थी उसी तरफ डुबकी लगाने के लिए बढ़ जाते हैं। एसडीएम सदर एसपी वर्मा ने डेढ़ महीना पहले दावा भी किया था कि गहराई वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग करा दी जाएगी, लेकिन अमल अभी तक नहीं किया गया है।
-- -- -- -- -- -- -- -
हादसे के बाद परिजनों ने समेटा रसोई का सामान
- खुशहाल सिंह की अस्थियां विसर्जन के लिए ब्रजमोहन के साथ करीब 50 लोग कछला पहुंचे थे। वह निजी वाहन में रसोई का सामान भी साथ लाए थे। ताकि अस्थि विसर्जन करने के बाद सभी लोग भोजन भी कर लें। इसके लिए उन्होंने घाट के पास ही आश्रम में अपना सिलिंडर लगाकर सब्जी बनानी शुरू कर दी थी। उन्हें जैसे ही गंगा में डूबने से सनी की मौत के बारे में पता लगा तो रिश्तेदारों ने सामान समेट लिया। किसी को भी खाना नसीब नहीं हो पाया।
सावन में आएंगे कांवड़िये... घाट पर इंतजामों का होगा इम्तहान
- जलाभिषेक के लिए गंगा से जल भरने पहुंचते हैं शिवभक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी। कछला घाट पर दो महीने के दौरान 11 श्रद्धालुओं की डूबने से मौत हो चुकी है। अब सावन करीब है, ऐसे में व्यवस्थाओं का इम्तहान तो अब होगा।
इस बार सावन की शुरूआत 22 जुलाई से हो रही है। कांवड़ यात्रा 19 अगस्त तक चलेगी। खासकर सावन महीने में भोले के भक्त प्रत्येक सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। चार के मुकाबले इस बार सावन में सोमवार भी पांच पड़ रहे हैं। प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक से पहले कांवड़िये गंगाघाट पूजन के बाद जल भरकर निकलते हैं। कांवड़ मेला की व्यवस्थाओं से जुड़े ओमकार बताते हैं कि शुरूआत के दिनों में कांवड़ियों की भीड़ भले ही कम दिखे, लेकिन शुक्रवार, शनिवार और रविवार को घाट पर बम-बम भोले के अलावा कुछ और सुनाई नहीं देता है।
कांवड़ियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए घाट पर पहले से इंतजाम जरूर कर लिए जाते हैं, लेकिन मौजूदा हालात पर गौर करें तो फिलहाल संकेतक और बैरिकेडिंग भी नजर नहीं आती। इसी वजह से हादसे भी हो रहे हैं। श्रद्धालुओं को जान से हाथ धोना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में घाट पर होने वाले इंतजाम के जरिये पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को इम्तहान देना होगा। घाट की मौजूदा स्थिति से अफसर भी वाकिफ हैं।
विज्ञापन
हादसा पूर्वाह्न करीब 11 बजे हुआ। आगरा में शाहगंज थाना क्षेत्र के गांव रामनगर निवासी ब्रजमोहन अपने पिता खुशहाल सिंह की अस्थियां विसर्जन के लिए सुबह गंगाघाट पर आए थे। उनके साथ रिश्तेदार और परिवार के लोग भी थे। ब्रजमोहन के मुताबिक उनके गांव के कई लोग गंगा स्नान कर बाहर निकल आए, लेकिन गांव के ही अजय (18) पुत्र सतीश और सनी (25) पुत्र भगवान सिंह फिर से डुबकी लगाने को चले गए। डुबकी लगाते समय डूबे अजय को गोताखोरों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन, सनी का कहीं पता नहीं चल पाया। जब गोताखोरों ने तलाश की तो आधे घंटे बाद कहीं सनी बेहोशी की हालत में मिला।
विज्ञापन
परिजन जैसे ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराने के लिए निकले की रास्ते में ही सनी ने दम तोड़ दिया। चिकित्साधिकारी आकांक्षा माहेश्वरी ने बताया कि सनी की डूबने के बाद ही मौत हो गई थी। ब्रजमोहन ने बताया कि सनी अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है।
विज्ञापन
नहीं की गई बैरिकेडिंग, जा रही लोगों की जान
कछला घाट पर दो महीने के दौरान जिस दिन भी हादसे हुए, उनमें अधिकतर सड़क मार्ग के पुल के पास का स्थान रहा। बताते हैं कि गंगा में पिलर के पास गहराई अधिक है। आसपास संकेतक भी नहीं लगे हैं। जबकि ज्यादातर स्नानार्थी उसी तरफ डुबकी लगाने के लिए बढ़ जाते हैं। एसडीएम सदर एसपी वर्मा ने डेढ़ महीना पहले दावा भी किया था कि गहराई वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग करा दी जाएगी, लेकिन अमल अभी तक नहीं किया गया है।
हादसे के बाद परिजनों ने समेटा रसोई का सामान
- खुशहाल सिंह की अस्थियां विसर्जन के लिए ब्रजमोहन के साथ करीब 50 लोग कछला पहुंचे थे। वह निजी वाहन में रसोई का सामान भी साथ लाए थे। ताकि अस्थि विसर्जन करने के बाद सभी लोग भोजन भी कर लें। इसके लिए उन्होंने घाट के पास ही आश्रम में अपना सिलिंडर लगाकर सब्जी बनानी शुरू कर दी थी। उन्हें जैसे ही गंगा में डूबने से सनी की मौत के बारे में पता लगा तो रिश्तेदारों ने सामान समेट लिया। किसी को भी खाना नसीब नहीं हो पाया।
सावन में आएंगे कांवड़िये... घाट पर इंतजामों का होगा इम्तहान
- जलाभिषेक के लिए गंगा से जल भरने पहुंचते हैं शिवभक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी। कछला घाट पर दो महीने के दौरान 11 श्रद्धालुओं की डूबने से मौत हो चुकी है। अब सावन करीब है, ऐसे में व्यवस्थाओं का इम्तहान तो अब होगा।
इस बार सावन की शुरूआत 22 जुलाई से हो रही है। कांवड़ यात्रा 19 अगस्त तक चलेगी। खासकर सावन महीने में भोले के भक्त प्रत्येक सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। चार के मुकाबले इस बार सावन में सोमवार भी पांच पड़ रहे हैं। प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक से पहले कांवड़िये गंगाघाट पूजन के बाद जल भरकर निकलते हैं। कांवड़ मेला की व्यवस्थाओं से जुड़े ओमकार बताते हैं कि शुरूआत के दिनों में कांवड़ियों की भीड़ भले ही कम दिखे, लेकिन शुक्रवार, शनिवार और रविवार को घाट पर बम-बम भोले के अलावा कुछ और सुनाई नहीं देता है।
कांवड़ियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए घाट पर पहले से इंतजाम जरूर कर लिए जाते हैं, लेकिन मौजूदा हालात पर गौर करें तो फिलहाल संकेतक और बैरिकेडिंग भी नजर नहीं आती। इसी वजह से हादसे भी हो रहे हैं। श्रद्धालुओं को जान से हाथ धोना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में घाट पर होने वाले इंतजाम के जरिये पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को इम्तहान देना होगा। घाट की मौजूदा स्थिति से अफसर भी वाकिफ हैं।