{"_id":"67b22cf7a99d29282809d302","slug":"troubled-by-the-disrespect-of-tomatoes-the-farmer-got-the-crop-ploughed-by-a-tractor-badaun-news-c-123-1-sbly1035-134395-2025-02-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: टमाटर की बेकदरी से परेशान किसान ने ट्रैक्टर से जोतवा दी फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: टमाटर की बेकदरी से परेशान किसान ने ट्रैक्टर से जोतवा दी फसल
विज्ञापन
रहेड़िया गांव में फसल को उजाड़ता किसान। संवाद
उझानी। किसानों के लिए इस बार टमाटर की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। पककर तैयार खड़ी फसल का भाव गिरकर पांच रुपये प्रतिकिलो आ गया है। अब हाल यह है कि खेत से टमाटर निकालकर बाजार तक लाने का भाड़ा तक नहीं निकल पा रहा। इससे परेशान किसान ने रविवार को अपनी पूरी फसल ट्रैक्टर से जोतवा दी।
टमाटर की ऐसी बेकदरी पिछले कई साल में देखने को नहीं मिली। सब्जियों के थोक व्यापारी पंखा रोड निवासी अमर सिंह बताते हैं कि टमाटर का थोक भाव इस महीने तेजी से गिरा है। शादियों के सीजन में थोक भाव गिरकर पांच रुपये प्रतिकिलो हो गया है। भाव इतना गिर जाएगा, इसकी उम्मीद व्यापारियों को भी नहीं थी।
थोक मंडी में मांग कम होने से किसान खेत से निकालकर मंडी तक टमाटर नहीं ला रहा। वजह यह है कि उसकी लागत भी नहीं निकल रही। दाम बढ़ने की कोई उम्मीद न देख किसान परेशान हैं। खेत भी घिरा हुआ है। ऐसे में किसानों के पास खेतों को ट्रैक्टर से जोतवाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं।
विज्ञापन
भिलौलिया के चंद्रपाल और अचौरा के श्यामपाल की तरह ही बिल्सी, बिसौली, वजीरगंज के भी कई किसानों ने खेत में फसल उजाड़ डाली। टमाटर उजाड़ने के बाद किसान अगेती मक्का के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं।
प्रति बीघा आती है करीब तीन हजार रुपये लागत
किसानों की मानें तो टमाटर की खेती पर लागत कम नहीं आती। प्रति बीघा करीब तीन हजार रुपये तक लागत आई है। अगेती फसल का भाव थोक में भले ही 20 रुपये प्रतिकिलो रहा था, लेकिन पिछले दिनों मंडी में टमाटर की आवक बढ़ी तो चार-पांच दिन से बाहर के व्यापारी भी खरीदारी करने नहीं आ रहे हैं।
फुटकर में 15 रुपये प्रति किलो मिल रहा टमाटर
थोक में जबरदस्त गिरावट के बाद भी टमाटर फुटकर में करीब 15 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। गली-मोहल्लों में अच्छी गुणवत्ता के टमाटर को ठेलों पर रखकर बेचने के लिए फुटकर सब्जी विक्रेता निकल पड़ते हैं। स्टेशन रोड पर ठेले पर टमाटर बेचते मिले सौदान ने बताया कि थोक में वह पांच रुपये किलो टमाटर लाते जरूर हैं, लेकिन छंटनी के बाद खराब टमाटर फेंकने पड़ जाते हैं। ऐसे में 15 रुपये प्रति किलो बेचकर वह पूरे दिन में दो-तीन सौ रुपये ही बचा पाते हैं।
करीब चार बीघा खेत में टमाटर उगाया था। पौधे लगाने के बाद सिंचाई, निराई के अलावा कीटनाशक के रूप में खर्चे के साथ लागत प्रति बीघा करीब तीन हजार रुपये आई थी, लेकिन वह इस सीजन में पूरे खेत से करीब सात हजार रुपये का टमाटर ही बेच पाए। अब तो फसल भी जोत डाली है।- राकेश मौर्य, रेहड़िया
टमाटर की खेती करके उन्होंने करीब पांच हजार रुपये का नुकसान उठाया है। अपनी मेहनत मिलाकर लागत निकली तो हिसाब लगाना भी मुश्किल हो जाता है। उन्हें तो गोभी की फसल भी खेत में ही उजाड़नी पड़ गई थी। टमाटर में पिछले साल तो कुल मिलाकर बराबरी पर छूट गए थे।- मोरपाल, अचौरा
विज्ञापन
टमाटर की ऐसी बेकदरी पिछले कई साल में देखने को नहीं मिली। सब्जियों के थोक व्यापारी पंखा रोड निवासी अमर सिंह बताते हैं कि टमाटर का थोक भाव इस महीने तेजी से गिरा है। शादियों के सीजन में थोक भाव गिरकर पांच रुपये प्रतिकिलो हो गया है। भाव इतना गिर जाएगा, इसकी उम्मीद व्यापारियों को भी नहीं थी।
विज्ञापन
थोक मंडी में मांग कम होने से किसान खेत से निकालकर मंडी तक टमाटर नहीं ला रहा। वजह यह है कि उसकी लागत भी नहीं निकल रही। दाम बढ़ने की कोई उम्मीद न देख किसान परेशान हैं। खेत भी घिरा हुआ है। ऐसे में किसानों के पास खेतों को ट्रैक्टर से जोतवाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं।
विज्ञापन
भिलौलिया के चंद्रपाल और अचौरा के श्यामपाल की तरह ही बिल्सी, बिसौली, वजीरगंज के भी कई किसानों ने खेत में फसल उजाड़ डाली। टमाटर उजाड़ने के बाद किसान अगेती मक्का के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं।
प्रति बीघा आती है करीब तीन हजार रुपये लागत
किसानों की मानें तो टमाटर की खेती पर लागत कम नहीं आती। प्रति बीघा करीब तीन हजार रुपये तक लागत आई है। अगेती फसल का भाव थोक में भले ही 20 रुपये प्रतिकिलो रहा था, लेकिन पिछले दिनों मंडी में टमाटर की आवक बढ़ी तो चार-पांच दिन से बाहर के व्यापारी भी खरीदारी करने नहीं आ रहे हैं।
फुटकर में 15 रुपये प्रति किलो मिल रहा टमाटर
थोक में जबरदस्त गिरावट के बाद भी टमाटर फुटकर में करीब 15 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। गली-मोहल्लों में अच्छी गुणवत्ता के टमाटर को ठेलों पर रखकर बेचने के लिए फुटकर सब्जी विक्रेता निकल पड़ते हैं। स्टेशन रोड पर ठेले पर टमाटर बेचते मिले सौदान ने बताया कि थोक में वह पांच रुपये किलो टमाटर लाते जरूर हैं, लेकिन छंटनी के बाद खराब टमाटर फेंकने पड़ जाते हैं। ऐसे में 15 रुपये प्रति किलो बेचकर वह पूरे दिन में दो-तीन सौ रुपये ही बचा पाते हैं।
करीब चार बीघा खेत में टमाटर उगाया था। पौधे लगाने के बाद सिंचाई, निराई के अलावा कीटनाशक के रूप में खर्चे के साथ लागत प्रति बीघा करीब तीन हजार रुपये आई थी, लेकिन वह इस सीजन में पूरे खेत से करीब सात हजार रुपये का टमाटर ही बेच पाए। अब तो फसल भी जोत डाली है।- राकेश मौर्य, रेहड़िया
टमाटर की खेती करके उन्होंने करीब पांच हजार रुपये का नुकसान उठाया है। अपनी मेहनत मिलाकर लागत निकली तो हिसाब लगाना भी मुश्किल हो जाता है। उन्हें तो गोभी की फसल भी खेत में ही उजाड़नी पड़ गई थी। टमाटर में पिछले साल तो कुल मिलाकर बराबरी पर छूट गए थे।- मोरपाल, अचौरा

रहेड़िया गांव में फसल को उजाड़ता किसान। संवाद

रहेड़िया गांव में फसल को उजाड़ता किसान। संवाद

रहेड़िया गांव में फसल को उजाड़ता किसान। संवाद