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त्रिशूल, घुंघरू और चिमटा सब कुछ लीजिए पैकेज में

Mon, 25 Jul 2016 11:57 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Mon, 25 Jul 2016 11:57 PM IST
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त्रिशूल, घुंघरू और चिमटा सब कुछ लीजिए पैकेज में - फोटो : अमर उजाला

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तीन हजार रुपये तक है कांवड़ियों का साजो-सामान 
 कांवड़ से लेकर ड्रेस तक के रेट फिक्स 

कांवड़ यात्रा शुरू होते ही शिवभक्तों के साजो-सामान की दुकानें सज गईं हैं। त्रिशूल, घुंघरू और चिमटा सब कुछ मिल रहा है। कांवड़ बनाने का झंझट न ड्रेस सिलवाने की जरूरत, एक आवाज के साथ पूरा सामान आपके सामने होगा, लेकिन अगर पैकेज के अनुरूप ‘भोले’ बने तो महंगाई के इस दौर में जेब हल्की करनी पड़ेगी।
मंडी समिति मोड़ के पास पिछले दिनों अस्तित्व में आए मार्केट में ‘भोले’ के साजो-सामान की खरीदारी की होड़ सी मची हुई है। शिवभक्त पर भोले बनने का जुनून का ही नतीजा है कि दुकानदारों ने इस बार कांवड़ से लेकर ड्रेस तक के रेट फिक्स कर जो पैकेज बनाए हैं, उसमें हर हैसियत के शिवभक्तों की जेब का ख्याल रखा गया है। कांवड़ और शिवभक्तों के साजो-सामान में त्रिशूल, घुुंघरू, डमरू, घंटी, चिमटा, लोटा, माला, चाइना की लाइटें, झंडी, मारकीन से लेकर अच्छी क्वालिटी की ड्रेस, चुनरी, जटाएं और मुखौटे आदि भी शामिल हैं।
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शिवभक्त को खरीदारी करते वक्त जरूरत के हिसाब से फुटकर में भी सज्जा का सामान ले सकते हैं पर दुकानदारों ने अच्छी हैसियत वाले कांवड़ियों के लिए जो पैकेज बनाए हैं, उनकी शुरूआत पांच सौ रुपये से होती है। पांच सौ रुपये वाले पैकेज के सामान में मिलेगा तो सब कुछ लेकिन उसकी क्वालिटी की दुकानदार गारंटी नहीं देगा। एक, दो और तीन हजार रुपये के पैकेज में जो मिलेगा उसकी क्वालिटी के साथ शिवभक्तों के निराले अंदाज भी भरपूर गारंटी होगी। दुकानदारों ने इस बार तो सजी-सजाई कांवड़ का भी ऑफर दे दिया है।
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सुनाई नही देता ‘कैसी मची है दइया-दइया’
उझानी। कांवड यात्रा के दौरान भोले की टोलियों का मनोरंजन कराने के लिए भजन और संगीत की कई सीरीज मार्केट में हैं। भोले बाबा की महिमा से सराबोर फिल्मी गीत तो बज रहे हैं, लेकिन ठेठ अंदाज वाले भजनों की गूंज कम सुनाई देती है। दो-तीन साल पहले तक कांवड़ में गूंजने वाले ‘भोले बाबा कैसी मची है दइया-दइया’ तो करीब-करीब गायब ही हो गया है। 

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कलाकारों पर भी पड़ा महंगाई का साया
उझानी। अमूमन देखने को मिलता है कि शिवभक्तों की अधिकतर टोलियों के साथ कलाकार शिव और पार्वती बनकर नृत्य करते चलते हैं। पिछले साल तक ऐसे कलाकार शिवभक्तों की टोलियों को एक से डेढ़ हजार रुपये तक में उपलब्ध हो जाते थे लेकिन इस बार कलाकारों ने भी पांच सौ से एक हजार रुपया रेट बढ़ा लिया है। हाथरस और मथुरा के कलाकार ज्यादा महंगे तो चंदौसी, बहजोई और अलीगढ़ के कलाकार कुछ सस्ते में उपलब्ध हो जाते हैं।
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