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Budaun News: कारगिल के शहीद को दी श्रद्धांजलि, दिया प्रशस्ति पत्र
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वजीरगंज के गांव हरिओम नगर इटौआ में बलिदानी हरिओम की पत्नी गुड्डो देवी व कुंवर प्रताप सिंह को प्
वजीरगंज। कारगिल युद्ध में बलिदान हुए शहीद के घर पहुंचकर सेना के जवानों ने श्रद्धांजलि दी है। साथ ही सेना के जवानों ने शहीद की पत्नी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इस वर्ष कारगिल युद्ध विजय की रजत जयंती मनाई जा रही है। कारगिल की लड़ाई में 3 मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक चली थी। उस दौरान ब्लॉक वजीरगंज के गांव इटौआ निवासी हरिओम शहीद हुए थे। रजत जयंती विजय वर्ष के उपलक्ष्य में बुधवार को सेना के जवान शहीद के घर पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बलिदानी की पत्नी वजीरगंज की ब्लॉक प्रमुख गुड्डो देवी और उनके बेटे कुंवर प्रताप सिंह प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कुंवर प्रताप ने कहा जो जवान देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देते हैं, उन्हें कभी बुलाया नहीं जा सकता है। उनका बलिदान आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणादायी बना रहेगा।
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1999 में मुख्यमंत्री आए थे घर
कारगिल में शहीद हरिओम सिंह का पार्थिव शरीर जिस दिन घर लाया गया था, उस दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने गांव पहुंचकर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
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गांव का नाम अब हरिओम नगर
तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेश पर गांव का नाम शहीद हरिओम सिंह नगर इटौआ रखा गया। हर वर्ष गांव में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।
शहीद के नाम खोला गया स्कूल
शहीद हरिओम सिंह के नाम से गांव में जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की गई। गांव में उनकी प्रतिमा भी स्थापित कराई गई। मुड़िया गांव से लेकर शहीद पार्क तक पक्की सड़क का निर्माण कराया गया था। प्रशासन की अनदेखी के चलते अब सड़क टूट चुकी है। पार्क भी बदहाल है।
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इस वर्ष कारगिल युद्ध विजय की रजत जयंती मनाई जा रही है। कारगिल की लड़ाई में 3 मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक चली थी। उस दौरान ब्लॉक वजीरगंज के गांव इटौआ निवासी हरिओम शहीद हुए थे। रजत जयंती विजय वर्ष के उपलक्ष्य में बुधवार को सेना के जवान शहीद के घर पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बलिदानी की पत्नी वजीरगंज की ब्लॉक प्रमुख गुड्डो देवी और उनके बेटे कुंवर प्रताप सिंह प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कुंवर प्रताप ने कहा जो जवान देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देते हैं, उन्हें कभी बुलाया नहीं जा सकता है। उनका बलिदान आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणादायी बना रहेगा।
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1999 में मुख्यमंत्री आए थे घर
कारगिल में शहीद हरिओम सिंह का पार्थिव शरीर जिस दिन घर लाया गया था, उस दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने गांव पहुंचकर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
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गांव का नाम अब हरिओम नगर
तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेश पर गांव का नाम शहीद हरिओम सिंह नगर इटौआ रखा गया। हर वर्ष गांव में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।
शहीद के नाम खोला गया स्कूल
शहीद हरिओम सिंह के नाम से गांव में जूनियर हाईस्कूल की स्थापना की गई। गांव में उनकी प्रतिमा भी स्थापित कराई गई। मुड़िया गांव से लेकर शहीद पार्क तक पक्की सड़क का निर्माण कराया गया था। प्रशासन की अनदेखी के चलते अब सड़क टूट चुकी है। पार्क भी बदहाल है।