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Budaun News: मेंथा फैक्टरी के कमरे में मृत मिले तीन सुरक्षा गार्ड, मालिक समेत तीन पर हत्या का केस
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उझानी (बदायूं)। दिल्ली हाईवे पर कुड़ानरसिंहपुर गांव के पास बंद पड़ी एक मेंथा ऑयल फैक्टरी में तीन सुरक्षा गार्डों की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। मंगलवार सुबह तीनों के शव गेट के पास केबिन में फर्श पर पड़े मिले।
बड़ी संख्या में जुटे लोगों के बीच परिजन ने हत्या का आरोप लगाते हुए कई घंटे तक हंगामा किया। इस पर पुलिस ने फैक्टरी मालिक मनोज व नितेश गोयल और मैनेजर राकेश समेत कुछ अज्ञात लोगों पर हत्या का केस दर्ज कर लिया। हालांकि देर शाम हुए पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में तीनों की दम घुटने से मौत की पुष्टि की गई।
जान गंवाने वालों में मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव बसावनपुर निवासी जुगेंद्र यादव (30), मूसाझाग इलाके के गांव मुड़सेना निवासी वीरभान यादव उर्फ भानू (32) और कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव पसेई निवासी विवेक यादव (28) शामिल हैं। पुलिस का कहना था कि इन तीनों के जिस कमरे में शव मिले, वहां परात में जल रहे अलाव से दम घुटने से मौत हुई। मामले में जांच के मद्देनजर एसडीएम सदर मोहित ने फैक्टरी को सील करा दिया।
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भारत मिंट केमिकल मेंथा ऑयल फैक्टरी को लोन चुकता न करने के कारण बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने कब्जे में ले लिया था। तब से यह फैक्टरी बंद पड़ी है और अगले महीने इसकी नीलामी भी होनी है। बैंक ने यहां सुरक्षा के लिए निजी कंपनी के गार्ड तैनात कर रखे थे। जुगेंद्र के पिता रामबहादुर ने बताया कि उनका बेटा फैक्टरी में सिक्योरिटी सुपरवाइजर था। वीरभान और विवेक जुगेंद्र के साथ ही आते थे। वे तीनों सोमवार को रोजाना की तरह डयूटी पर आए थे।
दर्ज कराई एफआईआर में रामबहादुर का कहना है कि फैक्टरी मालिक मनोज गोयल व उनके भाई नीतेश गोयल उर्फ गोपाल और मैनेजर राकेश तीनों ने अन्य अज्ञात लोगों की मदद से रात में किसी समय तीनों की हत्या कर शव खींचकर फैक्टरी गेट के पास बने गार्ड रूम में डाल दिए। परिजनों ने आरोप लगाया कि तीनों के शरीर पर घसीटने के निशान हैं। इसी आधार पर हंगामा करते हुए परिजनों ने मांग रखी कि जब तक उन्हें एफआईआर की कॉपी नहीं दी जाएगी, वे शव नहीं उठने देंगे। भीड़ का दबाव देखकर पुलिस ने हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर कॉपी दे दी। करीब छह घंटे हंगामे के बाद शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कोई चोट न होने की बात कही गई है।
मृतकों के परिजनों ने बताया कि एक साल पहले इसी फैक्टरी में आग लगी थी, जिसमें एक मजदूर की जलकर मौत हो गई थी। इसके अलावा यहां अन्य कई गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं।
हंगामा देख तीन थानों की पुलिस बुलाई गई
-इस मामले के बाद देखते ही देखते तीन गांवों से हजारों की तादाद में भीड़ फैक्टरी परिसर में पहुंच गई। सूचना मिलते ही मृतकों के परिजन भी रोते-बिलखते पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। लोगों के हंगामे काे देखते हुए मुजरिया, सहसवान व उझानी पुलिस को मौके पर बुला लिया गया। लोगों की भीड़ के सामने पुलिस कम पड़ गई। परिजनों को मौके पर सीओ डॉ. देवेंद्र कुमार ने परिजनों को समझाया। इसके बाद किसी तरह वे लोग शांत हुए।
एक डॉक्टर पर आपत्ति के बाद बाद बदला गया पैनल
तीनों गार्डों के शवों के पोस्टमॉर्टम कराने के लिए तीन डॉक्टरों का पैनल बनाया गया। इसमें शामिल एक डॉक्टर को देखते ही परिवार के लोगों ने आपत्ति जता दी। उनका कहना था कि यह डॉक्टर फैक्टरी मालिकों का करीबी है। मामला सामने पर एसएसपी के आदेश पर तत्काल डॉक्टर को बदलवा दिया गया। परिजनों की सहमति के बाद ही पैनल तैयार कर पोस्टमॉर्टम शुरू कराया जा सका।
तीन सदस्यीय जांच टीम करेगी जांच
- पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। इसमें एडीएम (एफआर) डॉ. वैभव शर्मा, एसडीएम सदर, मोहित कुमार व सीओ उझानी देवेंद्र कुमार को शामिल किया गया है। इस घटना में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - अवनीश राय, डीएम।
मुकदमा तो परिजनों के शिकायती पत्र के आधार पर दर्ज किया गया है। मामला दर्ज होने से पहले परिवार के लोग शव नहीं उठने दे रहे थे। परिजनों को संतुष्ट भरी करना पुलिस का ही काम है। लेकिन तीनों की मौत दम घुटने से हुई है। इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुई है। कोई इंजरी नहीं आई है। अब पुलिस इस पर जांच कर रही है- डॉ बृजेश कुमार सिंह, एसएसपी
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बड़ी संख्या में जुटे लोगों के बीच परिजन ने हत्या का आरोप लगाते हुए कई घंटे तक हंगामा किया। इस पर पुलिस ने फैक्टरी मालिक मनोज व नितेश गोयल और मैनेजर राकेश समेत कुछ अज्ञात लोगों पर हत्या का केस दर्ज कर लिया। हालांकि देर शाम हुए पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में तीनों की दम घुटने से मौत की पुष्टि की गई।
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जान गंवाने वालों में मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव बसावनपुर निवासी जुगेंद्र यादव (30), मूसाझाग इलाके के गांव मुड़सेना निवासी वीरभान यादव उर्फ भानू (32) और कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव पसेई निवासी विवेक यादव (28) शामिल हैं। पुलिस का कहना था कि इन तीनों के जिस कमरे में शव मिले, वहां परात में जल रहे अलाव से दम घुटने से मौत हुई। मामले में जांच के मद्देनजर एसडीएम सदर मोहित ने फैक्टरी को सील करा दिया।
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भारत मिंट केमिकल मेंथा ऑयल फैक्टरी को लोन चुकता न करने के कारण बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने कब्जे में ले लिया था। तब से यह फैक्टरी बंद पड़ी है और अगले महीने इसकी नीलामी भी होनी है। बैंक ने यहां सुरक्षा के लिए निजी कंपनी के गार्ड तैनात कर रखे थे। जुगेंद्र के पिता रामबहादुर ने बताया कि उनका बेटा फैक्टरी में सिक्योरिटी सुपरवाइजर था। वीरभान और विवेक जुगेंद्र के साथ ही आते थे। वे तीनों सोमवार को रोजाना की तरह डयूटी पर आए थे।
दर्ज कराई एफआईआर में रामबहादुर का कहना है कि फैक्टरी मालिक मनोज गोयल व उनके भाई नीतेश गोयल उर्फ गोपाल और मैनेजर राकेश तीनों ने अन्य अज्ञात लोगों की मदद से रात में किसी समय तीनों की हत्या कर शव खींचकर फैक्टरी गेट के पास बने गार्ड रूम में डाल दिए। परिजनों ने आरोप लगाया कि तीनों के शरीर पर घसीटने के निशान हैं। इसी आधार पर हंगामा करते हुए परिजनों ने मांग रखी कि जब तक उन्हें एफआईआर की कॉपी नहीं दी जाएगी, वे शव नहीं उठने देंगे। भीड़ का दबाव देखकर पुलिस ने हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर कॉपी दे दी। करीब छह घंटे हंगामे के बाद शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कोई चोट न होने की बात कही गई है।
मृतकों के परिजनों ने बताया कि एक साल पहले इसी फैक्टरी में आग लगी थी, जिसमें एक मजदूर की जलकर मौत हो गई थी। इसके अलावा यहां अन्य कई गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं।
हंगामा देख तीन थानों की पुलिस बुलाई गई
-इस मामले के बाद देखते ही देखते तीन गांवों से हजारों की तादाद में भीड़ फैक्टरी परिसर में पहुंच गई। सूचना मिलते ही मृतकों के परिजन भी रोते-बिलखते पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। लोगों के हंगामे काे देखते हुए मुजरिया, सहसवान व उझानी पुलिस को मौके पर बुला लिया गया। लोगों की भीड़ के सामने पुलिस कम पड़ गई। परिजनों को मौके पर सीओ डॉ. देवेंद्र कुमार ने परिजनों को समझाया। इसके बाद किसी तरह वे लोग शांत हुए।
एक डॉक्टर पर आपत्ति के बाद बाद बदला गया पैनल
तीनों गार्डों के शवों के पोस्टमॉर्टम कराने के लिए तीन डॉक्टरों का पैनल बनाया गया। इसमें शामिल एक डॉक्टर को देखते ही परिवार के लोगों ने आपत्ति जता दी। उनका कहना था कि यह डॉक्टर फैक्टरी मालिकों का करीबी है। मामला सामने पर एसएसपी के आदेश पर तत्काल डॉक्टर को बदलवा दिया गया। परिजनों की सहमति के बाद ही पैनल तैयार कर पोस्टमॉर्टम शुरू कराया जा सका।
तीन सदस्यीय जांच टीम करेगी जांच
- पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। इसमें एडीएम (एफआर) डॉ. वैभव शर्मा, एसडीएम सदर, मोहित कुमार व सीओ उझानी देवेंद्र कुमार को शामिल किया गया है। इस घटना में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - अवनीश राय, डीएम।
मुकदमा तो परिजनों के शिकायती पत्र के आधार पर दर्ज किया गया है। मामला दर्ज होने से पहले परिवार के लोग शव नहीं उठने दे रहे थे। परिजनों को संतुष्ट भरी करना पुलिस का ही काम है। लेकिन तीनों की मौत दम घुटने से हुई है। इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुई है। कोई इंजरी नहीं आई है। अब पुलिस इस पर जांच कर रही है- डॉ बृजेश कुमार सिंह, एसएसपी