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Budaun News: मां के अपराधों की सजा सलाखों के पीछे भुगत रहे तीन मासूम

Fri, 27 Jun 2025 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Jun 2025 12:28 AM IST
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Three innocent children are suffering behind bars for their mother's crimes
जिला कारागार। संवाद - फोटो : mathura
बदायूं। जिला जेल में 47 महिलाएं बंदी व कैदी हैं। इसमें तीन महिलाओं के साथ उनके एक-एक बच्चे भी हैं। जेल में बंद यह मासूम डेढ़ से तीन साल के हैं। इनमें से दो महिलाएं हत्या व एक महिला गैर इरादतन हत्या के अपराध में जेल में निरुद्ध हैं। यहां बंद बच्चों की अच्छी परवरिश व विकास के लिए जेल प्रशासन की ओर से कई प्रयास किए गए है। इनको पढ़ाने के लिए शिक्षिका गुलशन अफरोज को भी तैनात किया हैं। इसके अलावा बच्चों के खेलने के लिए खिलौने दिए गए हैं। बच्चों को नियमित खाने में बिस्कुट, फल, दूध, खीर व दलिया समेत अन्य पौष्टिक आहार दिया जाता है। मौजूदा समय में जेल में 1015 बंदी व कैदी हैं।
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आजीवन की सजा काट रही पूनम और उसका पति
20 मार्च 2023 में बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव दिसौलीगंज निवासी ज्ञानेंद्र का शव पड़ोस के रहने वाली संजीव के घर में मिला था। इस मामले में ज्ञानेंद्र के पिता ने संजीव और उसकी पत्नी पूनम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अगस्त 2024 में कोर्ट ने संजीव व पूनम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई दी थी। उस समय पूनम का बेटा कार्तिक महज तीन महीने का था। तब से पूनम के साथ उसका बेटा भी जेल में है।
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सास की गैर इरादतन हत्या में निरुद्ध रश्मि की दो साल की बेटी
11 जनवरी को सदर कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला शिवपुरम के गली तीन निवासी उमाशंकर की पत्नी विमला शर्मा की मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चोटों के निशान मिले थे। इस पर उमाशंकर ने पत्नी के हत्या के आरोप में अपने बेटा राजेंद्र, बहू नीलम और रश्मि के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब जेल में निरुद्ध रश्मि के साथ ही उसकी दो साल की बेटी पीयू भी जेल में है।
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हत्या में विचाराधीन मीनाक्षी ने जेल में ही दिया बेटी को जन्म
बिसौली कस्बा के मुहल्ला धुबिया ताल निवासी मीनाक्षी हत्या के मामले में करीब चार साल से जेल में निरुद्ध है। उसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उसकी तीन साल की बेटी प्रज्ञा है। मीनाक्षी ने बेटी का जन्म जेल में ही दिया था।


पश्चाताप के आंसू, बच्चों की परवरिश की चिंता
जेल अधीक्षक राजेंद्र कुमार ने बताया जेल में बंद महिलाओं की आंखों में अब पश्चाताप के आंसू हैं। उनके अपराध के कारण मासूम भी जेल में हैं। महिलाओं को अब उनके बच्चों की परवरिश की चिंता है, लेकिन जेल प्रशासन ने उनके लिए तमाम सुविधाओं का इंतजाम किया है। इससे उन्हें समाज से जोड़कर रखा जा सके। प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था की गई है। बच्चों के खेलने के लिए पार्क का भी इंतजाम किया गया है। इससे वह शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर न हो।
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