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Budaun News: सामूहिक दुष्कर्म के केस में तीन आरोपी बरी, वादी पर चलेगा केस
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बदायूं। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) दिनेश तिवारी की कोर्ट से संदेह का लाभ मिलने पर सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में तीन आरोपी दोषमुक्त हो गए। कोर्ट ने बयानों में आरोपों की पुष्टि और पूर्व बयान का समर्थन न करने पर वादी के विरुद्ध धारा 22 पाॅक्सो अधिनियम (झूठी शिकायत से संबंधित) के अंतर्गत अलग से वाद कर करने और उसके विरुद्ध नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
बिल्सी थाने में 4 फरवरी 2019 को एक व्यक्ति ने तहरीर दी थी कि उसकी 14 वर्षीय बेटी 3 फरवरी 2019 की शाम 7 बजे अपनी बुआ के बुलाने पर उसके घर गई थी। बेटी रातभर घर नहीं लौटी। सुबह 7 बजे बेटी घर लौटी तो उसने बताया कि उसे शकील गांव की सड़क पुलिया के पास मिला और बहलाकर गाड़ी में बैठाकर कहीं ले गया।
पुलिस ने नाबालिग को ले जाने के आरोप में केस दर्ज किया। विवेचना शुरू कर गवाहों के बयान दर्ज किए। पीड़िता के बयान दर्ज कर मेडिकल परीक्षण कराया। घटनास्थल का निरीक्षण कर विवेचना के बाद आरोपी शकील के विरुद्ध दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाते हुए आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
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कोर्ट ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अंतर्गत पूर्व में पारित न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बच्चन पुत्र रहीस और सलीम पुत्र शफीक उर्फ सप्पी काे पॉक्सो, दुष्कर्म की धाराओं में विचारण के लिए तलब किया। वहीं, पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह शकील को पहले से जानती थी।
कहा, घटना वाली शाम वह बुआ के घर से दूध लेने के लिए निकली थी। तभी रास्ते में पुलिया चौराहे पर चार लड़के शकील, बच्चन, सलीम और किशोर खड़े थे। बच्चन ने आवाज देकर रोका और पास आकर उसे गाड़ी के भीतर धक्का दे दिया। किशोर ने मेरा मुंह बंद कर दिया। दो घंटे गाड़ी चलने के बाद जंगल में रुकी और जंगल में चारों ने उसके साथ बारी-बारी दुष्कर्म किया। गाल पर कई थप्पड़ भी मारे।
कार्रवाई करने पर चारों ने मेरे भाइयों को जान से मारने की धमकी दी थी। कोर्ट में वादी मुकदमा पीड़िता के पिता ने सशपथ बयान दिया कि शकील सहसनुपर बिलारी, जिला मुरादाबाद का रहने वाला है। बेटी ने बताया था कि शकील और उसके दोस्तों ने उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया था। वहीं, पीड़िता ने कोर्ट में हुई जिरह में कह दिया कि वह आरोपियों को नहीं पहचानती है। न ही आरोपियों को पहले से जानती थी। न ही इन्होंने मेरे साथ गलत काम किया था।
पीड़िता ने जिरह में पहले अभियोजन के पक्ष में बयान दिया फिर बयान बदल दिए। इसी तरह पीड़िता के पिता ने भी जिरह में कहा कि घटना मेरे सामने नहीं हुई, न ही देखी थी। आरोपियों द्वारा पीड़िता को गाड़ी में ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म होने से भी इन्कार कर दिया। चिकित्सीय साक्ष्य से भी अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। कोर्ट ने सभी साक्ष्यों का अवलोकन किया। इसके बाद कोर्ट ने संदेह का लाभ मिलने पर सभी आरोपों से शकील, बच्चन और सलीम को दोषमुक्त कर दिया।
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बिल्सी थाने में 4 फरवरी 2019 को एक व्यक्ति ने तहरीर दी थी कि उसकी 14 वर्षीय बेटी 3 फरवरी 2019 की शाम 7 बजे अपनी बुआ के बुलाने पर उसके घर गई थी। बेटी रातभर घर नहीं लौटी। सुबह 7 बजे बेटी घर लौटी तो उसने बताया कि उसे शकील गांव की सड़क पुलिया के पास मिला और बहलाकर गाड़ी में बैठाकर कहीं ले गया।
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पुलिस ने नाबालिग को ले जाने के आरोप में केस दर्ज किया। विवेचना शुरू कर गवाहों के बयान दर्ज किए। पीड़िता के बयान दर्ज कर मेडिकल परीक्षण कराया। घटनास्थल का निरीक्षण कर विवेचना के बाद आरोपी शकील के विरुद्ध दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाते हुए आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
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कोर्ट ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अंतर्गत पूर्व में पारित न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बच्चन पुत्र रहीस और सलीम पुत्र शफीक उर्फ सप्पी काे पॉक्सो, दुष्कर्म की धाराओं में विचारण के लिए तलब किया। वहीं, पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह शकील को पहले से जानती थी।
कहा, घटना वाली शाम वह बुआ के घर से दूध लेने के लिए निकली थी। तभी रास्ते में पुलिया चौराहे पर चार लड़के शकील, बच्चन, सलीम और किशोर खड़े थे। बच्चन ने आवाज देकर रोका और पास आकर उसे गाड़ी के भीतर धक्का दे दिया। किशोर ने मेरा मुंह बंद कर दिया। दो घंटे गाड़ी चलने के बाद जंगल में रुकी और जंगल में चारों ने उसके साथ बारी-बारी दुष्कर्म किया। गाल पर कई थप्पड़ भी मारे।
कार्रवाई करने पर चारों ने मेरे भाइयों को जान से मारने की धमकी दी थी। कोर्ट में वादी मुकदमा पीड़िता के पिता ने सशपथ बयान दिया कि शकील सहसनुपर बिलारी, जिला मुरादाबाद का रहने वाला है। बेटी ने बताया था कि शकील और उसके दोस्तों ने उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया था। वहीं, पीड़िता ने कोर्ट में हुई जिरह में कह दिया कि वह आरोपियों को नहीं पहचानती है। न ही आरोपियों को पहले से जानती थी। न ही इन्होंने मेरे साथ गलत काम किया था।
पीड़िता ने जिरह में पहले अभियोजन के पक्ष में बयान दिया फिर बयान बदल दिए। इसी तरह पीड़िता के पिता ने भी जिरह में कहा कि घटना मेरे सामने नहीं हुई, न ही देखी थी। आरोपियों द्वारा पीड़िता को गाड़ी में ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म होने से भी इन्कार कर दिया। चिकित्सीय साक्ष्य से भी अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। कोर्ट ने सभी साक्ष्यों का अवलोकन किया। इसके बाद कोर्ट ने संदेह का लाभ मिलने पर सभी आरोपों से शकील, बच्चन और सलीम को दोषमुक्त कर दिया।