{"_id":"57489b454f1c1b44076916b4","slug":"there-will-be-two-children-s-rare-owl-found","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुर्लभ प्रजाति के करेल उल्लू के दो बच्चे मिले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुर्लभ प्रजाति के करेल उल्लू के दो बच्चे मिले
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 28 May 2016 12:42 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कादरचौक वन क्षेत्र के गांव ककोड़ा में एक प्राचीन पीपल के पेड़ पर दुर्लभ प्रजाति के करेल उल्लू के दो बच्चे मिले हैं। जानकारी तब हुई जब इनमें से एक पीपल के पेड़ ने नीचे गिरा, तो वहां तमाशा बन गया। भीड़ जुट गई मगर कोई इसे पहचान नहीं पाया। बाद में दूसरा बच्चा भी पेड़ से उतार लिया गया। वन विभाग के रेंजर ने लखनऊ इसका फोटो भेज करेल उल्लू के बच्चों के रूप में पहचान कराई है। बताया कि अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का उल्लू बदायूं में मिलने पर वन विभाग में खुशी है। इसका मतलब है कि दुर्लभ प्रजाति के इस उल्लू के लिए यहां माहौल माकूल है।
दिन के तीन बजे ककोड़ा गांव निवासी जयपाल शर्मा के आवास के सामने चौक में पीपल के पुराने पेड़ से एक अजीब शक्ल का पक्षी का बच्चा गिरा, तो गांव के लोग इसे देखने एकत्र होने लगे। जयपाल शर्मा की बेटी सभ्या ने सबसे पहले इसे देखा। जैसे ही यह पेड़ से गिरा पास ही एक कुत्ता उस पर झपटने को दौड़ा। सभ्या ने इसे बचाया। तमाम लोग यहां एकत्र हो गए और इस अजीबोगरीब पक्षी को देखकर आश्चर्य कर रहे थे। तभी पीपल के पेड़ पर इसी जैसा एक और पक्षी दिखाई दिया। उसे अजय सिंह पुंडीर ने पेड़ पर चढ़कर उतारा। दोनों पक्षियों की पहचान को वन रेंजर सत्येंद्र चौधरी से संपर्क किया गया। उनके व्हाट्स-एप पर उसके फोटो भेजे गए। उनको भी जल्द इस पक्षी के बारे में जानकारी नहीं हुई, तो उन्होंने लखनऊ अपने अधिकारियों को फोटो भेज जानकारी ली और पुष्टि की कि यह अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का करेल उल्लू के बच्चे हैं। उन्होंने गांव के लोगों से इन्हें सुरक्षित रखने को कहा है। बाद में वन विभाग इन्हें ले लेगा और उपयुक्त सुरक्षा देगा। रेंजर ने कहा है कि वन विभाग को इससे खुशी हुई है। अगर, इस पक्षी को यहां माहौल उपयुक्त नहीं होता तो आज करेल उल्ले के बच्चे नहीं मिलते।
0000000000
करेल उल्लू के बारे में भी जानें
0 यह अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का विशाल पक्षी है।
0 यह विशालकाय जंगली कौओं की तरह मिलते हैं।
0 ऊपरी पंखों का रंग हरा, पीला या धूमर होता है।
0 पंखों के ऊपर काली, सफेद चित्तियां होती हैं।
0 नीचे की ओर पंख सफेद या पीले रंग के होते हैं।
0 सिर बड़ा और गोल होता है। इसमें बड़ी-बड़ी आंखें डरावनी होती हैं।
0 नर-मादा एक से होते हैं, इसलिए पहचान आसान नहीं होती है।
0 इसके अंडे बड़े गोल सफेद आकार के होते हैं।
0 खंडहर और सुनसान जगह इन्हें पसंद होती है।
0 बस्तियों से अधिक दूर रहना इन्हें पसंद नहीं है।
0 रात्रिचर पक्षी है और चूहे इनका बेहद प्रिय भोजन है।
0 नवजातों की नर और मादा दोनों देखभाल करते हैं।
0 घोंसला केवल मादा की बनाती है।
विज्ञापन
दिन के तीन बजे ककोड़ा गांव निवासी जयपाल शर्मा के आवास के सामने चौक में पीपल के पुराने पेड़ से एक अजीब शक्ल का पक्षी का बच्चा गिरा, तो गांव के लोग इसे देखने एकत्र होने लगे। जयपाल शर्मा की बेटी सभ्या ने सबसे पहले इसे देखा। जैसे ही यह पेड़ से गिरा पास ही एक कुत्ता उस पर झपटने को दौड़ा। सभ्या ने इसे बचाया। तमाम लोग यहां एकत्र हो गए और इस अजीबोगरीब पक्षी को देखकर आश्चर्य कर रहे थे। तभी पीपल के पेड़ पर इसी जैसा एक और पक्षी दिखाई दिया। उसे अजय सिंह पुंडीर ने पेड़ पर चढ़कर उतारा। दोनों पक्षियों की पहचान को वन रेंजर सत्येंद्र चौधरी से संपर्क किया गया। उनके व्हाट्स-एप पर उसके फोटो भेजे गए। उनको भी जल्द इस पक्षी के बारे में जानकारी नहीं हुई, तो उन्होंने लखनऊ अपने अधिकारियों को फोटो भेज जानकारी ली और पुष्टि की कि यह अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का करेल उल्लू के बच्चे हैं। उन्होंने गांव के लोगों से इन्हें सुरक्षित रखने को कहा है। बाद में वन विभाग इन्हें ले लेगा और उपयुक्त सुरक्षा देगा। रेंजर ने कहा है कि वन विभाग को इससे खुशी हुई है। अगर, इस पक्षी को यहां माहौल उपयुक्त नहीं होता तो आज करेल उल्ले के बच्चे नहीं मिलते।
विज्ञापन
0000000000
करेल उल्लू के बारे में भी जानें
0 यह अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का विशाल पक्षी है।
0 यह विशालकाय जंगली कौओं की तरह मिलते हैं।
0 ऊपरी पंखों का रंग हरा, पीला या धूमर होता है।
0 पंखों के ऊपर काली, सफेद चित्तियां होती हैं।
0 नीचे की ओर पंख सफेद या पीले रंग के होते हैं।
0 सिर बड़ा और गोल होता है। इसमें बड़ी-बड़ी आंखें डरावनी होती हैं।
0 नर-मादा एक से होते हैं, इसलिए पहचान आसान नहीं होती है।
0 इसके अंडे बड़े गोल सफेद आकार के होते हैं।
0 खंडहर और सुनसान जगह इन्हें पसंद होती है।
0 बस्तियों से अधिक दूर रहना इन्हें पसंद नहीं है।
0 रात्रिचर पक्षी है और चूहे इनका बेहद प्रिय भोजन है।
0 नवजातों की नर और मादा दोनों देखभाल करते हैं।
0 घोंसला केवल मादा की बनाती है।