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Budaun News: रिश्वतखोरी में पकड़ी गई महिला इंस्पेक्टर विवेचना में भी कर गई खेल
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बदायूं। इस्लामनगर थाने में पिछले दिनों रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ी महिला इंस्पेक्टर सिमरनजीत कौर विस्फोट कांड की विवेचना में भी खेल कर गई। वह दो आरोपियों में से एक को बचा गई और दूसरे के खिलाफ चार्जशीट लगा गई। विस्फोट कांड में एफआईआर दो आतिशबाज पिता-पुत्र पर थी, पर विवेचक ने केवल पिता असगर अली के खिलाफ चार्जशीट लगाई गई है। एफआईआर में आरोपी बनाए बेटे अख्तर अली को बचाया गया है।
इस्लामनगर कस्बे में एक अप्रैल 2024 को विस्फोट हो गया था। दरअसल, कस्बा निवासी अख्तर अली और उसका पिता असगर अली एक लाइसेंस पर ही पटाखों का कारोबार कर रहे थे। बारूद का लाइसेंस असगर अली के नाम था। उस पर अख्तर अली ने भी अपनी दुकान खोल रखी थी। दुकान के सामने अपने नाम का बोर्ड भी लगा रखा था।
हादसे के दौरान उसके घर में पटाखों का अवैध भंडारण था। एक अप्रैल को अख्तर अली के बेटा तैमूर (5) अनार चला रहा था। उसकी चिंगारी पटाखों के भंडारण तक पहुंच गई थी, जिससे इतना बड़ा विस्फोट हुआ कि पूरा दो मंजिला मकान तिनके की तरह ढह गया। उसमें दबकर तैमूर और उसकी मां सलामत बेगम की मौत हो गई थी, जबकि उसकी बहन अर्शी उर्फ अर्फी व तमन्ना घायल हो गई थी। जैसे-तैसे लोगों ने मलबा हटाकर उन्हें बाहर निकाला था।
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इस संबंध में एसआई मुनेंद्र सिंह की तहरीर पर अख्तर अली और उसके पिता असगर अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। दूसरे दिन असगर अली को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इस मामले की विवेचना भी महिला इंस्पेक्टर सिमरनजीत कौर कर रही थी। बताते हैं कि महिला इंस्पेक्टर इसमें भी खेल कर गई। इसमें दुकान मालिक अख्तर अली के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसमें केवल असगर अली को ही दोषी माना, जबकि हादसे का सबसे बड़ा जिम्मेदार अख्तर अली ही थी। महिला इंस्पेक्टर अपनी गिरफ्तारी के दौरान विवेचना पूरी कर चुकी थी। उसने सभी पर्चे काट दिए गए थे। केवल चार्जशीट न्यायालय में पेश होने को रह गई थी। इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने बताया कि चार्जशीट को कोर्ट में पेश करा दिया है। इसकी विवेचना महिला इंस्पेक्टर ने की थी।
महिला इंस्पेक्टर ने दरोगा की आंखों देखी को कर दिया खारिज
विस्फोट कांड में दरोगा मुनेंद्र सिंह वादी हैं। उन्होंने ही मौके के हालात देखने के बाद एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में उनका कहना था कि वह सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे थे। वहां देखा तो पूरा मकान ध्वस्त हो चुका था। आसपास धूल ही धूल थी। जेसीबी बुलाकर तुरंत मलबा हटाया गया। मलबे में दबी महिला और उसके बच्चों को बाहर निकलवाया गया। पटाखों के अवशेष पड़े थे। किसी गैस सिलिंडर के टुकड़े नहीं मिले थे। पूछताछ के दौरान पता चला कि मकान आतिशबाज अख्तर अली का है। वहां आतिशबाज के नाम से बोर्ड भी पड़ा था। धमाके में मौत का शिकार महिला अख्तर अली की पत्नी थी और तैमूर उसका बेटा था। दुकान अख्तर अली की थी। उसके नाम लाइसेंस नहीं था पर इंस्पेक्टर ने अख्तर अली का ही नाम विवेचना के दौरान आरोपी से दिया।
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इस्लामनगर कस्बे में एक अप्रैल 2024 को विस्फोट हो गया था। दरअसल, कस्बा निवासी अख्तर अली और उसका पिता असगर अली एक लाइसेंस पर ही पटाखों का कारोबार कर रहे थे। बारूद का लाइसेंस असगर अली के नाम था। उस पर अख्तर अली ने भी अपनी दुकान खोल रखी थी। दुकान के सामने अपने नाम का बोर्ड भी लगा रखा था।
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हादसे के दौरान उसके घर में पटाखों का अवैध भंडारण था। एक अप्रैल को अख्तर अली के बेटा तैमूर (5) अनार चला रहा था। उसकी चिंगारी पटाखों के भंडारण तक पहुंच गई थी, जिससे इतना बड़ा विस्फोट हुआ कि पूरा दो मंजिला मकान तिनके की तरह ढह गया। उसमें दबकर तैमूर और उसकी मां सलामत बेगम की मौत हो गई थी, जबकि उसकी बहन अर्शी उर्फ अर्फी व तमन्ना घायल हो गई थी। जैसे-तैसे लोगों ने मलबा हटाकर उन्हें बाहर निकाला था।
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इस संबंध में एसआई मुनेंद्र सिंह की तहरीर पर अख्तर अली और उसके पिता असगर अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। दूसरे दिन असगर अली को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इस मामले की विवेचना भी महिला इंस्पेक्टर सिमरनजीत कौर कर रही थी। बताते हैं कि महिला इंस्पेक्टर इसमें भी खेल कर गई। इसमें दुकान मालिक अख्तर अली के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसमें केवल असगर अली को ही दोषी माना, जबकि हादसे का सबसे बड़ा जिम्मेदार अख्तर अली ही थी। महिला इंस्पेक्टर अपनी गिरफ्तारी के दौरान विवेचना पूरी कर चुकी थी। उसने सभी पर्चे काट दिए गए थे। केवल चार्जशीट न्यायालय में पेश होने को रह गई थी। इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने बताया कि चार्जशीट को कोर्ट में पेश करा दिया है। इसकी विवेचना महिला इंस्पेक्टर ने की थी।
महिला इंस्पेक्टर ने दरोगा की आंखों देखी को कर दिया खारिज
विस्फोट कांड में दरोगा मुनेंद्र सिंह वादी हैं। उन्होंने ही मौके के हालात देखने के बाद एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में उनका कहना था कि वह सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे थे। वहां देखा तो पूरा मकान ध्वस्त हो चुका था। आसपास धूल ही धूल थी। जेसीबी बुलाकर तुरंत मलबा हटाया गया। मलबे में दबी महिला और उसके बच्चों को बाहर निकलवाया गया। पटाखों के अवशेष पड़े थे। किसी गैस सिलिंडर के टुकड़े नहीं मिले थे। पूछताछ के दौरान पता चला कि मकान आतिशबाज अख्तर अली का है। वहां आतिशबाज के नाम से बोर्ड भी पड़ा था। धमाके में मौत का शिकार महिला अख्तर अली की पत्नी थी और तैमूर उसका बेटा था। दुकान अख्तर अली की थी। उसके नाम लाइसेंस नहीं था पर इंस्पेक्टर ने अख्तर अली का ही नाम विवेचना के दौरान आरोपी से दिया।