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Budaun News: घटने लगा गंगा का जलस्तर फिर भी कम नहीं हुई दुश्वारियां
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सहसवान का गांव वीरसहाय नगला का हाल। संवाद
बदायूं। गंगा का जलस्तर बुधवार से घटने लगा है, लेकिन इसकी गति बहुत धीमी है। अभी भी गंगा खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ प्रभावित गावों से पानी बहुत धीमी गति से पानी कम हो रहा है। फिर भी दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। गांवों और खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है।
चार अगस्त से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। मंगलवार को खतरे के निशान से गंगा का जलस्तर 60 सेंटीमीटर अधिक था। बुधवार को पानी इसमें आठ सेमी की कमी आई है। इस कमी का बाढ़ पर कोई खास असर नहीं पड़ा। अभी भी गांवों में पानी भरा हुआ है। गांवों के लोग घरों से अपना सामान नाव और सिर पर उठाकर पलायन करने को मजबूर हैं। खुद और जानवरों के पेट भरने के लिए उन्हें जूझना पड़ रहा है। बुधवार को एसडीएम ने तोफीनगला गांव का निरीक्षण किया है। उन्होंने लोगों से समस्या की जानकारी ली। उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
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करीब पांच किलोमीटर की चौड़ाई में बह रही गंगा
सामान्य दिनों में गंगा की चौड़ाई एक किलोमीटर है। पहाड़ पर हुई बारिश के बाद डैम से पानी छोड़ा गया तो जिले में गंगा ने तबाही मचाना शुरू कर दिया। इस दौरान गंगा ने विकराल रूप धारण कर लिया है और दोनों किनारों को तोड़ते हुए करीब पांच किलोमीटर की चौड़ाई में फैल गई है। इससे ग्रामीण परेशान हैं। उसहैत क्षेत्र में तो इसकी चौड़ाई बढ़कर सात किलोमीटर तक पहुंच गई है। रामगंगा भी छह से सात किलोमीटर तक फैल गई है।
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तटबंध और गंगा के बीच फंसे छह गांव के लोग
सहसवान के गांव तोफिया नगला, वीरसहाय नगला, खागी नगला, भमरौलिया, तेली नगला और गिरधारी नगला हर साल बाढ़ का दंश झेल रहे है। यह गांव तटबंध और गंगा के बीच बसे हुए हैं। हर साल प्रशासन इन गांवों को तटबंध के दूसरी ओर बसाने की बात कहता है लेकिन उसे अमल में नहीं लाया जा रहा है। इन छह गांव को अगर तटबंध के दूसरी तरफ बसा दिया जाए तो लोगों को राहत मिलेगी।
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चार अगस्त से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। मंगलवार को खतरे के निशान से गंगा का जलस्तर 60 सेंटीमीटर अधिक था। बुधवार को पानी इसमें आठ सेमी की कमी आई है। इस कमी का बाढ़ पर कोई खास असर नहीं पड़ा। अभी भी गांवों में पानी भरा हुआ है। गांवों के लोग घरों से अपना सामान नाव और सिर पर उठाकर पलायन करने को मजबूर हैं। खुद और जानवरों के पेट भरने के लिए उन्हें जूझना पड़ रहा है। बुधवार को एसडीएम ने तोफीनगला गांव का निरीक्षण किया है। उन्होंने लोगों से समस्या की जानकारी ली। उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
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करीब पांच किलोमीटर की चौड़ाई में बह रही गंगा
सामान्य दिनों में गंगा की चौड़ाई एक किलोमीटर है। पहाड़ पर हुई बारिश के बाद डैम से पानी छोड़ा गया तो जिले में गंगा ने तबाही मचाना शुरू कर दिया। इस दौरान गंगा ने विकराल रूप धारण कर लिया है और दोनों किनारों को तोड़ते हुए करीब पांच किलोमीटर की चौड़ाई में फैल गई है। इससे ग्रामीण परेशान हैं। उसहैत क्षेत्र में तो इसकी चौड़ाई बढ़कर सात किलोमीटर तक पहुंच गई है। रामगंगा भी छह से सात किलोमीटर तक फैल गई है।
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तटबंध और गंगा के बीच फंसे छह गांव के लोग
सहसवान के गांव तोफिया नगला, वीरसहाय नगला, खागी नगला, भमरौलिया, तेली नगला और गिरधारी नगला हर साल बाढ़ का दंश झेल रहे है। यह गांव तटबंध और गंगा के बीच बसे हुए हैं। हर साल प्रशासन इन गांवों को तटबंध के दूसरी ओर बसाने की बात कहता है लेकिन उसे अमल में नहीं लाया जा रहा है। इन छह गांव को अगर तटबंध के दूसरी तरफ बसा दिया जाए तो लोगों को राहत मिलेगी।

सहसवान का गांव वीरसहाय नगला का हाल। संवाद