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Budaun News: डेंगू का खतरा सिर पर है, निबटने के इंतजाम अधूरे

Sat, 30 Mar 2024 12:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 30 Mar 2024 12:31 AM IST
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The threat of dengue is looming, arrangements to deal with it are incomplete
बदायूं। डेंगू का खतरा सिर पर है, लेकिन निबटने के इंतजाम अभी अधिकारी पूरे नहीं करा सके हैं। मेडिकल कॉलेज समेत जिले के सरकारी अस्पतालों में डेंगू के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। ब्लड सेपरेशन यूनिट की पत्रावली लाइसेंस के लिए गाजियाबाद स्थित औषधि विभाग के नार्थ जोन के मुख्यालय पर आठ महीने से अटकी है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में वेंटिलेटर उपयोग में नहीं हैं।
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डेंगू आशंकित होने पर मरीजों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल भेजा जाता है। दोनों जगहों पर डेंगू से बचाव के संसाधन नहीं हैं। ऐसे में डेंगू से ग्रसित होने पर मरीजों को इलाज कराने के लिए बरेली या अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता है। पिछले साल डेंगू ने कहर बरपाया था। बावजूद इसके स्वास्थ्य महकने के अधिकारी जागे नहीं हैं।
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डेंगू की पुष्टि को लेकर भले ही स्वास्थ्य विभाग का अपना तर्क रहता हो, लेकिन हकीकत में मरीजों की जान पर बन आती रही है। यह कई साल से देखने को मिल रहा है। जब डेंगू फैल जाता है तो विभाग हाथ-पांव मारने का काम करता है, लेकिन तब तक विभाग के हाथ से मामला निकल चुका होता है। विभाग हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं पाता है।
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डेंगू अप्रैल में अपना असर दिखाने लगता है। मई और जून में इसका कहर शुरू होता है, जो अक्तूबर तक चलता है। अगर इसकी रोकथाम के लिए विभाग अभी से कदम उठाए तो डेंगू को फैलने से रोका जा सकता है। विभाग न तो संसाधनों को दुरुस्त करा पा रहा है न ही रोकथाम के बारे में लोगोें को जागरूक करने का काम शुरू हो पा रहा है। इसी लापरवाही से पिछले साल 723 मरीजों ने डेंगू का दंश झेला। उनके परिवार आज भी उस दर्द को भुला नहीं पाए हैं। रिकार्ड में बीते साल डेंगू से छह मौतें दर्ज हैं।

दो साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी ब्लड सेपरेशन यूनिट
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट दो साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते जिला अस्पताल में आने वाले डेंगू, मलेरिया के पीड़ितों को ब्लड में रेड ब्लड सेल, प्लाज्मा और प्लेट्लेटस आदि कंपोनेंट की सुविधा नहीं मिल पाती है। सेपरेशन यूनिट में ब्लड के कंपोनेंट अलग किए जाते हैं। जरूरत के हिसाब से मरीजों को आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेट्लेटस आदि चढ़ाया जाता है। निकाले गए ब्लड के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग अवधि होती है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट एक यूनिट ब्लड से तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी करती है।

16 वेंटिलेटर फांक रहे धूल
कोरोना काल में तीन बार में 16 वेंटिलेटर खरीदे गए थे। इनमें नार्मल, फेस मास्क और मैकेनिकल वेंटिलेटर शामिल हैं। नार्मल श्रेणी के वेंटिलेटर की कीमत डेढ़ से सवा दो लाख रुपये है। फेस मास्क श्रेणी की 5.70 लाख रुपये व मैकेनिकल वेंटिलेटर की कीमत छह लाख रुपये से अधिक है। सभी बंद कमरे में धूल फांक रहे हैं। समय से ठीक न होने पर डेंगू के मरीजों को फिर बरेली, दिल्ली की दौड़ लगानी होगी।



सभी चिकित्साधिकारियों को अवगत करा दिया गया है कि जहां-जहां वेंटिलेटर खराब हैं वह जल्द ठीक करा लें। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की व्यवस्था भी पूरी है। केवल स्टाफ और लाइसेंस मिलते ही उसको भी संचालित करा दिया जाएगा। प्रयास रहेगा कि जिले में इस बार डेंगू फैले ही नहीं। - डॉ. अब्दुल सलाम, सीएमओ


ब्लड सेपरेशन यूनिट की बिल्डिंग तैयार है। मशीनें भी आ चुकी हैं। आठ माह पहले लाइसेंस की पत्रावली औषधि विभाग को भेजी गई थी। अभी तक कोई अधिकारी निरीक्षण करने नहीं आया है। यही कारण है कि लाइसेंस के अभाव में यूनिट शुरू नहीं हो पा रही है। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस



अभी दस दिन पहले ही चार्ज संभाला है। अगर पत्रावली कहीं लंबित है तो उसका फॉलोअप करेंगे। ताकि जल्द लाइसेंस मिल सके। कोशिश रहेगी कि डेंगू पीड़ित व्यक्ति को सभी सुविधाएं मुख्यालय स्तर पर ही मिल जाएं। उन्हें कहीं और जाने की आवश्यकता न पड़े। - लवकुश प्रसाद, औषधि इंस्पेक्टर
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