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Budaun News: सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था बेपटरी, मरीजों को बाहर से लिखी जा रहीं दवाएं

Sat, 08 Nov 2025 12:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 08 Nov 2025 12:21 AM IST
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The system in government hospitals is in disarray, patients are being prescribed medicines from outside.
सुरेश - फोटो : poni news
बदायूं। जिले के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, महिला व जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टरों पर आरोप है कि वे मेडिकल संचालकों से मिलीभगत कर मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। दवा खरीदकर मरीजों से वापस आकर दिखाने को भी कहते हैं। इसके बाद उन्हें दवा खाने का तरीका समझाते हैं। बाहर से दवाएं खरीदने के कारण गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि सरकार की ओर से निशुल्क दवा वितरण की सुविधा अस्पतालों में उपलब्ध है।
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मरीजों का कहना है कि अस्पतालों में जब वे डॉक्टर से दवा लिखवाने के बाद अस्पताल की फार्मेसी पर पहुंचते हैं तो अधिकांश दवाएं वहां उपलब्ध नहीं बताई जातीं। उन्हें बाहर की मेडिकल दुकान से दवाएं खरीदने को कहा जाता है। यह दवाएं महंगी होने के साथ-साथ मरीजों की जेब पर भारी पड़ती हैं।
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कई मरीजों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर जानबूझकर उन्हीं कंपनियों की दवाएं लिखते हैं, जिनका कमीशन उन्हें प्राइवेट मेडिकल संचालकों से मिलता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने पहुंचे फैजगंज निवासी मरीज मुजीब हसन के परिजन जमील हसन ने बताया कि डॉक्टर ने बुखार और कमजोरी के लिए बाहर की 535 रुपये की दवा लिख दी, जबकि वही दवाएं मुफ्त में भी मिल सकती थीं।
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तीमारदार का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अगर निशुल्क दवाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो आमजन कहां जाएंगे। वहीं, महिला व जिला अस्पताल का हाल और भी ज्यादा खराब है। महिला अस्पताल में भर्ती प्रसूता के परिजन ने बताया कि डॉक्टर ने इंजेक्शन और दवाएं बाहर से लाने को कहा। इस संबंध में जब सरकारी स्टोर पर जानकारी ली तो उससे संबंधित दवाएं वहां पर उपलब्ध थीं। मरीज भर्ती होने की वजह से मजबूरी में दवाएं बाहर से लानी पड़ी।


गोलमाल से सीएचसी-पीएचसी भी नहीं हैं अछूती
जिले के ग्रामीण इलाकों की सीएचसी और पीएचसी में भी यही हालात हैं। वहां भी मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रहीं हैं। ग्रामीण मरीजों का कहना है कि मुफ्त इलाज और दवा वितरण की सरकारी योजनाएं केवल कागजों पर ही सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का बोलबाला है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को इस पर तत्काल संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाए, जो सरकारी सेवा में रहते हुए निजी मेडिकल संचालकों से सांठगांठ कर रहे हैं।


---मरीजों ने बताई अपनी-अपनी व्यथा----

पहले खरीद लाओ, फिर बताते हैं खाने का तरीका
आंख में इंफेक्शन हो गया है, तो डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने एक दवा अस्पताल से दी। वहीं दो दवाएं बाहर मेडिकल से लिख दीं। कहा कि जब खरीद लो तो दिखा देना। तब बताएंगे कैसे उसका उपयोग करना है। - मुन्ने, बेहटा


किराए के ही पैसे थे, बिना दवा लिए ही लौट आए
सीने में दर्द हो रहा है। साथ ही खांसी भी आ रही है। डॉक्टर ने कुछ दवाएं अस्पताल से दीं। साथ ही ट्यूब और खांसी की सिरप बाहर मेडिकल से लेने के लिए कहा। किराए के लिए ही पैसे बचे थे, सो दवा नहीं ली। -सुरेश, डहरपुर



सभी डॉक्टरों को सख्त हिदायत दी गई है कि वह अस्पताल में उपलब्ध दवाएं ही लिखें। कोई भी सरकारी डाॅक्टर बाहर की दवाएं नहीं लिखेगा। अगर कोई ऐसा कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ

सुरेश

सुरेश- फोटो : poni news

सुरेश

सुरेश- फोटो : poni news

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