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Budaun News: निजी विद्यालयों में किताबों के पाठ्यक्रम एनसीईआरटी के और दाम मनमाने
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संजीव कुमार शर्मा, अभिभावक वजीरगंज।
बदायूं। निजी स्कूलों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम तो किताबें चलती हैं लेकिन प्रकाशन कोई है। वह निजी प्रकाशकों की किताबें चलवा रहे हैं। उसके दाम एनसीईआरटी के किताबें से कई गुना है। इससे अभिभावकों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
सीबीएसई बोर्ड के सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लगाई जानी है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। मंगलवार को पड़ताल की गई तो वजीरगंज बड़े बाजार स्थिति बुक डिपो के संचालक पवन वार्ष्णेय ने बताया कि निजी स्कूलों की अपनी पसंद है। किताबें बच्चों को लिखकर दी जाती हैं। वह एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम तो लेते हैं लेकिन किताबें निजी प्रकाशक की खरीदवाते हैं। वह किताबें महंगी मिलती हैं।
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क्या बोले अभिभावक
फोटो-19
एनसीईआरटी से 10 गुना महंगी किताबें
किताबें सब महंगी मिलती हैं। बुक सेलर व स्कूल वालों की मिलीभगत होती है। हम यह चाहते हैं कि एनसीईआरटी की किताबें खरीद लें, लेकिन स्कूल में वह मान्य ही नहीं होती हैं। यही वजह है कि 200 रुपये के कोर्स के लिए 1800 रुपये देने पड़ते हैं।
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- संजीव कुमार शर्मा, अभिभावक, वजीरगंज
फोटो-22
निर्धारित दुकानों पर ही मिल रहीं किताबें
बेटा कस्बे के ही एक स्कूल में पढ़ रहा है। स्कूल से किताबों के लिए पर्ची दी गई। पर्ची लेकर कस्बे की अन्य दुकानों पर भी गए लेकिन कहीं नहीं मिलीं। बाद में स्कूल जाकर पूछा तो दुकान का नाम शिक्षक ने बताया। वहां गए तो किताबें 1200 रुपये में मिलीं। अगर एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराई होती तो इसके एक चौथाई से काम हो जाता। - देवेश्वर दयाय सक्सेना, अभिभावक, वजीरगंज
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कोट
- निजी स्कूल के संचालकों को एनसीईआरटी की किताबों से ही स्कूलों में पढ़ाई कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। अगर इसके बाद भी वह निजी प्रकाश की किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं तो कार्रवाई की जाएगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए बदायूं
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सीबीएसई बोर्ड के सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लगाई जानी है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। मंगलवार को पड़ताल की गई तो वजीरगंज बड़े बाजार स्थिति बुक डिपो के संचालक पवन वार्ष्णेय ने बताया कि निजी स्कूलों की अपनी पसंद है। किताबें बच्चों को लिखकर दी जाती हैं। वह एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम तो लेते हैं लेकिन किताबें निजी प्रकाशक की खरीदवाते हैं। वह किताबें महंगी मिलती हैं।
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क्या बोले अभिभावक
फोटो-19
एनसीईआरटी से 10 गुना महंगी किताबें
किताबें सब महंगी मिलती हैं। बुक सेलर व स्कूल वालों की मिलीभगत होती है। हम यह चाहते हैं कि एनसीईआरटी की किताबें खरीद लें, लेकिन स्कूल में वह मान्य ही नहीं होती हैं। यही वजह है कि 200 रुपये के कोर्स के लिए 1800 रुपये देने पड़ते हैं।
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- संजीव कुमार शर्मा, अभिभावक, वजीरगंज
फोटो-22
निर्धारित दुकानों पर ही मिल रहीं किताबें
बेटा कस्बे के ही एक स्कूल में पढ़ रहा है। स्कूल से किताबों के लिए पर्ची दी गई। पर्ची लेकर कस्बे की अन्य दुकानों पर भी गए लेकिन कहीं नहीं मिलीं। बाद में स्कूल जाकर पूछा तो दुकान का नाम शिक्षक ने बताया। वहां गए तो किताबें 1200 रुपये में मिलीं। अगर एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराई होती तो इसके एक चौथाई से काम हो जाता। - देवेश्वर दयाय सक्सेना, अभिभावक, वजीरगंज
कोट
- निजी स्कूल के संचालकों को एनसीईआरटी की किताबों से ही स्कूलों में पढ़ाई कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। अगर इसके बाद भी वह निजी प्रकाश की किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं तो कार्रवाई की जाएगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए बदायूं

संजीव कुमार शर्मा, अभिभावक वजीरगंज।

संजीव कुमार शर्मा, अभिभावक वजीरगंज।