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चंद मिनटों में निपटा दी सोत के रकबे की नापजोख
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Fri, 23 Sep 2016 11:41 PM IST
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कब्जा जांचने गइ टीम
- फोटो : अमर उजाला
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अभिलेखों में सब कुछ ठीक दिखाकर लौट आई टीम
अवैध कब्जों की शिकायतों पर सख्त होते हुए डीएम पवन कुमार ने अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड को सोत (नदी) से कब्जा हटाने के कड़े निर्देश गुरुवार को दिए थे। इसका असर शुक्रवार को नजर आया। सदर तहसील के नायब तहसीलदार, तीन कानूनगो और तीन लेखपालों की टीम के साथ नदी की पैमाइश करने के लिए दिन में करीब साढ़े 11 बजे ही पहुंच गए। नापजोख शुरू की, लेकिन नापजोख शुरू होने के चंद मिनटों बाद ही अधिकारियों की टीम ने सोत नदी के रकबे को पूरा बता दिया। रिपोर्ट तहसीलदार को देने की तैयारी भी कर ली।
सोत के किनारे तमाम रसूखदार लोगों की जमीन पड़ी है। इसमें कुछ लोगों ने निर्माण कार्य कराया है। इन निर्माण कार्यों को प्रशासन और शहरी अवैध निर्माण के तौर पर देख रहे थे। यही वजह थी कि जिले में राजनीतिक अखाड़ा बनने के बाद सबसे पहले सोत के किनारे कराए गए निर्माण कार्यों पर गाज गिरने का तय माना जा रहा था। यह वजह थी डीएम पवन कुमार के ज्वाइन करने के दूसरे दिन ही लोगों ने सबसे पहले नदी पर हुए अवैध कब्जे की शिकायत को उठाया था। डीएम ने सोत से अवैध कब्जे हटाने का आदेश दे दिया।
शुक्रवार को नायब तहसीलदार राधेश्याम शर्मा, कानूनगो वाहिद खां, राजेंद्र शर्मा और अहिवरन सिंह, लेखपाल प्रभात सिंह, सज्जाद हुसैन और रिजवान अली ने नापजोख शुरू की। वहां पर अधिकारियों की टीम जो नक्शा और अभिलेख लेकर पहुंची थी, उसके मुताबिक सोत अपने बहाव क्षेत्र में बह रही है, उस पर अवैध कब्जे जैसी कोई बात नहीं है। थोड़ी देर तक नापजोख करने के बाद टीम के अधिकारियों ने अवैध कब्जे की बात को लगभग नकार दिया। फिलहाल, टीम ने तहसीलदार को अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद पूरी स्थिति एकदम से स्पष्ट हो जाएगी। एनटी राधेश्याम का कहना है रिपोर्ट तैयार कर रहा हूं, जिसे तहसीलदार को दी जाएगी। वहीं, तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद चौधरी का कहना है कि शुक्रवार शाम तक रिपोर्ट उन्हें मिली नहीं थी। इस वजह से कुछ भी स्पष्ट नहीं कह सकते हैं।
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निर्माणों को क्लीन चिट देने की योजना नहीं?
बदायूं। जिला स्तरीय से लेकर प्रांतीय स्तर के नेताओं तक और अधिकारियों से अधिकांश बार सोत पर अवैध कब्जे करने की शिकायत की जाती रही है। इस वजह से प्रशासन की हमेशा किरकिरी होती रहती थी। कहीं, इस वजह से ही तो प्रशासन ने सोत नदी पर किए गए निर्माण कार्यों और जमीन खरीदने वालों को क्लीन चिट देने की योजना के तहत ही कार्य तो नहीं किया है। यह बात अधिकांश शहरवासियों के जेहन में कौंध रही है।
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अवैध कब्जों की शिकायतों पर सख्त होते हुए डीएम पवन कुमार ने अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड को सोत (नदी) से कब्जा हटाने के कड़े निर्देश गुरुवार को दिए थे। इसका असर शुक्रवार को नजर आया। सदर तहसील के नायब तहसीलदार, तीन कानूनगो और तीन लेखपालों की टीम के साथ नदी की पैमाइश करने के लिए दिन में करीब साढ़े 11 बजे ही पहुंच गए। नापजोख शुरू की, लेकिन नापजोख शुरू होने के चंद मिनटों बाद ही अधिकारियों की टीम ने सोत नदी के रकबे को पूरा बता दिया। रिपोर्ट तहसीलदार को देने की तैयारी भी कर ली।
सोत के किनारे तमाम रसूखदार लोगों की जमीन पड़ी है। इसमें कुछ लोगों ने निर्माण कार्य कराया है। इन निर्माण कार्यों को प्रशासन और शहरी अवैध निर्माण के तौर पर देख रहे थे। यही वजह थी कि जिले में राजनीतिक अखाड़ा बनने के बाद सबसे पहले सोत के किनारे कराए गए निर्माण कार्यों पर गाज गिरने का तय माना जा रहा था। यह वजह थी डीएम पवन कुमार के ज्वाइन करने के दूसरे दिन ही लोगों ने सबसे पहले नदी पर हुए अवैध कब्जे की शिकायत को उठाया था। डीएम ने सोत से अवैध कब्जे हटाने का आदेश दे दिया।
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शुक्रवार को नायब तहसीलदार राधेश्याम शर्मा, कानूनगो वाहिद खां, राजेंद्र शर्मा और अहिवरन सिंह, लेखपाल प्रभात सिंह, सज्जाद हुसैन और रिजवान अली ने नापजोख शुरू की। वहां पर अधिकारियों की टीम जो नक्शा और अभिलेख लेकर पहुंची थी, उसके मुताबिक सोत अपने बहाव क्षेत्र में बह रही है, उस पर अवैध कब्जे जैसी कोई बात नहीं है। थोड़ी देर तक नापजोख करने के बाद टीम के अधिकारियों ने अवैध कब्जे की बात को लगभग नकार दिया। फिलहाल, टीम ने तहसीलदार को अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद पूरी स्थिति एकदम से स्पष्ट हो जाएगी। एनटी राधेश्याम का कहना है रिपोर्ट तैयार कर रहा हूं, जिसे तहसीलदार को दी जाएगी। वहीं, तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद चौधरी का कहना है कि शुक्रवार शाम तक रिपोर्ट उन्हें मिली नहीं थी। इस वजह से कुछ भी स्पष्ट नहीं कह सकते हैं।
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निर्माणों को क्लीन चिट देने की योजना नहीं?
बदायूं। जिला स्तरीय से लेकर प्रांतीय स्तर के नेताओं तक और अधिकारियों से अधिकांश बार सोत पर अवैध कब्जे करने की शिकायत की जाती रही है। इस वजह से प्रशासन की हमेशा किरकिरी होती रहती थी। कहीं, इस वजह से ही तो प्रशासन ने सोत नदी पर किए गए निर्माण कार्यों और जमीन खरीदने वालों को क्लीन चिट देने की योजना के तहत ही कार्य तो नहीं किया है। यह बात अधिकांश शहरवासियों के जेहन में कौंध रही है।