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पहले सूखे ने रुलाया.. अब तेज हवा संग बारिश ने नुकसान पहुंचाया

Fri, 23 Sep 2022 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 23 Sep 2022 12:57 AM IST
सार

झमाझम बारिश के दौरान बुधवार देर रात तेज हवा चलने से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।शिमला मिर्च समेत सब्जी फसलों में अगर बारिश का पानी है तो उसके निकास की व्यवस्था करने में देरी न की जाए।

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The rain threw water on the wishes of the farmers facing drought
कादरचौक क्षेत्र में आंधी-बारिश से गिरी बाजरे की फसल देख दुखी बैठा किसान। संवाद - फोटो : BADAUN

विस्तार

बदायूं/उझानी। झमाझम बारिश के दौरान बुधवार देर रात तेज हवा चलने से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। पहले से सूखे की मार से परेशान किसानों को धान, बाजरा समेत पिछैती मक्का से अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन बारिश ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। करीब 40 फीसदी तक नुकसान के अनुमान के बीच सब्जी फसलों में भी बारिश का पानी भर गया है। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा।
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पिछले कुछ दिनों से मौसम के बदलाव के बाद बुधवार शाम से ही बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। इससे धान किसानों को राहत मिली, लेकिन रात में जोरदार बारिश के साथ तेज हवा चली। पहले से नमी की वजह से खेतों में खड़ी धान, बाजरा और पिछैती मक्का की फसल जमीन पर गिर गई। शिमला मिर्च की फसलों में भी पानी भर गया। टमाटर, मिर्च और कद्दूवर्गीय फसलों की स्थिति भी खेतों में पानी भर जाने से खराब हुई है।
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उझानी के किसान नेत्रपाल ने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान, बाजरा, धान और पिछैती मक्का की फसल में हुआ है। कादरचौक के किसान राम सिंह के मुताबिक पहले पानी न पड़ने से फसल सूख रही थीं, अब बारिश ने करीब 40 फीसदी नुकसान पहुंचाया है। बृहस्पतिवार सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचे तो जमीन पर बिछी फसलों को देख परेशान नजर आए। कादरचौक, उझानी, बिल्सी, बिसौली, सहसवान और दातागंज क्षेत्र में भी फसलों काफी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि धान करीब 40 फीसदी तक गिर चुका है। गंगा किनारे के इलाकों में सब्जी फसलें चौपट होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
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बाजरा और ज्वार गिरने से चारा संकट की आशंका
बारिश से फसलों को नुकसान का सीधा असर पशुओं के चारे पर पड़ेगा। बाजरा और ज्वार का इस्तेमाल पशु चारे के रूप में ज्यादा होता है। पहले से भूसे की कमी से जूझ रहे किसानों ने खेतों में ज्वार की बोवाई में कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन बुधवार रात तेज हवा के झोंके और बारिश ने ज्वार को भी नुकसान पहुंचाया। जिन खेतों में धान की फसल गिर गई है, उसका पुआल भी पशुओं के खाने लायक नहीं बचेगा।
सरसों की बोवाई प्रभावित होने का डर
धान, बाजरा और मक्का पैदा करने वाले किसानों में अधिकतर ने सरसों की फसल लेने के लिए श्राद्ध पक्ष शुरू होने के समय से ही खेतों में तैयारी शुरू कर दी थी। सरसों की बोवाई के लिए खेतों में एक-दो बार जोताई भी हो चुकी है। बारिश से खेतों में पानी भर जाने के कारण फिलहाल छह-सात दिन तक सरसों की बोवाई संभव नहीं है। ऐसे में सरसों की फसल लेट भी हो सकती है।

तेज हवा के साथ बारिश होने से सबसे ज्यादा नुकसान बाजरा की फसल को हुआ है। जहां धान गिरा है, वहीं नुकसान देखने को मिलेगा। शिमला मिर्च समेत सब्जी फसलों में अगर बारिश का पानी है तो उसके निकास की व्यवस्था करने में देरी न की जाए। खेत में पानी भरा रहने से शिमला मिर्च के पौधे सड़ सकते हैं। -डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

उझानी क्षेत्र में जमीन पर बिछी धान की फसल। संवाद

उझानी क्षेत्र में जमीन पर बिछी धान की फसल। संवाद- फोटो : BADAUN

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