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Budaun News: बोर्ड में पास हुआ प्रस्ताव, पर अब तक नहीं मिली जगह, आवारा कुत्तों से दहशत में शहर

Sun, 02 Nov 2025 01:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 02 Nov 2025 01:13 AM IST
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The proposal was passed by the board, but the site has not yet been found, and the city is in panic due to stray dogs.
बदायूं। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। गलियों से लेकर मुख्य बाजार तक झुंड में घूम रहे कुत्ते राहगीरों पर हमला कर रहे हैं। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में हर महीने औसतन पांच से छह हजार लोग कुत्तों के काटने के बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके नगर पालिका प्रशासन की नींद अब तक नहीं टूटी है।
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शहर नगर पालिका प्रशासन की 17 अक्तूबर को बोर्ड बैठक हुई थी। इसमें आवारा कुत्तों से निपटने के लिए फीडिंग प्वाइंट बनाने और शहर के बाहर शेल्टर होम तैयार करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। बैठक को पंद्रह दिन से अधिक बीत चुके हैं, अब तक सार्वजनिक भोजन स्थल (फीडिंग प्वाइंट) बनाने के लिए जमीन का चयन नहीं हो सका है।
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इससे साफ जाहिर है कि नगर पालिका प्रशासन सिर्फ कागजों में योजनाएं बना रहा है, जमीन पर कुछ भी नहीं दिख रहा। शहर के मोहल्ला जवाहपुरी, नेकपुर, कटरा ब्राह्मपुर, शिवपुरम और रेलवे स्टेशन के पास सबसे अधिक कुत्तों का आतंक है। स्कूल आने-जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं। कई बार लोग शिकायतें दर्ज करा चुके हैं, लेकिन नगर पालिका सिर्फ जल्द कार्रवाई का भरोसा देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देती है।
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हालांकि पालिका प्रशासन का दावा है कि एक सप्ताह के अंदर शहर के दो वार्ड में फीडिंग प्वाइंटर को शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, शेल्टर होम बनाने के लिए सदर एसडीएम के लिए पत्राचार किया जाएगा, ताकि नगर पालिका क्षेत्र के बाहर कहीं पर इसको बनाया जा सके हैं।


पालिका की यह है योजना

नगर पालिका प्रशासन के मुताबिक, शहर में दो वार्ड में पहले सार्वजनिक भोजन स्थल (फीडिंग प्वाइंट) बनाया जाएगा। जो किसी ओवरहेड टैंक के पास बनेगा। यहां पर आवारा कुत्तों के खाने की व्यवस्था की जाएगी ताकि शहर की गालियों और सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों को एक जगह पर रखा जा सके। वहीं दूसरी ओर शेल्टर होम बनाया जाएगा, जिसमें इन आवारा कुत्तों को रखा जाएगा।


आवारा कुत्तों के लिए सार्वजनिक भोजन स्थल (फीडिंग प्वाइंट) बनाए जाने की योजना है। इसके लिए वार्ड में जगह चिह्नित की जा रही है। जल्द ही इसको शुरू किया जाएगा। -विजय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ

एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए लगती है लंबी लाइन
बदायूं। जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि हर दिन औसतन 180 लोग कुत्तों, बिल्लियों या बंदरों के काटने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। हर माह करीब 5500 लोग एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट जाती है। अस्पताल कर्मियों के मुताबिक, सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि दातागंज, सहसवान, उझानी, बिसौली और उसावां जैसे इलाकों से भी मरीज यहां पहुंचते हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 150 से 200 लोगों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एंटी रैबीज इंजेक्शन की पर्याप्त मात्रा है, हालांकि मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग को भी चिंतित कर दिया है। उनका कहना कि इतनी बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। जो कुत्तों के रवैये की आक्रामकता को दर्शा रहा है। सीएमएस डॉ. अमित कुमार वार्ष्णेय ने प्रतिदिन 150 से 200 मरीजों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जा रहा है। संवाद

कुत्ता कटाने पर यह करें प्राथमिक उपाय
- सबसे पहले घबराएं नहीं। शांत होकर घाव को चेक करें। देखें कि घाव कितना गहरा है और खून कितना बह रहा है। अगर घाव गहरा है और खून तेजी से बह रहा है, तो उसे रोकना जरूरी है।

- घाव को कम से कम 15 मिनट तक बहते हुए ठंडे पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं। घाव को रगड़ें नहीं, बल्कि हल्के हाथों से बहते पानी के नीचे धोएं। इससे लार और गंदगी निकल जाएगी और इन्फेक्शन का खतरा कम होगा।

- घाव धोने के बाद, एक साफ कपड़े या पट्टी (गेज) से हल्का दबाव डालकर खून बहना बंद करें।
- एक स्टरलाइज पट्टी या साफ कपड़े से घाव को ढक दें। इससे बाहरी कीटाणुओं से बचाव होगा।
- कुत्ते के काटने के बाद डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा जरूरी है, भले ही घाव छोटा ही क्यों न हो।

- अगर कुत्ता पालतू और पहचान का है, तो उस पर 10-15 दिनों तक नजर रखें। अगर उसमें कोई अजीब व्यवहार (जैसे पानी से डरना, ज्यादा लार आना, आक्रामक होना) दिखे या वह मर जाए, तो तुरंत डॉक्टर को सूचित करें। इससे रेबीज का पता लगाने में मदद मिलती है।
- घाव पर हल्दी, मिट्टी, या कोई भी अन्य चीज न लगाएं। इससे इन्फेक्शन बढ़ सकता है।
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