{"_id":"6a651675c3b5efb376066a2a","slug":"the-pang-of-the-village-not-being-named-after-the-martyr-lingers-to-this-day-badaun-news-c-123-1-ba11032-169352-2026-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: गांव का नाम शहीद के नाम से न होने की टीस आज भी है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: गांव का नाम शहीद के नाम से न होने की टीस आज भी है
विज्ञापन
शहीद हरिओम सिंह के फोटो के साथ पत्नी गुड्डो देवी व पुत्र कुंवर प्रताप सिंह। संवाद
बदायूं। ऑपरेशन विजय में शहीद होने वाले हरिओम सिंह के परिवार को गांव का नाम शहीद के नाम पर न रखे जाने से 26 साल से टीस है। शनिवार को शहीद के बेटे कुंवर प्रताप सिंह ने बताया कि पिता की शहादत पर सरकार ने कई वादे किए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भी गांव पहुंचकर गांव का नाम हरिओम सिंह नगर करने की घोषणा की थी, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। अगर 26वें कारगिल दिवस पर गांव का नाम उनके पिता के नाम पर किया जाए तो यह उनके पिता के लिए सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।
कारगिल के शहीदों में बदायूं जिले से इकलौते सैनिक वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव इटौआ निवासी लांस नायक हरिओम सिंह शामिल हैं। वह 9 पैरा रेजीमेंट के कमांडो थे। उनकी पत्नी गुड्डो देवी बताती हैं उन्होंने ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन पवन के बाद ऑपरेशन विजय उनका अंतिम युद्ध था। 1 जुलाई 1999 को कारगिल में वह शहीद हो गए। शहादत की खबर 4 जुलाई को घर पहुंची। उस समय बेटा प्रताप 5 साल का भी नहीं था और बेटी गर्भ में थी।
शहादत के बाद सरकार की ओर से पेट्रोल पंप और रहने के लिए मकान दिया गया। अब बेटा कुंवर प्रताप सिंह व्यापार संभालता है। बेटे की आठ फरवरी को बरेली की ओसीन सिंह से शादी हो चुकी है। वहीं बेटी सुप्रिया दिल्ली में सिविल सर्विस की तैयारी कर रही हैं। गुड्डो देवी वर्तमान में वजीरगंज की ब्लॉक प्रमुख हैं।
विज्ञापन
उनके बेटे प्रताप का कहना है उन्हें अपने पिता पर गर्व है, उन्होंने देश के लिए प्राण दे दिए। बेटे के अनुसार, वह 1 जुलाई को पिता को श्रद्धांजलि देते हैं, वहीं कारगिल दिवस पर स्मारक पर कार्यक्रम करते हैं। वहीं पिता की जयंती पर 20 अगस्त को भव्य कार्यक्रम करते हैं।
विज्ञापन
कारगिल के शहीदों में बदायूं जिले से इकलौते सैनिक वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव इटौआ निवासी लांस नायक हरिओम सिंह शामिल हैं। वह 9 पैरा रेजीमेंट के कमांडो थे। उनकी पत्नी गुड्डो देवी बताती हैं उन्होंने ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन पवन के बाद ऑपरेशन विजय उनका अंतिम युद्ध था। 1 जुलाई 1999 को कारगिल में वह शहीद हो गए। शहादत की खबर 4 जुलाई को घर पहुंची। उस समय बेटा प्रताप 5 साल का भी नहीं था और बेटी गर्भ में थी।
विज्ञापन
शहादत के बाद सरकार की ओर से पेट्रोल पंप और रहने के लिए मकान दिया गया। अब बेटा कुंवर प्रताप सिंह व्यापार संभालता है। बेटे की आठ फरवरी को बरेली की ओसीन सिंह से शादी हो चुकी है। वहीं बेटी सुप्रिया दिल्ली में सिविल सर्विस की तैयारी कर रही हैं। गुड्डो देवी वर्तमान में वजीरगंज की ब्लॉक प्रमुख हैं।
विज्ञापन
उनके बेटे प्रताप का कहना है उन्हें अपने पिता पर गर्व है, उन्होंने देश के लिए प्राण दे दिए। बेटे के अनुसार, वह 1 जुलाई को पिता को श्रद्धांजलि देते हैं, वहीं कारगिल दिवस पर स्मारक पर कार्यक्रम करते हैं। वहीं पिता की जयंती पर 20 अगस्त को भव्य कार्यक्रम करते हैं।