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Budaun News: अमरोहा और संभल जिले के बदमाशों ने किया था बालक का अपहरण
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बालक संजय अपने मामा के साथ। संवाद
बदायूं। जरीफनगर थाना क्षेत्र के समसपुर मलिकपुर फत्ता निवासी किसान महाराम के बेटे संजय (5) का अपहरण करने वाले बदमाश अमरोहा और संभल जिले के निकले। उन्होंने बेचने के लिए से बालक का अपहरण किया था और उसका तीन लाख रुपये में सौदा कर रहे थे। हालांकि खरीदार दो लाख रुपये दे रहा था। इससे सौदा तय नहीं हो पा रहा था। तब तक सीसीटीवी कैमरे खंगालते हुए गुन्नौर, अनूपशहर और बुलंदशहर होते पुलिस अमरोहा पहुंच गई। अमरोहा के डिडौली थाना क्षेत्र के गांव इकौंधा से शनिवार तड़के बालक संजय को बरामद कर लिया गया। मौके से संभल जिले के बहजोई थाना क्षेत्र के गांव सिराजपुर निवासी नेत्रपाल पकड़ा गया है, जबकि मुख्य आरोपी अमरोहा के इकौंधा गांव निवासी राहुल की तलाश की जा रही है।
एसएसपी आलोक प्रियदर्शी ने शनिवार दोपहर इसका खुलासा करते हुए बताया कि 26 जून को जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव समसपुर मलिकपुर फत्ता निवासी संजय पुत्र महाराम का दिनदहाड़े अपहरण कर लिया गया था। बालक संजय अपने बड़े भाइयों और मोहल्ले के बच्चों के साथ धान की पौध देखने खेत पर गया था। वह दोपहर करीब दो बजे गांव के नजदीक पुल पर खेल रहे थे। उसी दौरान पुल से गुजर रहे बाइक सवार बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया था।
बदमाशों ने उसके भाई और मोहल्ले के बच्चों को बहाने से परचून की दुकान पर भेज दिया था। जब तक वह लौटकर पुल पर पहुंचे तब तक बदमाश संजय को लेकर जा चुके थे। उनकी तलाश में चार थानों की सात टीमें लगाई गईं थीं। इस पर एसओजी टीम भी काम कर रही थी। एसओ रविकरन सिंह और एसओजी प्रभारी नीरज सिंह, धर्वेंद्र कुमार सीसीटीवी कैमरे खंगालते हुए गुन्नौर, नरौरा, राजघाट, कर्णवास, अनूपशहर और बुलंदशहर जिले के ऊंचागांव, नरसेना होते हुए स्याना चौकी क्षेत्र में पहुंच गए।
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वहां के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पता चला कि बालक का अपहरण अमरोहा जिले के डिडौली थाना क्षेत्र के गांव इकौंधा निवासी राहुल सैनी पुत्र देवराज सैनी ने किया था। इससे पुलिस ने शनिवार तड़के इकौंधा गांव में उसके घर पर दबिश दी, जहां से बालक बरामद हो गया। राहुल के घर से संभल जिले के बहजोई थाना क्षेत्र के गांव सिराजपुर निवासी नेत्रपाल पुत्र हरपाल यादव को गिरफ्तार कर लिया गया।
उसे थाने लाकर पूछताछ की गई थी तो नेत्रपाल ने बताया कि उन्होंने बालक का अपहरण बेचने के उद्देश्य से किया था। राहुल, किसी व्यक्ति से तीन लाख रुपये में उसका सौदा कर रहा था, जबकि खरीदार दो लाख रुपये ही देने को तैयार था। जब दबिश पड़ी तब वह किसी से बालक का सौदा करने ही गया था। इसलिए वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा।
आरोपी नेत्रपाल ने बताया कि राहुल ही मुख्य आरोपी है। थाना पुलिस ने दोनों अपहरणकर्ताओं को नामजद करते हुए गिरफ्तार नेत्रपाल को शनिवार दोपहर बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस अपहरणकांड का खुलासा करने वाली टीम को एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम दिया है। इस खुलासे के दौरान एसपी देहात राममोहन सिंह, सीओ सहसवान कर्मवीर सिंह और एसओ रविकरण सिंह मौजूद रहे।
ऐसे बरामद हुआ बालक संजय
संजय का 26 जून को अपहरण हुआ था। पुलिस ने जरीफनगर से लेकर गुन्नौर 27 जून तक सीसीटीवी कैमरे खंगाले। 28 जून की शाम तक पुलिस बुलंदशहर जिले के अनूपशहर होते हुए ऊंचागांव और स्याना तक पहुंच गई। स्याना चौकी क्षेत्र में सीसीटीवी फुटेज खंगालने के दौरान राहुल की बाइक का नंबर दिखाई दिया। प्लेटिना बाइक राहुल के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पुलिस ने बाइक नंबर के आधार पर राहुल का नाम और पता निकाल लिया। उसका पता अमरोहा जिले के डिडौली थाना क्षेत्र के गांव इकौंधा का निकला। इसके बाद पुलिस उसके घर तक पहुंच गई और बालक को सकुशल बरामद कर लिया गया।
250 सीसीटीवी कैमरे खंगाले तो मिला सुराग
बालक को ढूंढने में सीसीटीवी कैमरों से काफी मदद मिली। अगर जरीफनगर इलाके से बुलंदशहर तक सीसीटीवी कैमरे न लगे होते तो शायद बालक को ढूंढना मुश्किल हो जाता। पुलिस टीम ने बुलंदशहर जिले तक करीब 250 कैमरे खंगाले। दो जगह कैमरों में बाइक का नंबर दिखाई दिया। यही सुबूत पुलिस के लिए काफी था।
नशेड़ी प्रवृत्ति का है मुख्य आरोपी राहुल सैनी
अमरोहा जिले के डिडौली थाना क्षेत्र के गांव इकौंधा निवासी राहुल सैनी नशेड़ी प्रवृत्ति का है। उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। उसकी दो शादियां हुईं थीं। दोनों ही उसके नशे की वजह से टूट गईं। राहुल अक्सर बाइक लेकर निकलता था और काफी दूर-दूर चला जाता था। जहां भी उसे कोई चीज हाथ लगती तो वह उसे लेकर निकल जाता था। 26 जून को भी ऐसा ही हुआ। खरीदारों के हिसाब से बालक संजय भी उसे अचानक मिल गया। उसने प्लान बनाकर अन्य बच्चों को गांव भेज दिया।
बालक समझता रहा घूमने आया हूं और खा-पीकर लौट जाऊंगा
- मां से बोला संजय- अपहरणकर्ताओं ने सब्जी से खिलाई रोटी, लेकिन चाय नहीं पिलाई
उमेश राठौर
बदायूं। जरीफनगर इलाके में जिस बालक के अपहरण से उसके परिवार वालों का खाना-पीना और उठना बैठना तक मुहाल हो गया। उसी बालक संजय को यह तक पता नहीं चला कि उसका अपहरण किया गया है और उसे बेचने का सौदा किया जा रहा है। वह तो यही समझता रहा कि वह इधर घूमने आया है। एक-दो दिन इधर घूमेगा, खाएगा-पीएगा और अपने घर लौट जाएगा। वह अपनी मां से शिकायत भी कर रहा था कि बाइक वाले चाचा ने सब्जी से रोटी तो खिलाई, लेकिन उसे चाय नहीं पिलाई।
संजय की मां ममता कहती हैं कि उन्हें कभी आभास ही नहीं था कि कभी उनके बच्चे का अपहरण हो जाएगा। उनके बच्चे तो रोजाना खेतों पर घूमने चले जाते हैं। वह गांव में हर जगह खेलते हैं। यह केवल उनके बच्चों की बात नहीं है। उनके गांव के अधिकतर बच्चे निडर होकर खेलते हैं। 26 जून को संजय बिना चप्पल, एक नेकर और एक बनियान पहनकर खेत पर चला गया था। उसके हाथ-पैरों पर मिट्टी लगी थी। बदमाश केवल उम्र देखकर ही उसका अपहरण कर ले गए थे। वह उसको बेचना चाहते थे, लेकिन जब उनके मुताबिक रुपये नहीं मिले तो वह कामयाब नहीं हो पाए।
शनिवार सुबह जब थाना पुलिस उसे लेकर अमरोहा से आई तो उस समय भी बालक बनियान और नेकर ही पहने था। यह देखकर एसओ रविकरन सिंह ने उसे चप्पल, नेकर और एक टी-शर्ट दिलाई। नए कपड़े पहनकर संजय काफी खुश हुआ। सुबह वह अपनी मां से मिला तो रोया नहीं। मां ने पूछा कि बेटा तुम्हें किसी ने मारा तो नहीं तो बालक बाेला कि उसे किसी ने नहीं मारा।
बोला, बाइक वाले चाचा उसे कचरी खिलाते हुए ले गए थे। अपने घर ले जाकर उन्होंने सब्जी से रोटी खिलाई, लेकिन चाय नहीं पिलाई। संजय सुबह और दोपहर बाद अपने घर पर चाय पीता था। इसलिए उसे चाय याद रही। उसे किसी प्रकार का अहसास ही नहीं हुआ कि उसका अपहरण करके ले जाया गया था। वह समझ रहा था कि घूमने जा रहा है।
चार घंटे के सफर में सूज गए थे बालक के पैर
अपहरणकर्ता बालक को बाइक के बीच में बैठाकर अमरोहा ले गए थे। बाइक पर लटकाए-लटकाए उसके पैर सूज गए थे। शनिवार तक सूजन बनी रही। बृहस्पतिवार और शुक्रवार तक सूजन काफी ज्यादा थी। रात को आराम करने पर पैरों की कुछ सूजन कम हुई थी।
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एसएसपी आलोक प्रियदर्शी ने शनिवार दोपहर इसका खुलासा करते हुए बताया कि 26 जून को जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव समसपुर मलिकपुर फत्ता निवासी संजय पुत्र महाराम का दिनदहाड़े अपहरण कर लिया गया था। बालक संजय अपने बड़े भाइयों और मोहल्ले के बच्चों के साथ धान की पौध देखने खेत पर गया था। वह दोपहर करीब दो बजे गांव के नजदीक पुल पर खेल रहे थे। उसी दौरान पुल से गुजर रहे बाइक सवार बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया था।
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बदमाशों ने उसके भाई और मोहल्ले के बच्चों को बहाने से परचून की दुकान पर भेज दिया था। जब तक वह लौटकर पुल पर पहुंचे तब तक बदमाश संजय को लेकर जा चुके थे। उनकी तलाश में चार थानों की सात टीमें लगाई गईं थीं। इस पर एसओजी टीम भी काम कर रही थी। एसओ रविकरन सिंह और एसओजी प्रभारी नीरज सिंह, धर्वेंद्र कुमार सीसीटीवी कैमरे खंगालते हुए गुन्नौर, नरौरा, राजघाट, कर्णवास, अनूपशहर और बुलंदशहर जिले के ऊंचागांव, नरसेना होते हुए स्याना चौकी क्षेत्र में पहुंच गए।
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वहां के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पता चला कि बालक का अपहरण अमरोहा जिले के डिडौली थाना क्षेत्र के गांव इकौंधा निवासी राहुल सैनी पुत्र देवराज सैनी ने किया था। इससे पुलिस ने शनिवार तड़के इकौंधा गांव में उसके घर पर दबिश दी, जहां से बालक बरामद हो गया। राहुल के घर से संभल जिले के बहजोई थाना क्षेत्र के गांव सिराजपुर निवासी नेत्रपाल पुत्र हरपाल यादव को गिरफ्तार कर लिया गया।
उसे थाने लाकर पूछताछ की गई थी तो नेत्रपाल ने बताया कि उन्होंने बालक का अपहरण बेचने के उद्देश्य से किया था। राहुल, किसी व्यक्ति से तीन लाख रुपये में उसका सौदा कर रहा था, जबकि खरीदार दो लाख रुपये ही देने को तैयार था। जब दबिश पड़ी तब वह किसी से बालक का सौदा करने ही गया था। इसलिए वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा।
आरोपी नेत्रपाल ने बताया कि राहुल ही मुख्य आरोपी है। थाना पुलिस ने दोनों अपहरणकर्ताओं को नामजद करते हुए गिरफ्तार नेत्रपाल को शनिवार दोपहर बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस अपहरणकांड का खुलासा करने वाली टीम को एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम दिया है। इस खुलासे के दौरान एसपी देहात राममोहन सिंह, सीओ सहसवान कर्मवीर सिंह और एसओ रविकरण सिंह मौजूद रहे।
ऐसे बरामद हुआ बालक संजय
संजय का 26 जून को अपहरण हुआ था। पुलिस ने जरीफनगर से लेकर गुन्नौर 27 जून तक सीसीटीवी कैमरे खंगाले। 28 जून की शाम तक पुलिस बुलंदशहर जिले के अनूपशहर होते हुए ऊंचागांव और स्याना तक पहुंच गई। स्याना चौकी क्षेत्र में सीसीटीवी फुटेज खंगालने के दौरान राहुल की बाइक का नंबर दिखाई दिया। प्लेटिना बाइक राहुल के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पुलिस ने बाइक नंबर के आधार पर राहुल का नाम और पता निकाल लिया। उसका पता अमरोहा जिले के डिडौली थाना क्षेत्र के गांव इकौंधा का निकला। इसके बाद पुलिस उसके घर तक पहुंच गई और बालक को सकुशल बरामद कर लिया गया।
250 सीसीटीवी कैमरे खंगाले तो मिला सुराग
बालक को ढूंढने में सीसीटीवी कैमरों से काफी मदद मिली। अगर जरीफनगर इलाके से बुलंदशहर तक सीसीटीवी कैमरे न लगे होते तो शायद बालक को ढूंढना मुश्किल हो जाता। पुलिस टीम ने बुलंदशहर जिले तक करीब 250 कैमरे खंगाले। दो जगह कैमरों में बाइक का नंबर दिखाई दिया। यही सुबूत पुलिस के लिए काफी था।
नशेड़ी प्रवृत्ति का है मुख्य आरोपी राहुल सैनी
अमरोहा जिले के डिडौली थाना क्षेत्र के गांव इकौंधा निवासी राहुल सैनी नशेड़ी प्रवृत्ति का है। उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। उसकी दो शादियां हुईं थीं। दोनों ही उसके नशे की वजह से टूट गईं। राहुल अक्सर बाइक लेकर निकलता था और काफी दूर-दूर चला जाता था। जहां भी उसे कोई चीज हाथ लगती तो वह उसे लेकर निकल जाता था। 26 जून को भी ऐसा ही हुआ। खरीदारों के हिसाब से बालक संजय भी उसे अचानक मिल गया। उसने प्लान बनाकर अन्य बच्चों को गांव भेज दिया।
बालक समझता रहा घूमने आया हूं और खा-पीकर लौट जाऊंगा
- मां से बोला संजय- अपहरणकर्ताओं ने सब्जी से खिलाई रोटी, लेकिन चाय नहीं पिलाई
उमेश राठौर
बदायूं। जरीफनगर इलाके में जिस बालक के अपहरण से उसके परिवार वालों का खाना-पीना और उठना बैठना तक मुहाल हो गया। उसी बालक संजय को यह तक पता नहीं चला कि उसका अपहरण किया गया है और उसे बेचने का सौदा किया जा रहा है। वह तो यही समझता रहा कि वह इधर घूमने आया है। एक-दो दिन इधर घूमेगा, खाएगा-पीएगा और अपने घर लौट जाएगा। वह अपनी मां से शिकायत भी कर रहा था कि बाइक वाले चाचा ने सब्जी से रोटी तो खिलाई, लेकिन उसे चाय नहीं पिलाई।
संजय की मां ममता कहती हैं कि उन्हें कभी आभास ही नहीं था कि कभी उनके बच्चे का अपहरण हो जाएगा। उनके बच्चे तो रोजाना खेतों पर घूमने चले जाते हैं। वह गांव में हर जगह खेलते हैं। यह केवल उनके बच्चों की बात नहीं है। उनके गांव के अधिकतर बच्चे निडर होकर खेलते हैं। 26 जून को संजय बिना चप्पल, एक नेकर और एक बनियान पहनकर खेत पर चला गया था। उसके हाथ-पैरों पर मिट्टी लगी थी। बदमाश केवल उम्र देखकर ही उसका अपहरण कर ले गए थे। वह उसको बेचना चाहते थे, लेकिन जब उनके मुताबिक रुपये नहीं मिले तो वह कामयाब नहीं हो पाए।
शनिवार सुबह जब थाना पुलिस उसे लेकर अमरोहा से आई तो उस समय भी बालक बनियान और नेकर ही पहने था। यह देखकर एसओ रविकरन सिंह ने उसे चप्पल, नेकर और एक टी-शर्ट दिलाई। नए कपड़े पहनकर संजय काफी खुश हुआ। सुबह वह अपनी मां से मिला तो रोया नहीं। मां ने पूछा कि बेटा तुम्हें किसी ने मारा तो नहीं तो बालक बाेला कि उसे किसी ने नहीं मारा।
बोला, बाइक वाले चाचा उसे कचरी खिलाते हुए ले गए थे। अपने घर ले जाकर उन्होंने सब्जी से रोटी खिलाई, लेकिन चाय नहीं पिलाई। संजय सुबह और दोपहर बाद अपने घर पर चाय पीता था। इसलिए उसे चाय याद रही। उसे किसी प्रकार का अहसास ही नहीं हुआ कि उसका अपहरण करके ले जाया गया था। वह समझ रहा था कि घूमने जा रहा है।
चार घंटे के सफर में सूज गए थे बालक के पैर
अपहरणकर्ता बालक को बाइक के बीच में बैठाकर अमरोहा ले गए थे। बाइक पर लटकाए-लटकाए उसके पैर सूज गए थे। शनिवार तक सूजन बनी रही। बृहस्पतिवार और शुक्रवार तक सूजन काफी ज्यादा थी। रात को आराम करने पर पैरों की कुछ सूजन कम हुई थी।