{"_id":"67ae2c646aebcab5ee045495","slug":"the-existence-of-sot-river-is-in-danger-due-to-encroachment-badaun-news-c-123-1-bdn1008-134256-2025-02-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: कब्जों से सोत नदी के अस्तित्व पर ही संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: कब्जों से सोत नदी के अस्तित्व पर ही संकट
विज्ञापन
शहर के लालपुल स्थित सोत नदी। संवाद
- फोटो : एक दूसरे से गले मिलकर मेला से विदा लेतीं कल्पवासी महिलाएं।
बदायूं। शहर के लालपुल से होकर गुजर रही सोत नदी कब्जे की गिरफ्त में है। माफिया जलधारा बहाव क्षेत्र की जमीन पर कब्जा कर प्लाटिंग और निर्माण कार्य करा रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने दुकान आदि बनाकर भी कब्जा किया हुआ है। सिटी मजिस्ट्रेट अब इन कब्जा धारकों का पता लगा रहे हैं। उनका कहना है कि कब्जे ध्वस्त कराकर जल्द ही नदी का बहाव क्षेत्र साफ कराया जाएगा।
जिले में अधिकांश स्थानों पर सोत नदी का अस्तित्व खतरे में है। सोत नदी जिले में 105 किलोमीटर के दायरे में गुजरती है। बिसौली, बिल्सी, सदर और दातागंज तहसील क्षेत्र से होकर नदी की धारा उसावां के नौलीफतुआबाद गांव पहुंचती है।
सोत नदी शहर में लालपुल क्षेत्र से होकर गुजर रही है। यहां सोत नदी के क्षेत्र में जगह-जगह अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। लालपुल पार करते ही एक दर्जन से ज्यादा होटल, ढाबे व फर्नीचर आदि की दुकानें हैं। आगे दुकान पीछे बाउंड्री कराकर नदी की जमीन पर कब्जे का खेल चल रहा है। वॉटर पार्क, मैरिज हॉल और बीज की दुकानों की आड़ में सोत नदी की जमीन कब्जा ली गई।
विज्ञापन
चार साल पहले जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई थी। यहां अवैध निर्माण ध्वस्त कराए गए थे। इसके बाद अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह है कि अब फिर से अवैध कब्जों की शुरुआत हो गई है।
2020 के बाद से नहीं चला अभियान
जिला प्रशासन ने लालपुल के पास तीन दिन पहले एक मैरिज लॉन के निर्माण को ध्वस्त कराया था। बता दें कि लालपुल के पास सोत नदी पर कब्जे 2020 में हटवाए गए थे। तब प्रशासन ने यहां जेसीबी चलवाई थी। इस दौरान पांच-छह बड़े कब्जे सामने आए थे। इसके बाद कार्रवाई हुई है। यहां मैरिज हॉल के पास में ही वाटर पार्क बनाया गया था। मैरिज हॉल व वाटर पार्क भी सोत नदी की जमीन पर बनाए जाने की चर्चा है।
तीन दिन पूर्व जेसीबी से हटवाया कब्जा
एक सप्ताह पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने सोत नदी का निरीक्षण किया था। वह अपने साथ राजस्व विभाग की टीम को भी लेकर गए थे। यहां उन्होंने अवैध कब्जे देखे। तीन दिन पहले उन्होंने जेसीबी ले जाकर कब्जा हटाया। मैरिज हॉल की बाउंड्री भी तुड़वा दी। बताते हैं कि यहां पूर्व में भी कब्जा हुआ था, जिसका ध्वस्तीकरण किया गया था। एक बार फिर वहीं पर कब्जा कर लिया गया।
अवैध कब्जा और कूड़ा कचरे से प्राकृतिक जलस्रोत भी बंद
लोगों का कहना है कि करीब 20 साल पहले सोत नदी के जलस्रोत खुले थे। नदी में तेज बहाव के साथ जलधारा बहती थी, लेकिन 10-15 साल पूर्व सोत नदी पर अवैध कब्जे कर लिए गए। इसके अलावा कूड़ा-कचरा डालकर नदी को पाट दिया गया। इससे अब उसके अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। साथ ही नदी के जलस्रोत भी बंद हो गए हैं। यही कारण है कि सोत नदी अब यहां नाले का रूप ले चुकी है।
एक-एक कब्जा हटवाया जाएगा : सिटी मजिस्ट्रेट
हाल ही में आए सिटी मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने खुद जाकर सोत नदी का हाल देखा था। एक कब्जे को जेसीबी से हटवाया गया है। कुछ और जगह भी देखी गईं हैं। सोत नदी की जमीन पर कब्जे का एक मामला कोर्ट में चल रहा है। उसे भी देखा जा रहा है। नदी की जमीन से एक-एक कब्जा हटवाया जाएगा।
विज्ञापन
जिले में अधिकांश स्थानों पर सोत नदी का अस्तित्व खतरे में है। सोत नदी जिले में 105 किलोमीटर के दायरे में गुजरती है। बिसौली, बिल्सी, सदर और दातागंज तहसील क्षेत्र से होकर नदी की धारा उसावां के नौलीफतुआबाद गांव पहुंचती है।
विज्ञापन
सोत नदी शहर में लालपुल क्षेत्र से होकर गुजर रही है। यहां सोत नदी के क्षेत्र में जगह-जगह अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। लालपुल पार करते ही एक दर्जन से ज्यादा होटल, ढाबे व फर्नीचर आदि की दुकानें हैं। आगे दुकान पीछे बाउंड्री कराकर नदी की जमीन पर कब्जे का खेल चल रहा है। वॉटर पार्क, मैरिज हॉल और बीज की दुकानों की आड़ में सोत नदी की जमीन कब्जा ली गई।
विज्ञापन
चार साल पहले जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई थी। यहां अवैध निर्माण ध्वस्त कराए गए थे। इसके बाद अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह है कि अब फिर से अवैध कब्जों की शुरुआत हो गई है।
2020 के बाद से नहीं चला अभियान
जिला प्रशासन ने लालपुल के पास तीन दिन पहले एक मैरिज लॉन के निर्माण को ध्वस्त कराया था। बता दें कि लालपुल के पास सोत नदी पर कब्जे 2020 में हटवाए गए थे। तब प्रशासन ने यहां जेसीबी चलवाई थी। इस दौरान पांच-छह बड़े कब्जे सामने आए थे। इसके बाद कार्रवाई हुई है। यहां मैरिज हॉल के पास में ही वाटर पार्क बनाया गया था। मैरिज हॉल व वाटर पार्क भी सोत नदी की जमीन पर बनाए जाने की चर्चा है।
तीन दिन पूर्व जेसीबी से हटवाया कब्जा
एक सप्ताह पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने सोत नदी का निरीक्षण किया था। वह अपने साथ राजस्व विभाग की टीम को भी लेकर गए थे। यहां उन्होंने अवैध कब्जे देखे। तीन दिन पहले उन्होंने जेसीबी ले जाकर कब्जा हटाया। मैरिज हॉल की बाउंड्री भी तुड़वा दी। बताते हैं कि यहां पूर्व में भी कब्जा हुआ था, जिसका ध्वस्तीकरण किया गया था। एक बार फिर वहीं पर कब्जा कर लिया गया।
अवैध कब्जा और कूड़ा कचरे से प्राकृतिक जलस्रोत भी बंद
लोगों का कहना है कि करीब 20 साल पहले सोत नदी के जलस्रोत खुले थे। नदी में तेज बहाव के साथ जलधारा बहती थी, लेकिन 10-15 साल पूर्व सोत नदी पर अवैध कब्जे कर लिए गए। इसके अलावा कूड़ा-कचरा डालकर नदी को पाट दिया गया। इससे अब उसके अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। साथ ही नदी के जलस्रोत भी बंद हो गए हैं। यही कारण है कि सोत नदी अब यहां नाले का रूप ले चुकी है।
एक-एक कब्जा हटवाया जाएगा : सिटी मजिस्ट्रेट
हाल ही में आए सिटी मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने खुद जाकर सोत नदी का हाल देखा था। एक कब्जे को जेसीबी से हटवाया गया है। कुछ और जगह भी देखी गईं हैं। सोत नदी की जमीन पर कब्जे का एक मामला कोर्ट में चल रहा है। उसे भी देखा जा रहा है। नदी की जमीन से एक-एक कब्जा हटवाया जाएगा।