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Budaun News: समितियों पर जेनेरिक दवाएं मिलने का अधूरा रहा सपना

Sun, 23 Jun 2024 01:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jun 2024 01:35 AM IST
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The dream of getting generic medicines from committees remained unfulfilled
सहकारी समिति दहगवां की बि​ल्डिंग। संवाद
बदायूं। साधन सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीणों को सस्ते दर पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जानी थी। पांच समितियों ने आवेदन किया था। दो समितियों के लिए सहकारिता विभाग से स्वीकृति भी मिल गई थी। इसके बाद दोनों समितियों की ओर से दवा बिक्री के लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। आवेदन के नौ माह बाद भी ड्रग लाइसेंस जारी नहीं हो सके हैं।
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जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को जेनेरिक दवाएं दिलाने का सपना सहकारिता विभाग ने दिखाया था। जिले से पांच समितियों का चयन किया गया। यहां पर जेनेरिक दवाएं मिलनी थीं, पर विभाग का दावा हवा हवाई साबित हुआ। ऐसे में लोगों को ब्रांडेड कंपनियों की महंगी दवाएं खरीदना पड़ रही हैं।
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अधिकारियों के अनुसार, प्रथम चरण में बिनावर, दहगवां, म्याऊ, कटिया अलीगंज और जहांगीराबाद में समिति ने आवेदन किया था। शासन ने अक्तूबर 2023 में कटिया अलीगंज और जहांगीराबाद में जन औषधि केंद्र संचालित करने की अनुमति दी थी। उसके बाद सहकारिता विभाग ने निवेश पोर्टल पर लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया, लेकिन आज तक उनको लाइसेंस नहीं मिल सका है। इसको लेकर विभाग ने पत्राचार किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हो सका। (संवाद)
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क्यों सस्ती होती हैं जेनेरिक दवाएं
पेटेंट ब्रांडेड दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं। दरअसल, रिसर्च, डेवलपमेंट, मार्केटिंग, प्रचार और ब्रांडिंग पर बड़ी लागत आती है। जेनेरिक दवाओं की कीमत को निर्धारित करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप होता है। जेनेरिक दवाइयों की कीमत सरकार के हस्तक्षेप से तय की जाती हैं। इन दवाओं के प्रचार पर कुछ खर्च नहीं किया जाता है।

क्या होती है जेनेरिक दवा
किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम तरह की रिसर्च और स्ट्डी के बाद एक रसायन (सॉल्ट) तैयार किया जाता है। इसे आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए दवा की शक्ल दे दी जाती है। इस सॉल्ट को हर कंपनी अलग-अलग नाम से बेचती है। साल्ट का जेनेरिक नाम सॉल्ट के कंपोजिशन और बीमारी का ध्यान रखते हुए एक विशेष समिति द्वारा तय किया जाता है। किसी भी सॉल्ट का जेनेरिक नाम पूरी दुनिया में एक ही रहता है।


जिले से पांच समितियों के नाम चयन कर शासन को भेजे गए थे। इनकी पूरी प्रक्रिया की गई, लेकिन दो समितियों को ही स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन आज तक लाइसेंस नहीं मिल सका। इसको लेकर पत्राचार किया गया है। - महेंद्र सिंह, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक
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