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Budaun News: प्रशासनिक अक्षमता और राजनीतिक दबंगई का परिणाम था दोहरा हत्याकांड
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बदायूं। पुलिस-प्रशासन के अफसरों की राजशाही जैसी कार्यशैली और अपराधी की राजनीतिक संरक्षण वाली सोच का परिणाम पेट्रोलियम कंपनी के दो अधिकारियों की हत्या के रूप में सामने आया है। दबंगों की सोच को भांप कंपनी के अधिकारी जिला मुख्यालय पर अफसरों और थाने के चक्कर काटते रहे, लेकिन एक आम फरियादी की तरह उन्हें भी केवल आश्वासनों की घुट्टी दी जाती रही।
एचपीसीएल के डीजीएम सुधीर गुप्ता की ओर से 14 जनवरी को डीएम से मिलकर जो शिकायत दी गई, उसमें उन्होंने एसडीएम और सीओ को जांच कर आख्या तलब की थी। साथ ही एसएसपी को दी गई शिकायत की जांच इसी तर्ज पर थाना प्रभारी मूसाझाग को दी थी। जाहिर है कि एक ओर जहां शासन की ओर से उद्योगों को प्रोत्साहन और भयमुक्त माहौल देने के लिए तमाम समिट कराई जा रही हैं, मुख्यमंत्री विदेशों में जाकर उद्यमियों को प्रदेश में निवेश का निमंत्रण दे रहे हैं, वहीं दबंगों की हठधर्मिता के खिलाफ इस तरह की शिकायत को भी बेहद हल्के में लिया गया। इन शिकायतों और इन पर हो रही जांच व कार्रवाई का फीडबैक लेने की जहमत भी अफसरों ने नहीं उठाई जिसका नतीजा दोहरे हत्याकांड के रूप में सामने आया।
वहीं, नेताओं के इशारे पर थानों में तैनाती देने व सुस्त कार्यशैली के लिए चर्चित रहे तत्कालीन एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने इससे भी आगे बढ़कर कारनामा कर दिखाया। सूत्र बताते हैं कि सीओ उझानी रहे देवेंद्र कुमार ने जब उन्हें इंस्पेक्टर मूसाझाग अजय कुमार की लचर कार्यशैली का जिक्र कर उन्हें हटाने की संस्तुति वाली जांच रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी तो उन्होंने तत्काल ही कोई निर्णय नहीं लिया।
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उन्होंने न तो इंस्पेक्टर पर कोई कार्रवाई की और न ही कंपनी अधिकारियों को सुरक्षा देने का ही कोई इंतजाम किया। इसकी बजाय उन्होंने सीओ की जांच रिपोर्ट का परीक्षण कराने का फैसला ले लिया। करीब महीने भर से दौड़ रहे कंपनी अधिकारियों की गतिविधियों पर अजय प्रताप सिंह नजर रख रहा था। वह भी भांप चुका था कि उसके राजनीतिक संरक्षणदाताओं के मुुकाबले अफसरों का कद बहुत छोटा है। अगर वह कोई बड़ा कांड भी करता है तो उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। दोहरे हत्याकांड की नींव हत्यारोपी की इसी सोच पर तैयार हो गई।
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एचपीसीएल के डीजीएम सुधीर गुप्ता की ओर से 14 जनवरी को डीएम से मिलकर जो शिकायत दी गई, उसमें उन्होंने एसडीएम और सीओ को जांच कर आख्या तलब की थी। साथ ही एसएसपी को दी गई शिकायत की जांच इसी तर्ज पर थाना प्रभारी मूसाझाग को दी थी। जाहिर है कि एक ओर जहां शासन की ओर से उद्योगों को प्रोत्साहन और भयमुक्त माहौल देने के लिए तमाम समिट कराई जा रही हैं, मुख्यमंत्री विदेशों में जाकर उद्यमियों को प्रदेश में निवेश का निमंत्रण दे रहे हैं, वहीं दबंगों की हठधर्मिता के खिलाफ इस तरह की शिकायत को भी बेहद हल्के में लिया गया। इन शिकायतों और इन पर हो रही जांच व कार्रवाई का फीडबैक लेने की जहमत भी अफसरों ने नहीं उठाई जिसका नतीजा दोहरे हत्याकांड के रूप में सामने आया।
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वहीं, नेताओं के इशारे पर थानों में तैनाती देने व सुस्त कार्यशैली के लिए चर्चित रहे तत्कालीन एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने इससे भी आगे बढ़कर कारनामा कर दिखाया। सूत्र बताते हैं कि सीओ उझानी रहे देवेंद्र कुमार ने जब उन्हें इंस्पेक्टर मूसाझाग अजय कुमार की लचर कार्यशैली का जिक्र कर उन्हें हटाने की संस्तुति वाली जांच रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी तो उन्होंने तत्काल ही कोई निर्णय नहीं लिया।
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उन्होंने न तो इंस्पेक्टर पर कोई कार्रवाई की और न ही कंपनी अधिकारियों को सुरक्षा देने का ही कोई इंतजाम किया। इसकी बजाय उन्होंने सीओ की जांच रिपोर्ट का परीक्षण कराने का फैसला ले लिया। करीब महीने भर से दौड़ रहे कंपनी अधिकारियों की गतिविधियों पर अजय प्रताप सिंह नजर रख रहा था। वह भी भांप चुका था कि उसके राजनीतिक संरक्षणदाताओं के मुुकाबले अफसरों का कद बहुत छोटा है। अगर वह कोई बड़ा कांड भी करता है तो उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। दोहरे हत्याकांड की नींव हत्यारोपी की इसी सोच पर तैयार हो गई।